एक तरफ था अमेरिका का विश्वास दूसरी तरफ उत्तर कोरिया ने दाग दी मिसाइलें

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उत्तर कोरिया का सनकी तानाशाह सोच रहा है कि दुनिया उसकी ताकत से हैरान रह जायेगी..

दुनिया में बड़े-बड़े ताकतवर देश हैं जो अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शक्ति संतुलन की भूमिका में हैं. उत्तर कोरिया का सनकीपन उसका अपना दिखावा है. दुनिया में कोई देश उसकी ताकत से प्रभावित नहीं होने वाला. अमेरिका को धमकियां दे कर जरूर किम जोंग ने दुनिया के कई देशों का ध्यान अपनी तरफ खींचा था. किन्तु इससे उत्तर कोरिया की सनक की जानकारी से ज्यादा किसी को कुछ नहीं मिला.

अमेरिका ने हाल में ही उत्तर कोरिया के साथ बहु-प्रतीक्षित मीटिंग को अंजाम दिया था. दोनों देशों से अलग किसी तीसरे देश में मीटिंग के प्रस्ताव पर दोनों तरफ से सहमति बनी थी और फिर वियतनाम में इसी वर्ष फरवरी की 27 तारीख को किम जोंग और डोनाल्ड ट्रम्प की मुलाकात भी हो गई. इस मीटिंग में ट्रम्प को जोंग ने भरोसा दिलाया था कि वह विश्वशांति भंग करके आमरीकी भरोसे को भंग नहीं करेंगे.

लेकिन शायद यह किम जोंग की याददाश्त का मसला नहीं है, यह नॉर्थ कोरिया की वो सनक है जिससे सारी दुनिया में कोई भी अपरिचित नहीं. यही कारण है कि नार्थ कोरिया का कोई दोस्त नहीं है क्योंकि उस पर कोई विश्वास करके नहीं चल सकता. और यह समस्या दरअसल उत्तर कोरिया के लिए अच्छी खबर नहीं है.

अमरीकी राष्ट्रपति किम जोंग के प्रति अति-आत्मविश्वास से भरे नज़र आये. उन्होंने शुक्रवार रात को ही इस सिलसिले में वक्तव्य जारी कर दिया था कि उनको भरोसा है कि उत्तर कोरिया के किम जोंग अपना वादा नहीं तोड़ेंगे. और मज़े की बात है कि विलम्ब नहीं हो पाया और शनिवार को ही उत्तर कोरिया के मिसाइल टेस्ट करने की पिक्चर्स दुनिया के सामने आ गईं.

उत्तर कोरिया के किम जोंग-उन ने अपनी ज़िद पूरी कर ली. उसने उन प्रक्षेपास्त्रों का भी परीक्षण किया जो पिछले साल से ज्यादा वक्त से इस दिन का इन्तज़ार कर रही थीं. ये प्योंगयोंग द्वारा प्रक्षेपित प्रथम छोटी दूरी पर मार करने वाली मिसाइलें भी हो सकती है. किम जोंग ने इसके साथ ही अपनी निगरानी में लंबी दूरी वाले अनेक रॉकेट लॉन्चर्स और सामरिक हथियारों का परीक्षण करके दुनिया को एक बार फिर से अपने असंतुलित मानस की झलक दिखा दी है.

भले ही यह उत्तर कोरिया की लंबित पड़ी परमाणु वार्ता को लेकर अमेरिका पर दबाव बनाने की दिशा में उसकी चाल हो, तदापि अब दुनिया के कुछ देशों को अंतर्राष्ट्रीय पटल पर अपनी सामरिक तैयारियों पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है. उत्तर कोरिया को भी चीन, रूस और पाकिस्तान में अपना सच्चा मित्र खोजना दुष्कर हो जायेगा..कम से कम अन्दरूनी संबन्धों की भूमि पर तो यही संभावना दृष्टिगत होती है.

अधिक डरावनी तसवीर कहीं कल ये न सामने आये कि उत्तर कोरिया मध्य-पूर्व के आतंकियों से हाथ मिला ले..क्योंकि उस हालत में आतंक की ताकत दुनिया के ऊपर कई गुनी अधिक घातक हो कर मंडराने लगेगी..

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