जागो, पानी गया !!!

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अगर एक सुबह आपको पता चले कि आज घर में पानी नहीं है. आज पानी आया नहीं और अब आएगा भी नहीं. आप हैरान हो जाएंगे और आप यकीन नहीं करेंगे जब लगे हाथ आपको ये भी बताया जायेगा कि अब पानी कभी नहीं आएगा क्योंकि पानी तो शहर में ही खत्म हो चुका है!!!

अब आपको बता दें कि ऐसा होने वाला है. हैरानी है कि हम कितने अंधे हैं कि एक कदम दूर खड़ी है विपदा और हम देख ही नहीं रहे हैं. सुन तो आप और हम सभी लोग कई दिनों से रहे हैं – पानी बचाओ जीवन बचाओ! पर हमारे कान में जूं कभी न रेंगी. फिर बाद में हमने ये सुनना भी शुरू कर दिया कि जल ही जीवन है..जल बचाओ जीवन बचाओ ! इसे भी हमने सिगरेट और तम्बाखू के विज्ञापन की तरह सिर्फ सुन लिया कि इससे कैंसर होता है. और काम हमने अपना चालू रखा. लेकिन एक दिन जब डॉक्टर के पास जाने की नौबत आई और सारे टेस्ट हुए और पता चला कि कैंसर हो चुका है तो उस दिन पैरों के नीचे ज़मीन खिसक गई !!

ये होने वाला है. ये वास्तव में होने वाला है. कैंसर पानी का याने कि जल बिन जीवन जो खात्मा करेगा जीवन का, कैंसर ही तो है. इसमें कोई कीमो असर नहीं करेगा, कोई दवाई आपको ज़िंदगी का उपहार वापस नहीं लौटाएगी. आप के प्राण जाएंगे वो भी इस पछतावे के साथ कि काश समय रहते हमने कोशिश कर ली होती ..अपने स्तर पर की गई हमारी कोशिश शायद आज हमारे प्राण बचा लेती ! लेकिन उस समय उस पछतावे का कोई अर्थ नहीं रह जाएगा.

ये सच है और ये सच मुझे पर और आप पर और हमारे आसपास सभी पर बराबरी से लागू होता है. जी हाँ, ये होने वाला है और बहुत जल्दी हम सबकी नंगी आखें फ़टी की फटी रह जाएंगी. शायद उस दिन हम इस सच पर यकीन नहीं करना चाहेंगे कि – पानी नहीं है..पानी नहीं आएगा..पानी ख़त्म हो गया है !!!

अब बता दें असल बात. ये बात मैने नहीं कही. इसकी घोषणा टीवी न्यूज़ चैनल्स बात जल मन्त्रालय ने स्वीकार की है. 2020 में पानी देश के छः महानगरों में समाप्त हो जायेगा. करोड़ों की जनसंख्या वाले ये महानगर पानी समाप्त होने के बाद कैसे जियेंगे, इस पर ज़रा सोचिये.

ज़रा ये भी सोचिये कि जब पेट्रोल पंप पर दो दिन पेट्रोल खत्म हो जाता है या आपका जेनेरेटर उड़ जाता है और दो दिन आपके घर बिजली नहीं होती तो क्या आलम होता है..कितनी हाय तौबा मच जाती है..अरे ये तो बड़ी बातें हैं छोटी बात कर लें एक दिन एक टाइम पानी न आये तो तकलीफ होती है लेकिन दूसरे टाइम भी पानी न आये तो परेशानी काफी होती है लेकिन अगर अगली सुबह भी पानी न आये तो भगवान नज़र आने लगते हैं और मान लो अगले दिन शाम को भी पानी न आये तो फिर तो कयामत ही आजाती है. आपको डराने की कोई मन्शा नहीं है मेरी. बस ज़रा सा आने वाले हालात से रूबरू कराने की कोशिश है मेरी..जो इस क्षण के बाद से आपकी भी होनी चाहिये..और फिर सबकी होनी चाहिये वरना जब हम रहेंगे ही नहीं तो फिर क्या डरना और क्या कोशिश करना

लेकिन मैं जैसा हमेशा कहता हूं, आप तो निकल लोगे, आपके बाद जो रह जायेंगे उनका क्या..याने आपके बच्चों का क्या होगा.. क्या वे देख पायेंगे वैसे पानीदार दिन जो आपने देखे हैं..जब घंटों पानी बहा कर कार धोई है..सड़क धोई है या फिर कई बार पानी का टैब खुला छोड़ दिया जान कर या अनजाने..पानी तो बहाया न..

पानी आपने बहाया या आपकी कामवाली ने..पानी आपके बोरवेल ने खींचा या आपके बगल की बिल्डिंग के स्वीमिंगपूल ने..पानी की बरबादी की सज़ा तो आपको मिलेगी ही. सच कहें तो सबको मिलेगी सज़ा आपके बच्चों को भी और उनके बच्चों को भी. कसूर सबका न होगा लेकिन सज़ा सबमें बंटेगी..

तब आप आंखे मूंदते हुए आखिरी सांस में सोचेंगे कि गलती कहां हुई आपसे..ये सोच कर किसी को खुश होने की जरूरत नहीं कि उन 6 महानगरों से लेना-देना नहीं है आपका..याद रखिये नंबर सबका आयेगा..क्योंकि सबका कसूर एक ही है – पानी की बरबादी ..तो भुगतना तो पड़ेगा ही..आज नहीं तो कल..आप नहीं तो आपके बच्चे..लेकिन सजा से बचेगा कोई नहीं !

ऐसा नहीं कि हम बच नहीं सकते हैं. बच सकते हैं हम और आप इस महा-विपदा से. लेकिन उसके लिये उस स्तर का बचाव भी करना होगा जिस स्तर की चुनौती है ये…. (क्रमशः)

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