नई नौटंकी सिद्धू की

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सिधू की नौटंकी कमाल है – जो असली कैप्टेन है, उसे इस्तीफा नहीं दिया -और जो पार्टी का कैप्टेन नहीं रहा –उसे इस्तीफा भेज रहे हैं..

सिधू के कर्म इतनी जल्दी सामने आ जायेंगे, उन्होंने कभी सोचा भी नहीं होगा –राजनीतिक मतभेद एक तरफ करके सिद्धू ने उन मोदी को जलील किया जिनके कभी वो खुद मुरीद थे और और जिन मोदी की पार्टी में उनको भरपूर सम्मान मिला –सिद्धू ने मोदी को जलील भी ऐसे किया जैसे वो उनके निजी दुश्मन हों -इस दुश्मनी के चलते सिदूधू पुलवामा को ले कर पाकिस्तान के साथ खड़े हो गये और बालाकोट के सबूत मांगने लगे.

और सिद्धू को उनके कर्मों का फल मिल ही गया –पार्टी में ऐसे दुत्कारा जायेगा उन्होंने सोचा भी नहीं होगा –वे उस मुगलिया कौम की गुलामी करते रहे जिससे लड़ते लड़ते सिख गुरुओं ने अपने जीवन बलिदान दे दिए – और वो खुद मोदी को गाली देते रहे –मुगलिया लोगों को मोदी को “सुलटाने” के लिए भी कह दिया –इमरान खान और जनरल बाजवा के गले लग कर पाकिस्तान की जी हुजूरी करने लगे –लेकिन मन्नत मांगने चिश्ती की दरगाह पर ना जा कर पिछले हफ्ते माँ वैष्णो देवी के दर पर माथा टेकने जा पहुंचे.

राहुल गाँधी ने 24 मई को ही कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था और कांग्रेस बिना कैप्टेन का जहाज बन कर रह गई –मगर लगता है सिद्धू और अमरिंदर सिंह दोनों के लिए राहुल गाँधी अभी भी कांग्रेस के अध्यक्ष हैं.

अमरिंदर सिंह ने राहुल की वजह से सिद्धू को कैबिनेट से नहीं निकाला, राहुल के इस्तीफा देने के बाद भी –पिछले हफ्ते अमरिंदर ने सिद्धू के विभाग की मीटिंग भी कर ली लेकिन सिद्धू को बर्खास्त नहीं किया -क्यों? क्यूंकि अमरिंदर के लिए राहुल अभी भी अध्यक्ष हैं.

उधर सिद्धू ने 10 जून को राहुल को इस्तीफा भेज दिया जो वो आज बता रहे हैं ट्वीट करके –क्या नौटंकी है भाई –आपके कैप्टेन तो अमरिंदर सिंह हैं, उनको इस्तीफा देते या राज्यपाल को देते अगर देना ही चाहते थे लेकिन दिया किसे –राहुल गाँधी को, जो अब पार्टी का कैप्टेन ही नहीं रहे – वैसे भी एक महीने बाद इस्तीफा देने की बात ट्वीट करके बताने का क्या औचित्य है –उसी दिन क्यों नहीं बताया –क्या अमरिंदर से सौदेबाज़ी चल रही थी?

इसका मतलब ये निकलता है कि सिद्धू अभी भी उम्मीद लगाये बैठा है कि उनकी मंत्री की कुर्सी बची रहेगी –माता वैष्णो देवी से अरदास जो करके आये हैं –सिद्धू जैसे भाजपा से भागे हुए और भी हैं जो कल तक अपने कप्तान नरेंद्र मोदी को गाली देते थे –लेकिन चुनाव में हार गए और अब बिना कप्तान के जहाज “कांग्रेस” की सवारी कर रहे हैं –शत्रुघ्न सिन्हा का नाम तो सुना ही होगा आपने –

अब सिद्धू की कहानी की इति होने को है और उसके लिए उसकी नई पार्टी “आप” इंतज़ार कर रही है –लेकिन सिद्धू को याद रखना होगा कि “आप” में भी केजरीवाल को गाली बकने की इज़ाज़त नहीं होगी .

ये भी देखना होगा कि अब करतार साहब के उद्घाटन में उनके प्रिय मित्र इमरान खान बुलाते हैं कि नहीं..

(सुभाष चन्द्र)

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