नवरात्रि का छठा दिन: देवी मां के कात्यायनी स्वरूप की उपासना

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मां दुर्गा के कात्यायनी स्वरूप का महत्व

(इंद्रनील त्रिपाठी)

पावन नवरात्र के छठे दिन देवी मां के कत्यायनी स्वरूप की उपासना आराधना की जाती है। छठवां दिन मां कात्यायनी को समर्पित होता है। पुराणों के अनुसार महर्षि कात्यायन को संतान के रूप में पुत्री की बहुत कामना थी, अपनी इसी इच्छा को पूर्ण करने के लिए उन्होंने पुत्री प्राप्ति के लिए कड़ी तपस्या की।  ये उस समय का वृतांत है जब तीनों लोकों में महिषासुर नाम के असुर का प्रकोप था। तीनों लोक उसके अत्याचारों से त्राहि त्राहि कर रहे थे। ऐसी परिस्थिति और महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान ब्रह्मा विष्णु, महेश ने अपने अपने तेज का अंश प्रदान कर मां दुर्गा को देवी कात्यायनी के स्वरूप में ऋषि कात्यान की पुत्री के रूप में धरती पर भेजा। मां कात्ययनी को मां दुर्गा का छठवां स्वरूप माना जाता है।

माँ कात्यायनी का स्वरूप अत्यंत चमकीला और सोने धातु के समान है। इनकी चार भुजाएं हैं। मां का दाहिनी तरफ का ऊपरवाला हाथ अभयमुद्रा में तथा नीचे वाला वरमुद्रा में। बाईं तरफ के ऊपरवाले हाथ में तलवार और नीचे वाले हाथ में कमल-पुष्प सुशोभित है। इनका वाहन सिंह है।

मान्यता है कि आश्विन कृष्ण चतुर्दशी को जन्म लेकर शुक्ल सप्तमी, अष्टमी और नवमी तक तीन दिन उन्होंने कात्यायन ऋषि की पूजा ग्रहण कर दशमी को महिषासुर का वध किया था। इसी उपलक्ष्य में हिंदू भक्तगण नौ दिनों का त्यौहार दुर्गा पूजा मनाते हैं और दसवें दिन को विजयादशमी के नाम से जाना जाता है। जो बुराई पर अच्छाई का प्रतीक है। नवरात्रि के छठे दिन मां दुर्गा के कात्यायनी स्वरूप की पूजा उपासना से  मनुष्यों को बड़ी अर्थ, धर्म, काम, मोक्ष चारों फलों की प्राप्ति होती है।

 कैसे करें कात्यायनी माता की पूजा?

नवरात्रि का छठे दिन माँ कात्यायनी की उपासना साधना की जाती है। मां कात्यायनी को लाल रंग अत्यंत प्रिय है इसीलिये पूजा के समय लाल रंग के वस्त्र धारण करना औऱ मां के ऊपर लाल औऱ सुगंधित फूल चढ़ाना करना शुभ माना जाता है। इसके अतिरिक्त पूजा के पर्यन्त मां को हल्दी और शहद भी चढ़ाना फलदायी माना जाता है। मां दुर्गा के कात्यायनी स्वरूप की पूजा उपासना से भक्तों को भीतर अद्भुत शक्ति का संचार होता है और दुश्मनों का नाश करने करने की शक्ति प्राप्त होती है  ध्यान रखने की बात ये है कि मां कात्यायनी का ध्यान गोधुली बेला में करना होता है। मां कात्यायनी को प्रसन्न करने के लिए इस मंत्र का जप करना लाभप्रद होता है।

या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥

मां कात्यायनी की भक्ति और उपासना द्वारा मनुष्य को बड़ी सरलता से अर्थ, धर्म, काम, मोक्ष चारों फलों की प्राप्ति हो जाती है। वह इस लोक में स्थित रहकर भी अलौकिक तेज और प्रभाव से युक्त हो जाता है। मां के इस स्वरूप की साधना उपासना से रोग, शोक, संताप, भय आदि सर्वथा के लिए नष्ट हो जाते हैं। जन्म-जन्मांतर के पापों को नाश हो जाता है। मां कात्यायनी की उपासना करने से भक्तों को जहां विपत्तियों से मुक्ति मिलती है वहीं आसानी से मोक्ष की प्राप्ति भी होती है। इसके अतिरिक्त जिन कन्याओ के विवाह मे विलम्ब हो रहा हो, माँ कात्यायनी की उपासना से उनका विवाह शीघ्र होता है साथ ही उन्हें मनोवांछित वर की भी प्राप्ति होती है।

विवाह के लिये कात्यायनी मन्त्र–

ॐ कात्यायनी महामाये महायोगिन्यधीश्वरि। नंदगोपसुतम् देवि पतिम् मे कुरुते नम:॥

 

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