दिव्य कुम्भ में ‘समुद्र मन्थन’

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आइये आप भी और साक्षी बनिये इस जीवन्त झाँकी की दिव्य कुम्भ में..

उत्तर प्रदेश सरकार की कुंभ के आयोजन हेतु “दिव्य कुंभ भव्य कुंभ” की परिकल्पना को साकार रूप देने के लिए तथा विश्व प्रसिद्ध कुम्भ को खास बनाने और देश विदेश से यहां आने वाले श्रद्धालुओं को आकर्षित करने के लिए संस्कृति विभाग जहां अलग अलग सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन कर रही है।

वहीं दूसरी तरफ कला कुम्भ में उत्तर प्रदेश संग्रहालय निदेशालय ( संस्कृति विभाग,उत्तर प्रदेश) के तत्वाधान में राज्य संग्रहालय, लखनऊ द्वारा कुंभ एवं कुंभ के पौराणिक आख्यानों पर आधारित “कुंभ की कहानी, कलाकृतियों की जुबानी”विषयक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया है जिसके अंतर्गत भगवान विष्णु के विविध अवतारों, समुद्र मंथन, गंगावतरण ,ब्रह्मा, विष्णु और शिव सहित अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाओं तथा विविध पौराणिक कथानको से जुड़ी अनुकृतियां प्रमुख रूप से प्रदर्शित की गई हैं. साथ ही साथ विविध चित्रकला शैलियों में निर्मित समुद्र मंथन तथा अन्य धार्मिक आख्यानों के छायाचित्रों को भी जनसामान्य के अवलोकनार्थ प्रदर्शित किया गया है।

प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य प्रयागराज कुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं को समुद्र मंथन ,देवासुर संग्राम, कुंभ तथा उत्तर प्रदेश की कला व संस्कृति से जुड़ी जानकारी से परिचित कराना है। उत्तरप्रदेश संस्कृति विभाग द्वारा प्रस्तुत प्रदर्शनी समुद्र मंथन का दृश्य सजीव करती है. चेहरों पर उत्सुकता और सराहना लिए दर्शक समुद्र मंथन की इस प्रदर्शनी में देवताओं तथा दानवों के द्वारा मंदराचल पर्वत के माध्यम से किये गए समुद्र के मंथन का दृश्य प्रदर्शित करते हैं.

वासुकी नाग, जिन्होंने समुद्र मंथन में रस्सी की भूमिका का निर्वहन किया था, के दोनों छोर दोनों ओर पकडे हुए देवता व दानव जब मंथन हेतु अपनी अपनी तरफ खींचते हैं तो एक सुन्दर दृश्य की सजीवता दर्शिनीय होती है.

ज्ञातव्य है कि भीटा प्रयागराज से प्राप्त सबसे प्राचीन पंचमुखी शिवलिंग के अतिरिक्त अन्य देवी देवताओं की फाइबर एवं प्लास्टर कास्ट में सजीवता के साथ निर्मित अनुकृतियां यहां आने वाले दर्शकों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र है। समुद्र मंथन के ऐतिहासिक विषय का जीवंत रूप देने की चुनौती का सफलता का रूप देती यह प्रदर्शनी कुम्भ में आये दर्शकों की भरपूर प्रशंसा प्राप्त कर रही है.