अब होगा देश में जनसंख्या पर वास्तव में नियंत्रण

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बीजेपी ने प्रस्तुत किया है जनसंख्या नियंत्रण पर विधेयक, पार्टी नेताओं का मानना है कि देश में 2 और 11 का अनुपात अस्वीकार्य है..

आज से चौंतीस साल पहले संजय गाँधी ने शुरुआत की थी देश की जनसंख्या पर लगाम लगाने की. आज की तरह उस समय भी समाज के एक प्रमुख अल्पसंख्यक वर्ग ने जम कर उस मुहीम का विरोध किया था. लेकिन कांग्रेस का वह नेता अलग मिटटी का बना था. अल्पसंख्यक तुष्टिकरण से अधिक उसके लिए देश का हित था इसलिए उसने किसी की एक न सुनी और पकड़ पकड़ कर लोगों की नसबंदी कराई.

1975 – 1977 का वह दौर मीसा अर्थात आपातकाल कहलाता है. जहां उसकी तमाम बुराइयां या नकारात्मक पक्ष थे वहीं एक सकारात्मक पक्ष भी था जिसके तहत देश हित का कोई भी निर्णय सरकार बलपूर्वक लागू कर सकती थी. आज आपातकाल का दौर नहीं है, आज शुद्ध प्रजातांत्रिक भारत युग है क्योंकि यह कांग्रेस का नहीं भाजपा का शासनकाल है. और भाजपा के सर्वोच्च नेता नरेंद्र मोदी देश हित में बड़े बड़े फैसले ले रहे हैं. लेकिन उनकी कार्यशैली सबका साथ और सबका विकास है.

भाजपा ने संसद के पटल पर जनसंख्या नियंत्रण पर एक विधेयक प्रस्तुत किया है जो कि अभी विचाराधीन है. पार्टी के प्रतिनिधि नेता का कहना है कि भाररतवर्ष में समानता होनी चाहिए, देश में 2 और 11 का अनुपात अस्वीकार्य है. केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने जनसंख्या विस्फोट को चिंता व्यक्त की उन्होंने कहा कि जनसंख्या नियंत्रण को लेकर देश सांस्कृतिक विभाजन की ओर बढ़ रहा है, इस पर क़ानून का निर्माण किया जाना चाहिए.

इस विधेयक में प्रस्ताव किया गया है कि प्रति दंपति दो बच्चों को एक मानक बनाया जाए. इस मानक को केंद्र में रख कर एक निजी विधेयक शुक्रवार को राज्यसभा में पेश किया गया. इसमें टू चाइल्ड नार्म्स का ज़िक्र किया गया है अर्थात एक परिवार में सिर्फ़ दो बच्चे हों. इस बिल को जनसंख्या विनियमन विधेयक, 2019 का नाम दिया गया है. संघ के महत्वपूर्ण विचारक और पार्टी के स्पोक्सपर्सन राकेश सिन्हा के द्वारा प्राइवेट मेंबर के तौर पर इस विधेयक को प्रस्तुत किया गया है.

ध्यान देने वाली बात ये है कि अब तक कांग्रेसराज में अल्पसंख्यक तुष्टीकरण करते हुए संविधान का उल्लंघन किया है. एक देश में दो कानून संभव नहीं और एक देश में दो वर्गों पर अलग-अलग नियम कायदों का चलन प्रजातंत्र की भी अवहेलना है. इसी कारण आज देश के प्रमुख अल्पसंख्यक वर्ग ने अपनी जनसंख्या दिन-दूनी रात चौगुनी बढ़ाई है जो देश के भौगोलिक, सामाजिक और धार्मिक अस्तित्व के लिये भी घातक है. जनगणना में दोनो स्तरों पर चालाकी की जाती है और इस वर्ग की सही गिनती कभी सामने नहीं आ पाती है. मौजूदा वास्तवकि आकलन इस वर्ग की जनसंख्या का प्रतिशत देश की कुल जनसंख्या के 35 प्रतिशत से ऊपर का हो सकता है.

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