अमित हुए कुपित, सबरीमाला पर चेतावनी दी मुख्यमंत्री को

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जैसा कि सब जानते हैं सबरीमाला कोई मुद्दा नहीं बल्कि बनाया गया मुद्दा है. किसी भी धार्मिक स्थान के कुछ नियम होते हैं जिनका पालन अनिवार्य होता है. ये नियम धार्मिक दृष्टि से निर्धारित होते हैं इसमें राज्य या सरकार को दखल देने का कोई अधिकार नहीं होता.

हिन्दुओं में वैसे भी दुनिया के किसी भी धर्म में जो नहीं होता, वह होता है अर्थात शुद्धता को बहुत ही अधिक महत्त्व दिया जाता है. हिन्दू धर्म तो शुद्धता से भी दो कदम आगे जा चुका है जिसमे शुद्धता के पश्चात पवित्रता आती है और उसके बाद दिव्यता, जिसकी कल्पना भी दुनिया के किसी अन्य धर्म में नहीं हो सकती.

ये धार्मिक नियम हैं, कोई क़ानून नहीं कि इनमें परवर्तन किया जा सके. और ये धार्मिक नियम वर्षों से नहीं, युगों युगों से मान्य हैं. इसमें विवाद जैसे कोई वस्तु बीच में नहीं आती क्योंकि सभी जानते हैं कि शुद्धता और पवित्रता से ही दैवीयता आती है जो दुनिया के हर मंदिर का एक अनिवार्य और अपरिहार्य विषय है. फिर यह दुष्ट जिद कि अशुद्ध हो कर मंदिर में प्रवेश करेंगे कदापि स्वीकारणीय नहीं है.

यही है वह मूल विषय जिसको लेकर सबरीमाला मंदिर को विवादों में घसीटा जा रहा है. कुछ विधर्मी महिलाओं के नेतृत्व में स्थानीय महिलायें धर्म में प्रजातंत्र घुसा कर मंदिर में घुसने की फिराक में हैं जो यहां सम्भव नहीं हो सका है. न केवल मंदिर के पुजारी इसका विरोध कर रहे हैं बल्कि शेष समस्त स्थानिये हिन्दू नागरिक भी इन महिलाओं की इस दुष्टतापूर्ण जिद का विरोध कर रहे हैं. और उनका यह विरोध सफल भी हुआ है. एक विधर्मी महिला के कहने पर कई महिलायें यहां रजस्वला स्थिति में प्रवेश करने की जिद कर रही हैं.

मूल रूप से वामपंथी विचारधारा के इस प्रदेश में सरकार भी वामपंथी ही है. स्वाभाविक है कि हिंदुत्व और उससे जुड़े सभी विषयों पर वह उलट सोच रखती है. सबरीमाला मंदिर के इस विवाद में भी उसने मंदिर की मान्यताओं को ताक पर रख कर इन कुटिल महिलाओं का साथ देने की नीति अपनाई है. यद्यपि मुख्यमंत्री विजयन की ये नीति किसी काम नहीं आई है.

पर जब प्रांत की सरकार को हिन्दू मंदिर के विरोध में देखा तो भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को बीच में आना ही पड़ा. हिन्दू मंदिर की मान्यताओं को सम्मान देते हुए अमित शाह ने सीधे राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया. शाह ने कहा कि सरकार होश में आये और हमारे धार्मिक मामले में दखल न ही दे तो अच्छा है. वरना सबक सिखाना हमें अच्छी तरह आता है!!

सबसे अहम बात ये है कि सबरीमाला टेम्पल के आसपास सवा दो सौ से ज्यादा चर्च हैं. और ये महिलायें जो मंदिर में अस्वच्छ स्थिति में घुसने की जिद कर रही हैं वे हिन्दू महिलायें नहीं हैं. ये सभी महिलायें क्रिश्चियन, मुस्लिम और हिन्दू से क्रिश्चियन कन्वर्टेड व हिन्दू से मुस्लिम कन्वर्टेड महिलायें हैं जो क़ानून का सहारा ले कर सनातन धर्म की पवित्रता को भंग करने का कुत्सित षड्यंत्र रच रही हैं.

(पारिजात त्रिपाठी)

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