जा सकता है सिद्धू का मंत्री पद

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सिद्धू का आज एक बयान आया जिसके अंत में अपने हमेशा वाले ख़ास अंदाज़ में सिद्धू ने शायरी पढ़ी कि अब तख़्त गिराए जाएंगे और ताज उछाले जाएंगे!

सिद्धू ने अनजाने में एक सच के दरवाज़े खोले हैं. होनी के इन दरवाज़ों से जो सच निकल कर बाहर आ सकता है उसके चेहरे पर सिद्धू के लिए अशुभ समाचार लिखा हो सकता है. सिद्धू ने जान कर ये मुसीबत मोल ली है या अनजाने में, ये तो पता नहीं लेकिन इतना तो पक्का है कि अब सिद्धू समझ गए हैं कि ओखली में सर दिया तो मूसल से क्या डरना!

अब बहुत जल्दी सिद्धू के हाँथ से हक और सर पर से ताज जा सकता है मंत्रिपद का. ये एक ऐसी चूहे बिल्ली की लड़ाई बन चुकी है जो शायद अब मुकम्मल हुए बिना नहीं रहेगी. हो सकता है, सिद्धू को किसी ने बताया नहीं हो कि ऐसी सियासी जंगों में वजीर जाने जाते हैं और सिपाही जान से जाते हैं. कैप्टन और सुपर-कैप्टन के बीच सिद्धू ज़ाहिर है, वजीर तो नहीं ही हैं!

जब घर से किसी को निकाला जाता है तो उसे ये तो पता होता है कि अभी भी दुनिया उसके लिए बची हुई है पर उसे ये नहीं पता होता कि कौन सा घर अब उसे शरण देगा. कैप्टन अमरिंदर सिंह अगर सिद्धू को लाइन हाज़िर करते हैं तो सिद्धू कांग्रेस के खुले आसमान के नीचे तो रहेंगे पर राहुल उनको अपने किसी घर में जगह देंगे या नहीं, ये अभी खुद सिद्धू को भी पता नहीं!

सिद्धू को शहीद करा के राहुल का कोई नुक्सान नहीं होने वाला. राहुल के लिए एक तरफ एक बड़बोला छोटा नेता और दूसरी तरफ एक खामोश वजनदार बड़ा नेता है. यहाँ ज़ाहिर है कि राहुल अपने बड़े वज़नदार नेता का विकल्प ही चुनेंगे. कांग्रेस का पंजाब कैप्टन से है, सिद्धू से नहीं – ये पता है राहुल को. और वैसे भी आज की तारीख में पंजाब में मंत्री पद कैप्टन का ही विशेषाधिकार है, राहुल का नहीं – ये सिद्धू को पता नहीं.

आज विशेष मीटिंग है कैप्टन अमरिंदर की अपने विशेष सिपहसालारों के साथ. अमृतसर में हुए रेल-हादसे से वैसे भी जनता सिद्धू और उनकी नेता पत्नी से प्रसन्न नहीं है. ऊपर से सिद्धू बार-बार पाकिस्तान जा कर अपनी छवि पर कालिख पोतने में लगे हैं और अब तो हद हो गई जब वे अमरिंदर सिंह के स्तर पर अपने को खड़ा करने की महत्वाकांक्षा पालने लगे हैं, जो कि कैप्टन साहेब को किसी भी सूरत में खुश करने वाली खबर नहीं हो सकती.

सिद्धू का ताज उछाल कर पंजाब के मुख्यमंत्री एक साथ तीन सन्देश दे सकते हैं.  उम्मीद ये भी है कि उन्हें राहुल से इसकी अनुमति मिल भी चुकी होगी.  सिद्धू को नाप कर एक तरफ तो मुख्यमन्त्री पंजाब की जनता को संतुष्ट कर देंगे, दूसरी तरफ देश की जनता को भी राहत दे देंगे जो सिद्धू के पाकिस्तान भ्रमण से कुपित है.  ऐसा करके अमरिंदर सिंह अपने मंत्रियों को भी खुश कर देंगे और राहुल को भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष सन्देश दे देंगे कि पंजाब सिद्धू का नहीं कैप्टन का ही विशेषाधिकार है और हमेशा रहेगा. वहीं राहुल को भी सुन्दर अवसर प्राप्त हो रहा है पाकिस्तान को लेकर कांग्रेस पर होने वाले हमले की धार को कुन्द करने का.

सिद्धू के लिए मोर्चा खोलने वाले अठारह लोग जनता से नहीं हैं, विधायक भी नहीं हैं – पंजाब सरकार के मंत्री हैं. इतना आसान नहीं होगा अब सिद्धू के लिए यू-टर्न लेना. इन मंत्रियों के लिए सिद्धू के निष्कासन का लक्ष्य उनका मुख्यमंत्री के प्रति अपनी वफादारी को भी सुनिश्चित और पुष्ट करेगा. इस हालत में सिर्फ माफ़ी मंगवा कर सिद्धू को माफ़ करवाना उन्हें रास नहीं आने वाला. अमरिंदर सिंह की खामोशी भी सिद्धू के प्रति उनकी प्रसन्नता का संकेत नहीं है.

(पारिजात त्रिपाठी)

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