आज भी राम-राज्य है यहाँ थाईलैन्ड में!

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आज मेरा जन्मदिन है और मैं अयोध्या नगरी में हूँ..

मुल्क से हजारों मील दूर , होटल के कमरे में पौ फटने का मुझे इंतज़ार है। इस भोर-विहान के साथ मेरा अंतरंग संबंध जो ठहरा!

अब तो विज्ञान भी यह मानने लगा है कि जिस घड़ी में आपका जन्म हुआ होता है, उस समय के आसपास, आपकी सक्रियता सर्वाधिक होती है। माँ बताती थी कि ननिहाल में आज ही के दिन, उषाकाल में मेरा जन्म हुआ था।

छात्र जीवन हो या नौकरी–भोर में जगने की मेरी आदत गई नही। यह रिश्ता कुछ कहलाता है–ब्रह्म मुहूर्त और इहलोक के इस जीवन का सफर तो अब उतार पर आ गया है 😊

कदाचित आपको न मालूम हो, कि भारत के बाहर थाईलेंड में आज भी संवैधानिक रूप में राम राज्य कायम है l वहां भगवान राम के छोटे पुत्र कुश के वंशज सम्राट “भूमिबल अतुल्य तेज ” अब राज्य कर रहे हैं , जिन्हें नौवां राम भी कहा जाता है l

आदि काल में मिथिला के राजा सीरध्वज जनक हुआ करते थे, जिन्हें लोग विदेह भी कहते हैं। उनकी पत्नी का नाम सुनेत्रा ( सुनयना ) था, जिनकी पुत्री ही सीता जी थी और कालांतर में उनका विवाह प्रभु श्रीराम से हुआ था l

केशव दास रचित ”रामचन्द्रिका“ पृष्ठ 354 (प्रकाशन संवत 1715) के अनुसार, प्रभु श्रीराम के जीवनकाल में ही उनके सभी भाइयों के पुत्रों के बीच, राज्य का बँटवारा हो गया था।

पश्चिम में लव को लवपुर (लाहौर ) मिला, तो पूर्व में कुश को कुशावती।

कुश ने अपना राज्य का विस्तार पूर्व की तरफ किया और आगे चलकर एक नाग वंशी कन्या से उनका विवाह हुआ l थाईलैंड के राजा उसी कुश के वंशज हैंl इस वंश को “चक्री वंश” भी कहा जाता है।

चूँकि राम को विष्णु का अवतार माना जाता है, और विष्णु का आयुध चक्र होता है इसी लिए थाईलैंड के लोग “चक्री वंश” के हर राजा को “राम” की उपाधि देकर, उनके नाम के साथ संख्या भी आबद्ध कर देते हैं l जैसे अभी नौवें राम का राज्य थाईलैंड में कायम हैं जिनका नाम “भूमिबल अतुल्य तेज ” है।

थाईलैंड की अयोध्या

लोग थाईलैंड की राजधानी को अंग्रेजी में बैंकॉक (Bangkok) कहते हैं, क्योंकि इसका सरकारी नाम विश्व का सबसे बडा नाम माना जाता है।

इसका नाम संस्कृत शब्दों के मेल से बना है, देवनागरी लिपि में पूरा नाम इस प्रकार से है–

“क्रुंग देव महानगर अमर रत्न कोसिन्द्र महिन्द्रायुध्या महा तिलक भव नवरत्न रजधानी पुरी रम्य उत्तम राज निवेशन महास्थान अमर विमान अवतार स्थित शक्रदत्तिय विष्णु कर्म प्रसिद्धि ।”

थाई भाषा में इस पूरे नाम को लिखने में कुल 163 अक्षरों का प्रयोग किया गया है। इस नाम की एक और विशेषता है– इसे बोला नहीं बल्कि गाया जाता है।

कुछ लोग आसान शब्दो में इसे “महेंद्र अयोध्या ” भी कहते हैं। अर्थात इंद्र द्वारा निर्मित महान अयोध्या। थाईलैंड के जितने भी राम ( राजा ) हुए हैं सभी इसी अयोध्या में रहते आये हैं l

ऐसी धारणा है कि असली राम राज्य थाईलैंड में ही है।

बौद्ध होने के बावजूद थाईलैंड के लोग अपने सभी राजाओं (राम) को विष्णु का अवतार मानते आये हैं, इसलिए थाईलैंड में आज भी एक तरह से राम राज्य है। वैसे थाईलैंड में संवैधानिक लोकतंत्र की स्थापना 1932 में हुई थी।

थाईलैंड के राजा (भगवान राम के वंशजों) की यह स्थिति है कि उन्हें निजी अथवा सार्वजनिक तौर पर कभी भी विवाद या आलोचना में नहीं घसीटा जाता, वे पूजनीय हैं।

थाई शाही परिवार के सदस्यों के सम्मुख थाई जनता उनके सम्मानार्थ सीधे खड़ी भी नहीं होती, वे झुककर ही अभिवादन की मुद्रा में खडे़ रहते हैं। राजा की तीन पुत्रियों में से एक तो, हिन्दू धर्म की मर्मज्ञा भी है।

थाईलैंड का राष्ट्रीय ग्रन्थ रामायण है।

यद्यपि थाईलैंड में “थेरावाद बौद्ध” के लोग बहुसंख्यक हैं, फिर भी वहां का राष्ट्रीय ग्रन्थ रामायण है। थाई भाषा में इसे ”राम कियेन” कहते हैं। जिसका अर्थ होता है”राम कीर्ति”, जो वाल्मीकि रामायण पर आधारित है।

इस ग्रन्थ की मूल प्रति सन 1767 में नष्ट हो गयी थी, पर चक्री राजा, राम प्रथम (1736–1809) ने अपनी स्मरण शक्ति के आधार पर उसे फिर से लिख दिया था।

थाईलैंड में रामायण को राष्ट्रीय ग्रन्थ घोषित करना इसलिए संभव हुआ, क्योंकि वहां भारत की तरह कथित सेक्युलर लोग नहीं हैं।

थाईलैंड में “राम कियेन” पर आधारित नाटक और कठपुतलियों का प्रदर्शन देखना अत्यंत धार्मिक कार्य माना जाता है।

थाईलैंड में बौद्ध बहुसंख्यक और हिन्दू अल्पसंख्यक हैं l फिर भी थाईलैंड में साम्प्रदायिक दंगे कभी नहीं हुए l थाईलैंड में बौद्ध भी हिन्दू देवताओं की पूजा करते हैं।

थाईलैंड का राष्ट्रीय चिन्ह भी गरुड़ है।

गरुड़ अब लुप्त हो चुका है l अंगरेजी में इसे ब्राह्मणी पक्षी (The Brahminy Kite ) भी कहा जाता है। वैसे इसका वैज्ञानिक नाम “Haliastur Indus” है l

फ्रैंच पक्षी विशेषज्ञ मथुरिन जैक्स ब्रिसन ने इसे सन 1760 में दक्षिण भारत के पाण्डिचेरी शहर के पहाड़ों में गरुड़ देखा था और इसका नाम Falco Indus रख दिया था।

इससे यह प्रमाणित होता है कि गरुड़ काल्पनिक पक्षी नहीं है। भारतीय पौराणिक ग्रंथों में गरुड़ को विष्णु का वाहन माना गया है l

चूँकि राम विष्णु के अवतार हैं, और थाईलैंड के राजा राम के वंशज, अतएव बौद्ध होने पर भी हिन्दू धर्म में उनकी अटूट आस्था हैं। इसीलिये देशवासियों ने ”गरुड़” को राष्ट्रीय चिन्ह घोषित कर रखा है l यहां तक कि थाई संसद के मुख्य द्वार के सामने भी गरुड़ की मूर्ति बनी हुई है।

सुवर्णभूमि हवाई अड्डा।

दुर्भाग्यवश भारत में कई सड़क और भवन, आक्रांताओं ने नाम पर है। पर थाईलैंड की राजधानी के हवाई अड्डे का नाम आज भी सुवर्ण भूमि है। यह आकार के मुताबिक दुनिया का दूसरे नंबर का एयर पोर्ट है। इसका क्षेत्रफल 563,000 स्क्वेयर मीटर है। एयरपोर्ट के स्वागत हाल के अंदर समुद्र मंथन की भव्य मूर्ति बनी हुई है।

नाग के फन की तरफ असुर और पुंछ की तरफ देवता गण हैं। जो भी व्यक्ति इस ऐयरपोर्ट के अंदर घुसता है वह यह दृश्य देख कर मन्त्र मुग्ध हो उठता है।

थाई लोगों को बखूबी पता है कि संस्कृति की उपेक्षा कर कोई भी समाज अधिक दिनों तक जीवित नहीं रह सकता।

भारत में आजकल सेकुलर गिरोह द्वारा सनातन संस्कृति की उपेक्षा और उपहास, एक सोची समझी साजिश के तहत हो रहा है और दुर्भाग्यवश इससे हमारी नई पीढ़ी बिल्कुल अनजान है।

आपके सभी के शुभकामनाओं की अपेक्षा के साथ,थाईलैंड से..

(जीपी सिंह)

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