और बचाओ कसाब को ! : कसाब के वकीलों को धेला भी नहीं मिला

Share on facebook
Share on twitter
Share on google
Share on pinterest
Share on telegram
Share on whatsapp
Share on email

आतंकियों का कोई ईमान धरम नहीं होता..ये वकील उम्मीद कर रहे हैं कि कसाब के बचाव की फीस मिल जायेगी..

अमीन सोलकर और फरहाना शाह हैं नाम इन दो अभियोजकों अर्थात वकीलों का.

ये दोनों वकील मुंबई के हैं. मुंबई में 2008 को आतंकी हमला हुआ था जिसमें 166 लोग मारे गये थे. और उस हमले के खलनायक अजमल कसाब को बचाने का बीड़ा उठाया था इन दोनों वकीलों ने.

केस लड़ा. खूब लड़ा, जम कर लड़ा. पर मिला क्या? न कसाब को बचा सके न अपनी इज्जत. और जो पैसा मिलना था वो भी नहीं मिला. जी हाँ, मुंबई उच्च न्यायालय के निर्देश पर कसाब के बचाव की जिम्मेदारी सम्हालने वाले दोनों वकील न मशहूर हुए न मेहनताना मिला. महराष्ट्र सरकार ने इनको अब तक एक धेला भी इनके काम के लिए नहीं दिया है.

लेकिन ये वकील हैं. ऐसे नहीं तो वैसे ले के रहेंगे पैसे. जिस पैसे के लिए ईमान और धरम भी बेच देते हैं उस पैसे को ऐसे कैसे जाने दें. इन्होने फैसला किया है कि हम कानूनी कार्रवाई करके पैसा वसूल करेंगे.

अब तक आतंकी कसाब को फांसी की सजा हुए 7 वर्ष बीत गए हैं पर ये बेचारे हैं कि आज भी अपनी फीस का इंतज़ार कर रहे हैं. राज्य सरकार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई को बाध्य हुए ये दोनों वकील उम्मीद है कि आगे देश के दुश्मनों की वकालात के बारे में सोचेंगे भी नहीं.

उधर इस निकम्मे आरोप पर महाराष्ट्र सरकार कह रही है कि इन लोगों ने तो अब तक कोई बिल ही जमा नहीं किया है. फिर पैसे किस बात के दे दें! दोनों वकील जवाब में कहते हैं कि ये काम राज्य अभियोजकों का (याने कि हमारा) नहीं था.

(पारिजात त्रिपाठी)

ट्रेंडिंग

काम की खबरें

देश

विदेश

मनोरंजन

राजनीति