कमलेश तिवारी पार्ट-2: फरार हत्यारे पुलिस के हाँथों से बच न सके

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दोनो आरोपी पहले तो आत्मसमर्पण की फिराक में थे लेकिन उनको लगा कि शायद पुलिस के हाथ चढ़ गये तो मार दिये जायेंगे. इसलिये दोनो ने भागने में ही भलाई समझी. हिंदू समाज पार्टी के अध्यक्ष कमलेश तिवारी की हत्या के ये दोनों आरोपी पुलिस को और चकमा देने में कामयाब नहीं हो पाये और पुलिस ने इनको धर दबोचा.

ह्त्या के दिन से ही भागे हुए दोनों मुख्य आरोपी अशफाक हुसैन और मोइनुद्दीन पठान के लिए पुलिस ने जगह जगह अपना जाल फैला दिया था और आखिरकार कामयाबी मिल ही गई. दोनों को गुजरात एंटी टेररिज़्म स्क्वाड ने राजस्थान-गुजरात बॉर्डर में ढूंढ निकाला.

कमलेश तिवारी की हत्या कर भागे अशफाक और मोइनुद्दीन सीधे बरेली पहुंचे थे जहां इनको मौलाना सैय्यद कैफी अली रिजवी ने शरण दी. सैयद कैफ़ी ने भी पूरी कोशिश की कि पुलिस को हवा न लग पाए पर क़ानून के हाथ उसकी गिरेबान तक पहुँच गए और वो पहुँच गया सीखचों के पीछे.

मौलाना को एसआईटी लखनऊ ने दबोचा. उससे हुई पूछताछ में कई राज़ फाश हुए. एसआईटी के सूत्रों के मुताबिक़ मौलाना ही वह शख्स था जिसने घायल हत्यारे की बरेली में मरहम-पट्टी करायी थी.

बरेली में मौलाना कैफी अली से एसआईटी ने तीन घंटे तक लगातार पूछताछ की. इस दौरानी मौलाना के सामने उसके फ़ोन की कॉल डिटेल भी रखी गई. डिटेल में नज़र आ रहे नंबरों में से आठ नंबर संदिग्ध लग रहे थे. इन नंबरों पर भी एसआईटी ने फोन लगाया. इनमें से दो नंबर लगातार बंद मिले.

एसआईटी के अनुसार बरेली में डॉक्टर के इलाज की बात पहले ही साफ हो गई थी. बरेली में हत्यारों के छिपे रहने की भी तस्दीक हो गई जिसके तुरंत बाद बरेली की एसआईटी ने अपनी जांच तेज़ कर दी. इसी बीच अगली कामयाबी मिली नागपुर से जहां इस ह्त्या का एक सहायक आसिम अली पकड़ में आ गया . इस शख्स की गिरफ्तारी से मिली जानकारियों ने पुलिस को मौलाना तक पहुंचाया.

दोनो आरोपियों से पूछताछ में कुलमिला कर जो जानकारी सामने आई उससे पता चला कि लखनऊ के खुर्शेदबाग में कमलेश तिवारी की हत्या करने के बाद इन दोनों हत्यारों सीधे होटल खालसा इन पहुंचे. होटल में दोनों ने अपने कपडे बदले और वहां से भाग कर तुरंत रेलवे स्टेशन पहुँच गए. पहली ट्रेन पकड़ कर दोनों बरेली पहुंचे और यहां पहुँच कर मौलाना से संपर्क किया. फ़ोन पर उसके द्वारा बताये स्थान पर दोनों पहुंचे जहां उनको मौलाना में रात को सोने की जगह मुहैया कराई. फिर मौलाना ने दोनों को ट्रेन से ही मुरादाबाद भेज दिया. लेकिन बीच में ही इन दोनों को किसी तरह पता चल गया कि मुरादाबाद में ट्रेन की चेकिंग की जायेगी. इसलिए ये दोनों बीच में ही उतर गए.

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