छोटे बड़े

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कविता और उसके पति तुषार में कईं दिनो से बहस चल रही थी। कविता गुस्से में तुषार से बोली,” तुम्हारे मां-बाप को यहां शहर में गांव से आकर रहने की क्या आफत लगी है?”

तुषार झुंझलाकर बोला ,”तुम्हें ही तो लगी थी गांव की जमीन जायदाद बेच दो।”

कविता लगभग चिल्लाती हुई बोली,” अरे तो मकान बेचने की क्या पड़ी थी ।”

तुषार भी उसके जितनी तेज आवाज में बोला,” बिना जमीन के उनके पास आमदनी का जरिया क्या रह जाता? इसलिए मकान भी बेचकर हमेशा के लिए यहीं आ रहे हैं।”

कविता तुषार से शिकायती लहजे में बोली,” तुम तो चाहते ही यही थी।”

तुषार राहत भरे स्वर में बोला,” हां, इस उम्र में उनके गांव में अकेले रहने से चिंता होती थी।”

कविता रूआंसी होकर बोली ,”हां सारे जहां की चिंता कर लो, मेरे बारे में सोचा है। नौकरी करूं और उनकी तीमारदारी भी करूं। हर महीने उनके खर्चे के लिए कुछ पैसे भिजवा देते गांव।”

तुषार का सब्र जवाब दे रहा था,” कविता वह दोनों सक्षम है, तुम्हारे भी दो काम करने वालों में से हैं। बेकार का झगड़ा मत करो।”

दोनों बच्चे रिया और सनी अपने कमरे में बैठे होमवर्क कर रहे थे। ऐसे झगड़े और वाद-विवाद उनके मां-बाप में अक्सर होते रहते थे। जिस दिन लगता था यह अभियान लंबा खिंचने वाला है, रिया ब्रेड पर बटर या जैम लगाकर स्वयं भी खा लेती और सनी को भी खिला देती। दोनों की बहस का स्वर ऊंचा हो गया तो रिया दरवाजे के निकट खड़े हो बातें सुनने लगी। सनी ने कहा,” दीदी, दादा जी ने कहा था बड़ों की बातें इस तरह सुनना गलत बात है।” उंगली रखकर सनी को खामोश रहने का इशारा किया फिर कुछ क्षण बाद कमरे में आकर उत्साहित स्वर में सनी से बोली,”दादा दादी दोनों हमेशा के लिए हमारे पास रहने आ रहे हैं।”

सनी खुशी से उछलता हुआ बोला,” वाह मजा आ जाएगा मैं दादाजी के साथ सांप सीढ़ी और लूडो खेलूंगा। और वे हार भी जाते हैं मुझसे।रोज पार्क भी जाऊंगा उनके साथ।”

रिया अपने ख्यालों में खोई हुई थी,” दादी से नए स्टाइल में बाल बनवाऊंगी, अपनी गुड़िया के लिए भी ड्रेस बनवाऊंगी।”

रिया का मुंह हाथों से अपनी तरफ करते हुए सनी बोला ,”मैं जब उनको भो कर के डरता हूं तो दादाजी डर जाते हैं और रात को मुझे डर के मारे नींद नहीं आती तो उठकर कहानी सुनाने लगते हैं।”

रिया के आंखों में चमक थी,” हां मेरी फ्रॉक के बटन और ज़िप ठीक कर देती है दादी। मैं किसी के जन्मदिन में जाने के लिए अगर चार ड्रेस ट्राई करके अलमारी फैला दूंगी तो डांटेगी नहीं, मम्मी के आने से पहले ठीक से जमा देंगी। कितना अच्छा लगेगा स्कूल से आएंगे और वे दोनों तैयार बैठे होंगे हमारी बातें सुनने के लिए।”

सनी चिंतित स्वर में बोला ,”अगर मम्मी पापा ने दादा दादी के सामने भी झगड़ा किया तो?”

रिया लापरवाही से बोली,”कोई फर्क नहीं पड़ेगा। दादी बोलती तो थी गांव में ।इन दोनों बच्चों को लड़ने दो ,हम चारों बड़े बैठकर टीवी देखते हैं।”

(सीमा जैन)

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