बर्दाश्त नहीं अनुशासहीनता : बीजेपी ने निकाल बाहर किया बागियों को

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सही सिलसिले की सही समय पर सही शुरुआत..

राजस्थान विधानसभा चुनाव में अनुशासन को भी महत्व दिया जा रहा है. बड़ी पार्टी ने याने कि भाजपा ने अपने 11 नेताओं कान पकड़ कर बाहर कर दिया है. ये नेता अब आगे छह साल पार्टी से बाहर ही अपनी दुकानदारी चलाएंगे.

ये बड़ा काम हुआ है नाम वापसी के अंतिम दिन. प्रदेश बीजेपी में बगावती सुर में गाने वालों को मनाने का कार्यक्रम चल रहा था जो कि फाइनली नाकाम रहा. इस हालत में पार्टी ने इस पार-उस पार कर दिया और बगावती चेहरों को सीधे बाहर कर दिया.

राजस्थान भाजपा की कठोर अनुशासनात्मिक कार्रवाई की तलवार चली है प्रदेश के अपने ही ग्यारह नेताओं पर. अब ये छह साल तक पार्टी कार्यालय के दरवाजे के बाहर ही रहेंगे. दिलचस्प बात ये है कि इन निष्कासित नेताओं में वर्तमान सरकार के चार मंत्री भी सम्मिलित हैं.

चुनाव विशेष समय होता है जब एकता और अनुशासन की सबसे अधिक आवश्यकता पड़ती है. इस समय ही कुछ लोग ब्लैकमेल करने का सही मौक़ा पा जाते हैं. यद्यपि ऐसे ब्लैकमेल ज्यादातर इस तरह के नेताओं को पार्टी की ब्लैक बुक का अंदरूनी हिस्सा बना देते हैं और समय आने पर दंड भी पाते हैं. किन्तु सीधे सीधे शरारती बच्चों को राजनीति के क्लास रूम में दरवाजे के बाहर खड़ा कर देने की घटनाएं प्रकाश में कम ही आती हैं.

जैसा कि चुनाव पूर्व हर पार्टी में होता है, बीजेपी में भी हुआ. राजस्थान चुनावों हेतु टिकट के वितरण के बाद कई नेताओं के मुँह फूल गए. कारण था, पार्टी ने छह मंत्रियों सहित करीब 56 मौजूदा विधायकों के टिकट काट दिए थे.

टिकट कटा बैठे मंत्रियों में दो मंत्रियों नंदलाल मीणा और जसवंत यादव ने जब पेअर पटकना शुरू किया तो उनके के बेटों को टिकट दे कर उनकी ग्रह शान्ति कराई गई. किन्तु अभी भी चार मंत्री थे जो पहले तो परेशान दिखाई दिए बाद में गुस्साए भी नज़र आने लगे. अब फाइनली इन्होने कार्यालय में हुई अपने गुस्से की खूँटियाँ गाड़नी शुरू कर दीं. बगावत पर आमादा इन चारों मंत्रियों – धनसिंह रावत, सुरेन्द्र गोयल, राजकुमार रिणवा और हेम सिंह भड़ाना को सबक सीखने के अतिरिक्त कोई विकल्प शेष नहीं था. तब पार्टी ने इन्हें सबक सिखा ही दिया.

इन चारों की चौकड़ी के बाद भी सात अन्य नेता राग बगावत का आलाप ले रहे थे. पार्टी ने लाख मनाया, नहीं माने. प्रकाश जावड़ेकर ने उनके निष्कासन-नामों पर हस्ताक्षर करके टेंशन ख़तम किया.

(पारिजात त्रिपाठी)