अब आईं सवर्णो की बारी : मोदी सरकार ने लिया दस प्रतिशत आरक्षण देने का निर्णय

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ऐतिहासिक फैसला है ये मोदी सरकार के..अब शायद सवर्णो के दिन भी फिर जाएँ कुछ हद तक

मोदी सरकार ने ये प्रायश्चित किया है एससीएचटी एक्ट को लागू करने पर. उस फैसले ने न जाने कितने सवाल खड़े किये थे मोदी और उनकी सरकार पर. और उस फैसले का असर तीन राज्यों के चुनाव में भी कुछ सीमा तक देखने को मिला है.

आज मोदी सरकार द्वारा लिया गया फैसला एक तरफ तो उसकी सकारात्मकता को दर्शता है दूसरी तरफ उसकी न्यायप्रियता को भी प्रदर्शित करता है. विपक्ष ने कहा है कि मोदी सरकार ने सवर्ण कार्ड खेला है. और वास्तव में विपक्ष का डर समझ आता है क्योंकि अब यदि संसद में मोदी सरकार के इस फैसले को समर्थन मिल गया तो लोकसभ चुनाव में विपक्ष के लिए बड़ी चुनौती खड़ी हो जायेगी.

सवर्णों को नए वर्ष का तोहफा दिया है सवर्णों को. साल की पहली कैबिनेट बैठक में मोदी सरकार ने सवर्णों के लिए 10 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था तैयार कर के विपक्षी दलों को भौंचक्का कर दिया है. विपक्ष के चौंकने की गूँज आज विपक्षी नेताओं की बयानों को सुन कर सुनाई दी.

हाँ, ये बात ज़रूर है कि ये व्यवस्था न्याय को दृष्टि में रख कर की जा रही है और केवल पिछड़े सवर्णों को ही यह आरक्षण प्राप्त हो सकेगा.

इस व्यवस्था के लिए बीजेपी ने संविधान में संशोधन की तैयारी भी कर ली है और यह जानकारी अचंभित विपक्ष को किसी भी तरह से हजम नहीं हो रही है. आज के बाद से अब सवर्ण भी मीडिया की सुर्खियों में आ गए हैं.

अहम बात ये है कि सरकार ने इस निर्णय को लेकर जितनी गंभीरता दिखाई है उसके पैमाने और दायरे तैयार करने में भी उतनी ही समझदारी दर्शाई है. 10 फीसद आरक्षण के दायरे में सरकार ने सिर्फ उन सवर्णों को शामिल किया है जिनकी वार्षिक आय 8 लाख रुपये से कम हो और / अथवा जिनके पास पांच एकड़ से कम भूमि का स्वामित्व हो.

इतना ही नहीं, वे सवर्ण भी इस आरक्षण के दायरे में आएंगे जिनका घर 1000 स्क्वायर फीट जमीन से कम में होगा. जिन सवर्णों का निगम में आवासीय प्लॉट 109 यार्ड से कम होगी वे भी इस आरक्षण के पात्र होंगे.

(पारिजात त्रिपाठी)

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