अस्सी बच्चों का हुआ दिनदहाड़े अपहरण : ले गए हैं जंगल में

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अफ्रिका इन मिनिएचर की है ये खबर याने कि कैमरून की है ये घटना. मध्य और पश्चिमी अफ्रीका में स्थित यह देश वैसे तो अपराधों के लिए नहीं जाना जाता है पर इसके पड़ौस में स्थित देश जिसे हम नाइजीरया के नाम से जानते हैं, आतंकवाद प्रभावित देश है. ज़ाहिर है कि लपटें पड़ौसियों तक भी जाएंगी.

कैमरून के पश्चिमी भाग में स्थित बमेंदा शहर है गवाह इस घटना का. बामेन्डा के एक स्कूल से प्रधानाध्यापक समेत 80 बच्चों का कल सोमवार की सुबह अपहरण कर लिया गया है. वैसे तो किसी भी आतंकवादी संगठन ने इस अपहरण का जिम्मा नहीं लिया है. पर जैसा कि सेना बता रही है इस वारदात को किसी आतंकवादी गैंग ने अंजाम दिया है.

हरे-भरे पहाड़ों के बीच बसा बमेंडा शहर कैमरून के कुछ उन शहरों में शामिल है जहां अंग्रेज़ी बोली जाती है. माना जाता है कि अलगाववाद की एक वजह भाषाई विवाद भी है.

सेना ने बताया कि आतंकवादियों ने बच्चों के साथ साथ प्रधानाध्यापक को भी अगवा किया है और वे सभी को जंगल में कहीं भीतर ले गए हैं.

जिन्हें कैमरून की सेना आतंकवादी कह रही है वे मूल रूप से अलगाववादी हैं पर उनके काम करने का तरीका आतंकवादियों जैसा ही है. इन्ही अलगाववादियों ने शहर को कर्फ्यू की गिरफ्त में ले रखा है.

दरअसल यहां तथाकथित अलगाववादी राष्ट्रपति पॉल बिया की फ्रेंच बोलने वाली सरकार को नापसंद करते हैं. सरकार के विरोध में इन अलगाववादियों ने कर्फ्यू लगा रखा है.उन्होंने अपने प्रदर्शन के दौरान स्कूलों को भी बंद रखने की धमकी दी थी, लेकिन सोमवार को यह स्कूल खुला हुआ था. शायद यही कारण है कि बच्चों को प्रिंसिपल सहित अगवा कर लिया गया है.

सरकारी प्रवक्ता के अनुसार बच्चों को खोजने के लिए अभियान शुरू कर दिया गया है जिसमें अभी तक कोई सफलता हाथ नहीं लगी है.

कैमरून में पहले ये अलगाववादी शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया करते थे. लेकिन जब इनके प्रदर्शनों पर सरकार सख्त हुई तो ये प्रदर्शन हिंसक आंदोलन में बदल गए. इसी कारण इस शहर बमेंदा समेत अन्य इलाकों को छोड़कर कई नागरिक फ्रांस के शांतिपूर्ण इलाकों में जा कर बस गए हैं.

(भुवन चंद्र भट्ट)

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