शुभ दीपावली!! – चुनाव लड़ेंगे जोगी तो कांग्रेस को होगा नुकसान : रमन सिंह

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(सभी सम्मानित पाठकों को दीपमालिका पर्व पर न्यूज़ इंडिया ग्लोबल की हार्दिक शुभकामनायें !!)

तमाम अन्य दुर्गुणों के साथ प्रजातंत्र का एक दुर्गुण ये भी है कि करो कुछ और कहो कुछ. लेकिन दुःख होता है ये देख कर कि बड़े नेता भी ऐसा ही कर रहे हैं.

छत्तीसगढ़ में भी यही हुआ है. अजित जोगी बड़े नेता हैं प्रदेश के. यहां से राजनीति शुरू कर केंद्र तक पहुंचे और अब ढाक के तीन पात. जोगी वापस आ गए अपने देश. जिस पार्टी में थे उसे लगा कि जोगी इस प्रदेश में उनके बड़े क्षत्रप सिद्ध हो सकते हैं. किन्तु जोगी के मन में कोई और जोग चल रहा था. जोगी ने अपनी पार्टी बना ली.

फिर जोगी ने सोचा कि सीधे सीधे शतरंजी चाल समझदारी नहीं. उन्होंने कहो कुछ करो कुछ का पुराना नेतागिरी फार्मूला अपनाया. जोगी का बयान आया – मैं चुनाव नहीं लडूंगा! अत्यंत अप्रत्याशित था उनका यह निर्णय. रमन सिंह खेमे में तो दीवाली मन गई. अब मामला तिहरा नहीं, दुहरा भी नहीं सिर्फ इकहरा था प्रदेश चुनावों में.

लेकिन जोगी को वक्त का इंतज़ार था. दूसरों के पत्ते खुल जाने के बाद उन्होंने चला अपना ट्रम्प कार्ड. और फिर लोग हैरान हो गए जब सूना कि अजीत जोगी चुनाव लड़ रहे हैं. इसको कहते हैं समझदारी वाली राजनीति.

ज़ाहिर है मुख्यमंत्री रमन सिंह को कष्ट पहुंचा. उन्होंने भी झट कहा – चुनाव लड़ना अच्छी बात है, पर नुक्सान कांग्रेस को ही होगा! अर्थात अब कांग्रेस को चाहिए कि जोगी को मनाये, जोगी को बैठाये या जोगी को बुलाये. वना जो होगा देखा जाएगा, सोच कर किस्मत आजमाए.

यदि वास्तव में ऐसा होता है अर्थात जोगी मैदान में उतारते हैं तो समझ लीजिये चुनाव बहुत दिलचस्प होने वाला है छत्तीसगढ़ का. प्रदेश के मुख्यमंत्री के तौर पर अपनी चौथी पारी खेलने का अवसर बना रहे रमन सिंह के लिए यह त्रिकोणीय युद्ध आसान नहीं होगा.

इसमें कोई संदेह नहीं कि छत्तीसगढ़ को अजीत जोगी आज भी पूर्ववत मान्य हैं. मूल रूप से पिछड़े इस प्रदेश की भोली जनता बाकी लोगों को बाहरी और जोगी को अपना व्यक्ति मानती है. जोगी को इस सशक्त चुनावी तथ्य का भरपूर ज्ञान है. इसलिए उन्होंने सही समय पर ‘जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़’ (जेसीसी) बना डाली. अब वे दुहरी तलवार चलाएंगे. एक तरफ उनकी चुनौती भाजपा को होगी तो दूसरी तरफ अपने ही पुराने भाई लोगों याने कि कांग्रेसियों को होगी.

मगर रमन सिंह के बयान का अर्थ उनका विक्षोभ नहीं मानना चाहिए. इस बयान से उन्होंने अपना आत्मविश्वास दर्शाया है. रमन सिंह ने कहने का प्रयास किया है कि हम तो जीतेंगे ही, हम तो आगे हैं ही. जो भी संभावनाएं थीं कांग्रेस की – वो जोगी के आ जाने से बिगड़ जाएंगी!!

अर्थात वे ये भी कह रहे हैं कि जोगी भी कुछ ज्यादा कर नहीं पाएंगे सिवाए कांग्रेस के खेल बिगाड़ने के. लेकिन निस्संदेह अब छत्तीसगढ़ में भाजपा की चुनावी तैयारियां और गहन हो जाएंगी.

जब छत्तीसगढ़ अलग राज्य बना था तब तीन वर्षों तक अजीत जोगी का राज था यहां. 2000 से 2003 तक जोगी यहां मुख्यमंत्री थे. लेकिन जोगी आज भी नहीं भूले होंगे कि उनको ज़मीन्दोज़ करके किसने प्रदेश की हुकूमत सम्हाली थी और वह कौन था जो लगातार तीन बार छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर विराजमान है – ये वही डॉक्टर रमन सिंह हैं.

लेकिन यहां एक अहम् तथ्य और भी है जिस पर मीडिया बात ही नहीं कर रहा है. हाल ही में जोगी ने कहा था कि मैं मायावती को भारत के प्रधानमन्त्री के पद पर देखना चाहता हूँ. माया के लिए जोगी के प्रेम पूर्ण स्वर बता रहे हैं कि जोगी माया के साथ आ रहे हैं. यह जोगी-माया जोग खासा गुल खिला सकता है प्रदेश चुनाव में.

(पारिजात त्रिपाठी)

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