चुनाव से पहले कांग्रेस को मलाल – बीजेपी में शामिल हुए रामदयाल

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छत्तीसगढ़ विधानसभा की गहमागहमी अपने चरम पर है. कांग्रेस मध्यप्रदेश से टूट कर बने इस राज्य में अपनी जड़ें खोज रही है. एक समय के दो दिग्गज कांग्रेसी नेता अगर अभी होते तो शायद कांग्रेस की दृष्टि से छत्तीसगढ़ राज्य का राजनैतिक परिदृश्य कदाचित कुछ और ही होता. विद्या भैया और श्यामा भैया नाम से जाने वाले विद्याचरण शुक्ल और श्यामाचरण शुक्ल इस प्रांत के जन नेता हुआ करते थे.

छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माण की शुरुआत में शुक्ल बंधुओं की अनुपस्थिति में कांग्रेस के पास बड़े नाम के तौर पर अजित जोगी का ही एक विकल्प शेष था. पर फिर वह भी हाथ से निकल गया जब जोगी ने जनता छत्तीसगढ़ कांग्रेस बना ली. अब कांग्रेस के पास ऐसा कोई चेहरा नहीं है जिस पर इस राज्य में नैया पार लगाने की उम्मीद की जा सके. वैसे अप्रत्यक्ष तौर पर अजीत जोगी की वापसी को लेकर बहुत आस और कयास लगाये जा रहे थे किन्तु आज राजनीतिक मंच पर जोगी बन चुके अजीत अब या तो कुछ भी नहीं करना चाहते या कुछ खास ही करने वाले हैं आने वाले दिनों में.

खैर, कांग्रेस के लिये वैसे भी छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव की तैयारियां बहुत खास नजर नहीं आ रही हैं, ऊपर से उसकी शुरुआत ही थोड़ी अजब सी हो गई है. शुरू में ही राज्य ने एक अशुभ समाचार पार्टी के लिये पेश कर दिया है, वो ये कि प्रान्त में पार्टी के लिये खासी मुश्किलात पेश कर सकता है. रामदयाल उइके ने कांग्रेस का हाथ छोड़ कर भाजपा का साथ जोड़ लिया है.

छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव से पहले ही कांग्रेस को झटका देने वाले ये रामदयाल उइके न सिर्फ वर्तमान समय में पाली क्षेत्र से विधायक हैं बल्कि वे प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष भी थे. आज उइके का बाकायदा सम्मानपूर्ण ढंग से भाजपा में सम्मिलित किया गया और इस आयोजन में मुख्यमंत्री रमन सिंह सहित भाजपा अध्यक्ष अमित शाह स्वयं उपस्थित रहे. डॉक्टर रमण सिंह को धन्यवाद देते हुए भाजपा के अनुशासन के प्रति अपना समर्पण जताया है.

(पारिजात त्रिपाठी)

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