पौधा लगाओ और सबको याद आओ!

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जब भी मै देखती हूँ मेरे घर मे लगे ….
उस आम और शरीफे के पेड़ को……
बाबूजी की याद अनायास ही आ जाती है……
बाबूजी ..हाँ मै अपने ससूरजी को यही तो बोलती थी…..
कितने शौक से लगाया था……
उन्होंने ये पेड़ पौधे…..
ये जानते हुए भी कि मै थोड़े ही रहूँगा फल खाने को….
जब जब हम इसके मीठे फलो कोई खाते है….बाबूजी याद आते है….
शायद इसी तरह हम.भी एक पौधा रोप दे………..
तो हमें भी कोई ऐसे ही अनायास याद कर ही लेगा…….
पेड़ देखकर…..
है न पेड़ देखकर……

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(संयुक्ता पांडेय)

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