नाज़नीन अन्सारी हैं श्री राम-भक्त

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नफरतों की दीवार गिराने के लिए ऊपर वाले ने कुछ ख़ास लोगों को दुनिया में भेजा है. ऐसे लोग आपको हर मजहब में मिल जाएंगे और दुनिया के हर कोने में मिल जाएंगे. लेकिन बहुत ही कम संख्या है इन लोगों की.  ये लोग जहां भी हों जिस भी समाज में हों इनका अभिनंदन अवश्य किया जाना चाहिए.

हिन्दुस्तान में दुनिया के सबसे अधिक मुसलमान रहते हैं. लेकिन यहां दूरियां बढ़ाने की कोशिश अधिक होती है करीब आने की बहुत कम. भारत में हिन्दू बहुत सहनशील हैं और सर्वधर्मसम भाव की भावना उनके धर्म और कर्म दोनों में देखने में आती है. लेकिन फिर भी प्रायः अल्पसंख्यकों को उनसे शिकायत हो जाती है और अल्पसंख्यंकों, विशेष कर मुसलमानो के द्वारा हिन्दुओं का विरोध या उनसे नाराज़गी देखने में आती है.

दुनिया के लगभग हर देश में हिन्दू रहते हैं और प्रत्येक देश में हिन्दुओं की शान्तिप्रियता की प्रशंसा होती है. हिन्दू न केवल भाईचारे के साथ रहना पसंद करते हैं बल्कि एक कदम आगे बढ़ कर मुस्लिम्स या अन्य अल्पसंख्यकों से साामजिक व धार्मिक स्तर पर भी जुड़ते हैं.

हिन्दू तो चाँद मियाँ नाम एक सिद्ध मुस्लिम सन्त को शिरड़ी साईं बाबा के नाम से पूजते भी हैं जो कि उनके गैरसाम्प्रदायिक चरित्र को दर्शाता है. मुस्लिम लोग आपको हिन्दू तीर्थस्थलों या मंदिरों में दर्शन के लिए आते देखने को नहीं मिलेंगे लेकिन हिन्दुओं को आप हमेशा ही दरगाहों पर सर झुकाते चादर चढ़ाते देख सकते हैं चाहे वो दरगाह अजमेर के ख्वाजा साहेब की हो या दिल्ली की निजामुद्दीन औलिया की. और यह प्रारम्भ से ही हिन्दुओं की जीवन शैली रही है. उन्होंने हर अतिथि का स्वागत किया है और उसे जगह दी है. इसी कारण भारत में मुस्लिम्स को जगह मिली और आज सबसे अधिक मुस्लिम भारत में ही हैं.

धार्मिक कट्टरता ही एक ऐसी विवशता है जिसकी वजह से मुस्लिम्स धार्मिक स्तर पर हिन्दुओं के साथ नहीं आते, उनसे नहीं जुड़ते. और जुड़ते भी हैं तो यदा-कदा ही, अत्यंत नगण्य संख्या में ऐसे उदाहरण देखने को मिलते हैं. पर प्रशंसनीय है यह महिला जिसका नाम है नाज़नीन अंसारी जो कि मुसलामानों की तरफ से सर्वधर्म समभाव की एक मिसाल है.

तीस साल की नाज़नीन अंसारी बनारस के एक निर्धन परिवार से सम्बन्ध रखती हैं . मूल व्यवसाय के नज़रिये से इनका परिवार बुनकर है. तमाम परेशानियों के बीच नाज़नीन ने अपनी पढ़ाई जारी रखी और आज वे एक सम्मानपूर्ण जीवन व्यतीत कर रही हैं.

वे मुस्लिम महिला फाउंडेशन की सदर की भूमिका का निर्वाह कर रही हैं. नाज़नीन के विचार और व्यक्तित्व में पूर्ण साम्य सराहनीय है. उनका मानना है कि सभी धर्म एक समान हैं और प्रत्येक व्यक्ति को सभी धर्मों को आदर देना चाहिए. अयोध्या में राममंदिर के विषय में उनके विचार अत्यंत प्रखर हैं.

नाजनीन कहती हैं कि अयोध्या रामचंद्र जी की जन्मभूमि है तो वहां राम मंदिर का निर्माण होना चाहिए. उन्होंने बताया कि जब वे अयोध्या गईं थीं तो वहां राम लला को टेंट में देखकर उनको बहुत कष्ट हुआ. उन्होंने उसके बाद वहाँ राम मंदिर निर्माण के लिए चन्दा भी दिया.

वे बड़ी साफगोई के साथ कहती हैं कि अगर मुसलमान चाहते तो वहां अब तक राम मंदिर बन चुका होता. वे स्वयं भी राममंदिर के निर्माण की दिशा में व्यक्तिगत प्रयास कर चुकी हैं. नाज़नीन ने अपनी योग्यता तथा शिक्षा का सुन्दर उपयोग किया और हिन्दू धार्मिक ग्रंथों का उर्दू भावानुवाद किया जो कि एक ऐतिहासिक साहित्यिक योगदान माना जायेगा. 

नाज़नीन के अनुसार वर्ष 2006 में बनारस के संकट मोचन में बम ब्लास्ट हुआ तो उस समय मुसलमानों के प्रति हिन्दुओं का दृष्टिकोण बदल गया जिसके बाद उनके साथ कई मुस्लिम महिलाओं ने संकट मोचन मंदिर में जाकर पूजा-अर्चना की.  यहीं से नाज़नीन के भीतर सर्वधर्म-सम-भाव का विचार पुष्पित व पल्लवित हुआ और उसका अनुकरणीय व्यवहारिक रूप सभी ने देखा.

नाज़नीन ने न केवल मुस्लिम्स को हिन्दू धर्म के प्रति जागरूक किया बल्कि स्वयं भी पहल करते हुए श्री राम जी की आरती को उर्दू में लिखा. उन्होंने हनुमान चालीस समेत दुर्गा चालीसा और अन्य हिन्दू धार्मिक पुस्तकों का उर्दू में अनुवाद किया. किन्तु सबसे विशेष बात ये रही, जिससे भगवान् श्री राम के प्रति उनके मन में जागी भक्ति के दर्शन सबको हुए, उन्होंने स्वयं भगवान राम की आरती लिखी और अब वे प्रतिवर्ष राम नवमी के दिन श्री राम जी की आरती करती हैं और इस दौरान अपनी बनाई हुई आरती गाती भी हैं.

नाज़नीन ने स्पष्ट किया  कि बाबर मुस्लिम नहीं मंगोल था. उसको अपना पूर्वज मानने की भूल मुसलामानों से हो रही है. उनके अनुसार ये तो इतिहास भी मानता है कि अयोध्या में पहले मंदिर था जिसे बाबर ने गिरवा दिया था. इसलिए अब जब हिन्दू-मुस्लिम एकता के लिए सुप्रीम कोर्ट चाहता है कि दोनों सम्प्रदाय बैठ कर बात करें तो इस पर बात अवश्य होने चाहिए. वैसे भी विवादित जगह पर नमाज नहीं पढ़ी जानी चाहिए. अतः बेहतर होगा कि अब वहां पर राम मंदिर बनवा दिया जाए.

(पारिजात त्रिपाठी)

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