उधर भी किया आउट तो इधर भी किया बाहर : 28 कांग्रेस-जन हुए बेरोजगार

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‘वो बाहर कर सकते हैं तो हम क्यों नही कर सकते!’ ..बराबर की टक्कर है बीजेपी और कांग्रेस में.. 

विधानसभा चुनाव 2018 राजस्थान में खूब धूम मचा रहा है. कइयों को टिकट मिल गया तो हो गई चांदी और कइयों को उसके लिए संघर्ष की राह पर चलना पड़ा और हो गए बाहर.

ऐसे जुझारू कांग्रेसियों की प्रतिभा की परख राजस्थान कांग्रेस ने नहीं की. और इन सब को कान पकड़ कर बाहर कर दिया. इन 28 कांग्रेस नेताओं में पूर्व मंत्री और पूर्व विधायक भी शामिल हैं. उन्हें दुःख इसका नहीं है कि वे पूर्व मंत्री थे, दुःख इस बात का है कि अब मंत्री तो क्या विधायक भी नहीं बन पाएंगे.

बड़ा फैसला लिया सचिन पायलट ने वो भी तब जब सर पर चुनाव मंडरा रहा है. क्योंकि ये 28 घर के भेदी बन गए तो कांग्रेस की लंका ढाने की कोशिश तो कर ही सकते हैं. लेकिन पार्टी का कहना है कि अनुशासनहीनता कटाई बर्दाश्त नहीं है. और तो और इन तथाकथित अनुशासनहीन कोंग्रेसी नेताओं पर तो पार्टी विरोधी गतिविधियों का भी आरोप लगाया गया है.

कल ही (रविवार, 26 नवंबर) एक आदेश आया राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी का और एक झटके में 28 कांग्रेसी नेताओं को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से 6 वर्ष के लिए निष्कासन का दंड दे दिया गया. पार्टी ने बताया कि ये कांग्रेस के असली प्रत्याशियों के खिलाफ चुनाव लड़ रहे थे. कांग्रेस के इन दुस्साहसी नेताओं में पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री, तीन पूर्व जिला अध्यक्ष, पूर्व महासचिव, पूर्व सचिव और नौ पूर्व विधायक शामिल हैं.

पार्टी की तरफ से आये अधिकृत वक्तव्य में बताया गया है कि इन नेताओं में पूर्व केन्द्रीय राज्य मंत्री एवं खंडेला से अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ चुनाव लड़ रहे महादेव सिंह खण्डेला, करणपुर के पूर्व जिला अध्यक्ष पृथ्वीपाल सिंह संधू, बूंदी के पूर्व जिला अध्यक्ष सी एल प्रेमी, किशनगढ के पूर्व जिलाध्यक्ष नाथूराम सिनोदिया, पूर्व चेयरमैन राजस्थान घुमंतू—अद्र्घुमंतू बोर्ड गोपाल केसावत, आदि बड़े नाम शामिल हैं.

(पारिजात त्रिपाठी)