कोहली को गुस्सा क्यों आता है?

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ये मामला है विराट के जश्न बनाम ऑस्ट्रेलियाई स्लेजिंग का

विराट एक गंभीर खिलाड़ी हैं जो सही अर्थों में खेल भावना का सम्मान करते हैं. जो भी क्रिकेटप्रेमी विराट कोहली और उनके खेल को जानता हो और देखता आया हो, वो जानता है कि विराट वो खिलाड़ी हैं जो सामने वाली टीम के खिलाड़ियों की भी मैदान में उतना ही सम्मान करते हैं जितना अपने खिलाड़ियों का.

ऐसी हालत में यदि आज ऑस्ट्रेलिया में खेल रही भारतीय टीम की मैदानी सफलताओं पर विराट कोहली के जश्न मनाने से किसी को कोई समस्या हो रही है तो उसे समझ लेना चाहिए कि ये समस्या उसकी है, कोहली की नहीं!

कोहली को यदि आप इतना भड़का देंगे कि वे अपनी खेल भावना को पीछे कर के अपने खेल की आक्रामता पर पूरी तरह से आमादा हो जाएं, तो ज़िम्मेदारी भी आपकी ही है. आज ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों को तकलीफ है कि कोहली कुछ ज्यादा ही भड़कीले तरीके से मैदान में जश्न मना रहे हैं. यह भड़कीला जश्न आपके लिए हो सकता है, कोहली के लिए तो ये जोशीला जश्न है.

अब आते हैं मूल मुद्दे पर. मूल मुद्दा स्लेजिंग का है. सारी दुनिया जानती है कि ऑस्ट्रेलिया स्लेजिंग का मक्का है. सबसे ज्यादा और सबसे बुरी स्लेजिंग दुनिया में कहीं होती है तो वो ऑस्ट्रेलिया में ही होती है. अब समय आ गया है कि आईसीसी से बात की जाए और क्रिकेट के साथ लगा जेन्टलमैन्स गेम का टैग हटा दिया जाना चाहिए. या फिर कम से कम इतना तो किया ही जा सकता है कि ऑस्ट्रेलियन क्रिकेट को जेन्टलमैन्स गेम न कहा जाए.

ऑस्ट्रेलियन खिलाड़ी अपनी स्लेजिंग पर शर्मिन्दा नहीं होते. वो इसे खेल का हिस्सा मानते हैं. अर्थात मैदान में बदतमीजी खेल का हिस्सा है. ये परिभाषा ऑस्ट्रेलियन क्रिकेट की हो सकती है, इंटरनेशनल क्रिकेट की नहीं. ऑस्ट्रेलिया का तो स्लेजिंग को लेकर बड़ा लंबा इतिहास रहा है. इस सिलसिले में एक बार डेनिस लिली ने पाकिस्तानी खिलाड़ी को मैदान में लात भी मार दी थी. याने कि स्लेजिंग ज़ुबान से बढ़ कर हाथ-पैरों और घूंसे लात तक भी जा सकती है और इस हालत में कम से कम इस खेल को क्रिकेट तो नहीं कहा जा सकता.

आज हेजलवुड और कमिंस की स्लेजिंग पर बात नहीं हो रही है. आज ऑस्ट्रेलिया में बात हो रही है कि विराट कोहली इतनी ज़ोरदार तरीके से अपील क्यों कर रहे हैं, इतने जोशीले अंदाज़ में जश्न क्यों मना रहे हैं. ये सवाल पूछने का नहीं बल्कि सोचने का है. ऑस्ट्रेलिया को अब सोचना चाहिए कि बदतमीजी को खेल का हिस्सा बनाना उनके लिए भी नुकसानदेह हो सकता है.

वैसे यहां मेरा मानना है कि कोहली ने मैदान में अपने खेल के दौरान असभ्यता का कोई परिचय नहीं दिया है. उन्होंने वह किया है जो उनके अधिकार क्षेत्र में है. उन्होंने किसी भी मर्यादा का उल्लंघन नहीं किया है. हाँ, ये ज़रूर कहना होगा कि कोहली जो कर रहे हैं वो सबक है ऑस्ट्रेलिया के लिए औस्ट्रेलिया में! वरना कोहली को गुस्सा बेवजह नहीं आता..

(पारिजात त्रिपाठी)