जिन्हें नाज है हिन्द पर वो कहाँ हैं?

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घटना कल करीब डेढ़ से दो बजे के बीच की है सुल्तानपुर शहर से कुछ दूरी पर ग्रामीण इलाके में कुछ लड़के दो जोडों को (तथाकथित प्रेमी प्रेमिका) को घेर कर अपनी पौरुष का अद्म्य प्रदर्शन कर रहे थे.

ये घटना मुझे मेरे पति ने बतायी ,वो कल सुल्तानपुर से लौट रहे थे तो उस एकांत में भीड़ देखकर रुके ,जाकर देखते हैं तो उन महानुभावों ने लड़कियों के कपड़े अपने कब्जे में कर लिया था जैसे पाकिस्तान का टैंक अपने कब्जे में कर लिए हों उस साहसिक भाव के साथ गालियां दे रहे थे उन लड़कियों को, लड़कियां रोती हुई गिड़गिड़ा रही थीं , पर वो महान दिग्गज अपने मुखकमल से अपने जन्म लेने की वजह गिना रहे थे , शायद अपनी माँ के पेट से सीख कर आये हों.

खैर, इन्हें अच्छी तरह आता है ऐसे लोगों को हैंडल करना , और पँहुचते ही इन्होंने पहले लड़कियों के कपड़े दिलाये उन महान क्रांतिकारियों से , और समझ गये कि यहाँ जरा भी नम पड़ना कि ये उन्मादी लोग और शेर होगें ,इसलिए गाड़ी की चाभी लेकर उन लड़कों देते हुए धीरे से कहा जितनी जल्दी हो सके यहाँ भागो लड़कियों को लेकर , लड़के इनसे उलझे रहे और ये उन्हें बहकाते रहे ,इस तरह वो दो जोड़े किसी तरह अपने अय्याशी के गंदे महासमर से निकले।

खैर बात क्या थी ये बताने की तो जरूरत नहीं ,सभी समझ गये होंगे क्योंकि आजकल ग्रामीण इलाकों में ऐसी घटनाएं आये दिन होती रहती हैं ,वो तो कल टीवी पर फ़िल्म आ रही थी – ओके जानू. तो वही देखकर उन्होंने मुझसे इस बात की चर्चा की , कि यही सब देखकर अपरिपक्व लड़के लड़कियों को लगता है कि यही जीवन है ,उन्हें ये भरम होता है कि आखिर हीरो हीरोइन ,ये सब कर रहे हैं तो गलत नहीं हो सकता ,जाने कब समझेंगें कि फिल्मों की तरह जीवन कभी नहीं होता ,

खैर, मैं लड़कों को कुछ नहीं कहूँगी ,क्योंकि कुछ लोग स्वयं पर ले लेते हैं , पर लड़कियों को जरूर कहूँगी कि वो दिन अभी बहुत दिन नहीं बीता जब लड़कियों के जन्म पर मातम मनाया जाता था , कुछ घरों में पैदा होते मार दिया जाता था सब अमानुषिक था ,पर वही मां बाप जब तुम्हें इस अवस्था में देख लेते तो तुम्हारे पैदा होने पर अफ़सोस तो जरूर करते ,बाक़ी और क्या करते वो तुम लोग अच्छी तरह जानती हो, कितनी शर्म की बात है बेहद सामान्य घर की बच्चियां थीं वो हो सकता है कि मां बाप ने पेट काट कर पढ़ने के लिए भेजा हो , अब पढ़ने की बात इसलिए कर रही हूँ कि दोनों देवियों के पास स्कूल का बैग था जिसे लेकर वो यहाँ लड़कों के साथ खेत में पढ़ने आयी थी जहाँ पर , उनको इतना बड़ा इनाम मिला ।

रोज ऐसी घटनाएं हो रही हैं पर हाय रे इस देश का दुर्भाग्य जैसे जहालियत यहाँ से कभी जाएगी ही नहीं , मैं कहती हूँ जब एक मजदूरी करने वाले बाप की बेटी के पास 22 हजार का फोन होता है तो क्यों नहीं पूछता कि ये कहाँ से मिला , इतना महंगा फोन सहेली और दूर के रिश्तेदार भला काहें देने लगे , एक बार इस जाल में फंसकर जीवन भर इसी गन्दगी में फंसी रह जाती हैं ,और आगे चलकर दूसरी पीढ़ी को भी नाश करती हैं क्योंकि बच्चे देखते हैं कि जब हमारे मां बाप यही कर रहे हैं तो ये सही ही होगा , और फिल्में और इंटरनेट तो है ही गुरु और हाँ उस फोन पर साहित्य या विज्ञान कला नही पढ़ा जा रहा है , भोजपुरी फिल्मों के अश्लील गानों और यूटयूब के गंदे वीडियो से भरे रहते हैं , ।

इस बात में ये बात सबसे दुर्भाग्यपूर्ण है कि ऐसी ही लड़कियों के कारण वो बेचारी लड़कियां जो जीवन में कुछ करना चाहती हैं पढ़ लिख ,उनपर भी ग्रहण लग जाता है ,अजीबोगरीब हालत हैं एक ओर वो लड़कियां हैं जो शराब सिगरेट और नग्नता को बढ़ावा दे रही हैं ,एक ओर ये लड़कियां उनकी नकल करके सत्यनाश हो रही हैं बीच में पिस रही हैं वो लड़कियां जो संघर्ष करके पढ़ना चाहती हैं जो 10 कोष रोज साइकिल चलाकर स्कूल और कोचिंग जा रही हैं , और घर में भी काम कर रही हैं जिसे साइंस, मैथ के सवालों को हल करते हुए सहित्य से पढ़ रहे भाई के पास होने की चिंता भी रहती है जिसे बारिश होने पर मौसम रोमांटिक नहीं लगता उदास हो जाती हैं कि कहीं घर की छत न टपकने लगे असली महिला सशक्तिकरण का पर्याय हैं ये लड़कियां , तुम जैसे लतखोर डेटिंग करने वाले लड़के लड़कियां इन लड़कियों का भी भविष्य नाश कर देती हो जो इस देश और और सार्थक समाज का जीवनधन हैं ।

यहाँ मैं उन समाज के ठेकेदार बने लड़को से जरूर कहूँगी जब दुर्योधन दुःशासन पांचाली को निर्वस्त्र कर रहे थे तो उनकी दृष्टि में वो कोई पाप नहीं था क्यों कि पांचाली के पाँच पति थे उन्होंने अग्नि से उत्पन्न हुई पांचाली को वेश्या कहा, ठीक यही भाव होते हैं ऐसे लड़को के कि ऐसी लड़कियों के साथ जबरदस्ती करना कोई गलत काम नहीं है, और पशुता करते हुए ये भी भूल जाते हैं कि वो भी तुम्हारे ही जिसे किसी परिवार की हैं , उनके भी घरवाले नहीं जानते कि वो क्या कर रही हैं और वो भी हो सकता है कि कहीं तुम्हारी तरह समाज के ठेकेदार बने हों.

 मैंने देखा है ऐसी घटनाओं को पहले लड़के इस प्रकार के फ़र्जी काम करते हैं , फिर किसी फ्राड में फंसते हैं तो बेचारे घरवालों को जो दिक्कत होती है कि बेचारी मां के गहने तक बिक जाते हैं तब कहीं छूटकर आते हैं, इसलिए खुद भगवान न बनो इतने जिम्मेदार हो तो पुलिस को फोन करो ।

(रुपम मिश्रा)

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