नवरात्रि का नवां दिन: मां सिद्धिदात्री की उपासना

Share on facebook
Share on twitter
Share on google
Share on pinterest
Share on telegram
Share on whatsapp
Share on email

मां के सिद्धिदात्री स्वरूप का महत्व


Curtsy: Google

नवरात्रि के नौ दिनों आदिशक्ति के हर रूप की अलग-अलग पूजा की जाती है। माँ दुर्गा की नौवीं शक्ति का नाम सिद्धिदात्री है। नवरात्रि का नवां दिन मां सिद्धिदात्री को समर्पित है। इस पावन दिन मां कि सिद्धिदात्री स्वरूप की उपासना की जाती है। सिद्धिदात्री का आशय है सर्व सिद्धि देने वाली। मां का ये स्वरूप भक्त को सिद्धियां देने वाला है।

इस दिन शास्त्रीय विधि-विधान और पूर्ण निष्ठा भक्ति के साथ मां की उपासना करने से साधक को सभी सिद्धियों की प्राप्ति होती है। सृष्टि में कुछ भी पाना भक्त के लिए मुश्किल नहीं होता। यहां तक कि ब्रह्मांड पर भी साधक विजय प्राप्त कर सकता है।

देवीपुराण के अनुसार भगवान शिव ने इनकी कृपा से ही इन सिद्धियों को प्राप्त किया था। इनकी अनुकम्पा से ही भगवान शिव का आधा शरीर देवी का हुआ था। इसी कारण वे लोक में ‘अर्द्धनारीश्वर’ नाम से प्रसिद्ध हुए।

माँ सिद्धिदात्री का रूप अत्यंत मनमोहक है। ये चार भुजाओं वाली हैं। इनका वाहन सिंह है मां सिद्धिदात्री   ये कमल पुष्प पर भी आसीन होती हैं। इनकी चार भुजाएं है जिनमे बायीं ओर की एक भुजा में कमल का पुष्प है तथा दूसरी भुजा में शंख है| वहीँ दाहिनी ओर की एक भुजा में गदा एवं दूसरी भुजा में चक्र विराजमान है|

सिंह पर सवार मां सिद्धिधात्री की कृपा से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। मां सिद्धिदात्री अपने भक्तों के लिए बहुत ही दयालु हैं। कहते हैं कि आज के दिन मां को कमल का पुष्प अर्पित करना चाहिए।

विधि विधान से आराधना करने के बाद छोटी छोटी कन्याओं को घर बुला कर भोजन कराना चाहिए। नवरात्र के नौवें दिन नौ कन्याओं और एक बालक को  प्रसाद खिलाकर उपवास खोलना चाहिए क्यों कि छोटी छोटी कन्याओं के रूप में ही मां घर आती है और अपने भक्तों को आशीर्वाद देकर जाती हैं

माना जाता है कि नवरात्र के नौ दिनों में मां सिद्धिदात्री की पूजा से भक्तों को सभी सिद्धियाँ मिल जाती है। अत: प्रत्येक मनुष्य को माँ सिद्धिदात्री की उपासना करके मां सिद्धिदात्री की कृपा प्राप्त करने का प्रयत्न करना चाहिए। मां की कृपा से  मनुष्य सांसारिक जीवन व्यतीत करते हुए मोक्ष की प्राप्त कर सकता है।

कैसे करें मां सिद्धिदात्री की पूजा

मां की पूजा करते समय इन बातों का विशेष ध्यन रखना चाहिए. सर्वप्रथम मां के लिए चौकी पर एक विशेष आसन तैयार करें उसमें मां का चित्र या प्रतिमा की स्थापना करें। पूजा का आरंभ मां की प्रतिमा या चित्र को गंगाजल से स्नान कराएं। चौकी पर चांदी, तांबे या मिट्टी के घड़े में जल भरकर उस पर नारियल रखकर कलश की स्थापना भी करें। मां के समक्ष घृत दीप जलाना और साथ ही कमल के पुष्प चढ़ाना बहुद शुभ माना जाता है। इसके प्रसाद स्वरूप में फल या मिष्ठान को लाल कपड़े में लपेट कर मां को अर्पित करें।  तत्पश्चात व्रत, पूजन का संकल्प लें और वैदिक एवं सप्तशती मंत्रों द्वारा माता सिद्धिदात्री की षोडशोपचार पूजा करें।

मां सिद्धिदात्री की विशेष कृपा पाने के लिए नवरात्रि के नवें दिन भक्तों को दुर्गा सप्तशती का पाठ करना औऱ हवन करना फलादायी होता है। दुर्गा पूजा में इस तिथि को विशेष हवन किया जाता है। यह नौ दुर्गा का आखरी दिन भी होता है तो इस दिन माता सिद्धिदात्री के बाद अन्य देवताओं की भी पूजा की जाती है।

मां को प्रसन्न करने के लिए इस मंत्र का जप करें। इस मां सिद्धिदात्री प्रसन्न होती हैं और भक्त मां की कृपा का पात्र बन जाता है।

या देवी सर्वभूतेषु मां सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तयै नमो नम:

 

 

ट्रेंडिंग

काम की खबरें

देश

विदेश

मनोरंजन

राजनीति