राजस्थान में अस्सी विधायकों की किस्मत दांव पर

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राजस्थान विधानसभा चुनाव में अब सबसे ज्यादा गहमागहमी टिकट बंटवारे को लेकर है. लगभग अस्सी विधायकों की जान सांसत में है क्योंकि इस बात की पूरी संभावना है कि टिकट उनको न मिलकर किसी और को दे दिया जाए.

चाहे भारतीय जनता पार्टी हो चाहे कांग्रेस, दोनों पार्टियों के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है टिकट का यह खेल. अस्सी नए विधायक याने कि हालात में बहुत बड़ा परिवर्तन. या ऐसे कहें कि फिर थोड़ा मुश्किल होगा यह अनुमान करना कि कौन जीतने जा रहा है और कौन हारने जा रहा है. जयपुर में टिकटों की बंटाई प्रदेश में दोनों पार्टियों के लिए चुनाव बना सकता है तो बिगाड़ भी सकता है.

ज़मीनी माहौल देखें तो कोई लहर साफ़ तौर पर दिखाई नहीं देर रही है और इससे यह ज़ाहिर होता है कि अब चुनाव की दिशा और दशा उन चेहरों पर निर्भर करेगी जिनको दोनों पार्टियां पार्टियां चुनावी मैदान में उतारेंगी. भाजपा साफ़ तौर पर विचार किया जा रहा है कि आधे से ज़्यादा यानी 80 विधायकों के टिकट काट दिए जाएँ याने अब अस्सी नए चेहरे सामने आ सकते हैं. लेकिन एक और विचार भी नापा तौला जा रहा है कि अगर कुछ पूर्व सांसदों को लड़ा दिया जाए तो कैसा रहे?

और अगर बात करें कांग्रेस की तो हालात और भी मुश्किल से भरे हुए हैं. कांग्रेस की परेशानी यह है कि ‘मेरा बूथ मेरा गौरव कार्यक्रम’ के दौरान बूथ लेवल कार्यकर्ताओं से ज़्यादा उम्मीदवार और टिकटार्थी पैदा हो गए है और अगर इनको टिकट नहीं दिया गया तो ये विद्रोह कर सकते हैं. इसलिए कांग्रेस के लिए भी टिकट बंटवारा किसी चुनौती से कम नहीं है.

फिलहाल टिकट बंटाई पर भाजपा का कहना है कि हम पार्टी कार्यकर्ताओं से बातचीत करके ही कोई फैसला लेंगे. पार्टी के राजस्थान चुनाव प्रभारी प्रकाश जावड़ेकर कहते हैं कि हमने कार्यकर्ताओं से तीन प्रश्न किये हैं कि सरकारी योजनाओं पर आपका सकारात्मक पक्ष और नकारात्मक पक्ष क्या है? आपके क्षेत्र में कांग्रेस का प्रत्याशी कौन है?

भाजपा जिस संकट से जूझ रही है वह है राजस्थान में चल रही विरोधी लहर और यही वह मजबूत तथ्य है कि भाजपा इस राज्य में अपने आधे से ज़्यादा यानी 80 विधायकों के टिकट काट सकती है. मुख्यमंत्री राजे कहती हैं कि चाहे जिसे भी टिकट मिले, चुनाव में हमने प्रेरणा के रूप में चुनाव लड़ने का फैसला किया है. लेकिन एक और रणनीति भी विचार मंथन चल रहा है कि अगर मौजूदा सांसदों को कांग्रेस के दिग्गजों के सामने उतार दिया जाये तो क्या जीतने की संभावना बढ़ाई जा सकती है?

अगर ऐसा हुआ तो जयपुर से सांसद रामचरण बोहरा को जयपुर विधानसभा की सांगनेर सीट से लड़ाया जा सकता है. इसी तरह कर्नल सोनाराम को बाड़मेर में लोकसभा सीट पर नहीं बल्कि वहां की विधानसभा सीट बायतू से चुनाव मैदान में उतारा जा सकता है.

रोड के उस पार चलते हैं तो देखते हैं कि कांग्रेस के भीतर अपने ही क्षेत्रीय कद्दावर नेताओं में लट्ठ्मारी चल रही है. अशोक गेहलोत और सचिन के नेतृत्व को लेकर रस्साकशी जग ज़ाहिर है. दोनों नेताओं के समर्थक अपने अपने नेताओं को टिकट दिलवाना चाहते हैं. जब टिकट बंटवारे पर अशोक गहलोत से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि यह निर्णय स्क्रीनिंग कमेटी के हाथ में हैं.

(पारिजात त्रिपाठी)

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