प्रोस्ट्रेट यानि पौरुष ग्रंथि : सावधान – भारी है रोग, हल्के में न लें !!

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यह पुरुषों की बीमारी है जो चालीस की आयु पार करने के बाद किसी भी पुरुष को हो सकती है. इसे गंभीरता से नहीं लिया तो जान भी जा सकती है.

पौरुष ग्रंथि अर्थात प्रोस्ट्रेट की भूमिका शरीर में अत्यंत अहम् होती है. यह एक तरफ पेशाब के बहाव को नियंत्रित करती है, वहीं दूसरी तरफ सीमेन अर्थात वीर्य का निर्माण भी करती है.

अगर आपको भी आता है बार बार पेशाब तो हो जाए सावधान, हो सकती है ये गंभीर बीमारी

आयु बढ़ने के साथ ही पौरष ग्रंथि भी बढ़ने लगती है. इस रोग की वजह ही इस ग्रंथि का बढ़ना होता है. जब यह ग्रंथि बढ़ने लगती है तो हमें कई तरह के संकेत देती है जो कि हमें सावधान करने के लिए प्रकृति की तरफ से अलर्ट होता है.

पौरुष ग्रंथि याने कि प्रोस्ट्रेट ग्लैंड जब बढ़ने लगती है तब जो सबसे महत्वपूर्ण लक्षण सामने आता है वह है कि आपकी पेशाब रुक रुक कर आने लगती है. साथ ही पेशाब में जलन या दर्द महसूस होने लगता है. इस कारण यूटीआई (यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन) होने की आशंका बढ़ जाती है.

साथ ही एक कष्टप्रद लक्षण इसका और भी है जो आगे चल कर सामने आता है वह यह है कि जब प्रोस्टेट ग्रंथि बढ़ जाती है तो बार-बार पेशाब करने की आवश्यकता महसूस होती है लेकिन करते समय पेशाब बाहर नहीं आती. ऐसा कोई भी लक्षण यदि आपको नज़र आये तो उसका कारण प्रोट्रेट का बढ़ना हो सकता है. अतएव लापरवाही न करें और तुरंत डॉक्टर को दिखाएं.

एक काम तो सबसे पहले आप करें और अपने सभी जानने वालों को करने को कहें. सैचरेटेड फ़ूड पूरी तरह से खाना बंद कर दें क्योंकि न ये फ़ूड न सिर्फ प्रोस्ट्रेट कैंसर को जन्म देता है बल्कि डायबिटीज़ भी इसी की वजह से होता है.

प्रकृति ने माँ होने का हर दायित्व निभाया है और आपको हर रोग की तरह इस रोग की दवाई भी दी हुई है. सीताफल के बीज इसका एक बहुत अच्छा इलाज है. यदि सीताफल के कच्चे बीज हम नित्य अपने भोजन में सम्मिलित करेंग तो यह रोग समाप्त हो सकता है क्योंकि इन बीजों में बहुत से ऐसे तत्व हैं जो प्रोस्टेट ग्रंथी को बढने से रोकने में सफल हैं.

हमारे देश में जो तीसरा सबसे बड़ा कैंसर देखा जा रहा है वह है प्रोस्टेट कैंसर जो कि कई कारणों से हो सकता है. वैसे तो इसके लिए विपरीत किस्म के जीन जिम्मेदार माने गए हैं, किन्तु यदि आपको परंतु अस्वास्थ्यकर जीवनशैली की आदत पड़ गई है तो आप भी कभी भी इस बीमारी का शिकार हो सकते हैं. इसलिए अभी से हो जाइये सावधान !!

प्रोस्ट्रेट ग्रंथि बढ़ने से यूटीआई और प्रोस्ट्रेट कैंसर होने का सीधा खतरा उत्पन्न हो सकता है. इसलिए पढ़ा-लिखा अनपढ़ न बनें, सजग हो जाएँ और इस दिशा में उपचार तथा सावधानी के कदम तुरंत उठायें. सबसे पहले तो चेक अप कराएं फिर तुरंत अपनी जीवन शैली सुधार लें.

जागरूक बनिए और समय समय पर जांच कराते रहिये. यदि आप मोटे हैं या आप एक ही जगह पर घंटों तक बैठे रहते हैं तो आपको भी हो सकता है प्रोस्टेट कैंसर. इसलिए सावधानी ही सबसे पहला इलाज है.

संतृत्प वसा युक्त भोजन को भी जितना अवॉयड कर सकें, करें. वह भी प्रोस्ट्रेट कैंसर सहित कई बीमारियों का जिम्मेदार हो सकता है. यद्यपि प्रारंभिक अवस्था में प्रोस्टेट कैंसर का 100 प्रतिशत उपचार हो सकता है किन्तु आप इस स्थिति को न ही आने दें तो अच्छा है.

(पारिजात त्रिपाठी)

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