बहन मायावती की नींद उड़ जाएगी!

Share on facebook
Share on twitter
Share on pinterest
Share on telegram
Share on whatsapp
Share on email


कल अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमित शाह की नींद उड़ाने का दावा कर रहीं मायावती की स्वयं की नींद क्यों उड़ जाएगी, ज़रा समझिये इस सच को..

बहुत मुश्किल नहीं इस गणित को समझना… क्योंकि सारे न्यूज चैनलों के ज्ञानी कल से जातीय गणित का ही राग अलाप रहे हैं ।

यूपी में 44% पिछड़े वर्ग के वोट। इसमें…
9% यादव सपा का प्रतिबद्ध वोटर।
7% लोध BJP का प्रतिबद्ध वोट।
7% कुर्मी वोटबैंक का 70-80% हिस्सा BJP/अपना दल के साथ।

मौर्य/कुशवाहा/सैनी/काछी/शाक्य वोटबैंक 7% इसमें पलड़ा BJP का भारी।

3% जाट, किसी समय अजित सिंह के साथ थे। पर आज स्थिति बदल चुकी। इसीलिए गठबंधन केवल 1-2 सीट दे रहा है।

1.5% गूजर किसी दल विशेष का प्रतिबद्ध वोटबैंक नहीं। चुनावी माहौल व प्रत्याशी के अनुसार प्रतिबद्धता तय होगी।

यह तो लेखाजोखा 44 में से 34.5% पिछड़े वर्ग के वोटों का है। जो साफ बता रहा है कि पलड़ा किसका भारी होगा।

शेष 9.5% में भी मोदी ही भारी पड़ेंगे।

यूपी में दलित वोटों का प्रतिशत है लगभग 21.1% इसमें से…

9% जाटव हैं जो BSP का प्रतिबद्ध वोटबैंक है।

शेष 12 % में पासी बाल्मीकि खटिक एवं 1-2 अन्य जातियों का समूह लगभग 6% है। जो बसपा के शुरुआती दौर के बाद उसका प्रतिबद्ध वोटर कभी नहीं रहा क्योंकि बाद में मायावती के विरुद्ध इनके अपने जातीय क्षत्रप उभरे। सीधी लड़ाई में इस वोटबैंक का झुकाव BJP की ही तरफ होगा, खासकर उन सीटों पर शत प्रतिशत झुकाव होगा जहां सपा लड़ेगी।

शेष बचे 6% में छोटे छोटे अनेक जातीय समूह हैं।

इस 6% दलित वोटबैंक की लड़ाई में मायावती का जातीय कार्ड बनाम मोदी के सौभाग्य/उज्ज्वला/आवास/शौचालय कार्ड में कांटे की टक्कर होगी लेकिन केवल उन 38 सीटों पर जहां बसपा लड़ेगी। शेष 42 सीटों पर इस वोटबैंक के 80% हिस्से का झुकाव BJP की ही तरफ होगा।

लेकिन जिन 38 सीटों पर बसपा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है उन 38 सीटों पर शत प्रतिशत यादव वोट उसको मिलेगा.? ऐसा मूर्खतापूर्ण निष्कर्ष दिल्ली की लुटियन मीडिया ही निकाल सकती है। अपने हिस्से की 38 सीटों पर शतप्रतिशत यादव वोटबैंक ट्रांसफर होने का हसीन सपना देख रही बहन मायावती के उन हसीन सपनों पर बहुत तगड़ी सर्जिकल स्ट्राइक चाहत रखते हैं शिवपाल सिंह यादव. शिवपाल ने इस दिशा मे पिछले कई महीनों में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी है। यादव वोटबैंक में शिवपाल सिंह यादव को मिल रहे जमीनी समर्थन की सच्चाई अगर जाननी समझनी हो तो दिल्ली के न्यूजचैनलों के स्टूडियो वाले कागज़ी चुनावी एक्सपर्टों की राय नहीं, बल्कि यादव-बहुल क्षेत्रों में हो रहीं शिवपाल सिंह यादव की रैलियों में उमड़ रही भीड़ के इरादे समझने पड़ेंगे। बस कुछ दिन और प्रतीक्षा कीजिये…

चुनावी मैदान में खासकर बसपा कोटे वाली 38 सीटों पर शिवपाल सिंह यादव के प्रत्याशियों की सूची के नाम देखकर नींद तो बहन मायावती की उड़ जाएगी।यह मास्टर स्ट्रोक होगा मुलायम सिंह यादव का। मायावती की समझ में जब यह मास्टर स्ट्रोक आएगा, तबतक बहुत देर हो चुकी होगी।

यह मेरा प्रथम दृष्टया शुरुआती आकलन है… चुनाव तक समय समय पर कई और कड़ियां इसमें जुड़ती रहेंगी।

(सतीश चन्द्र मिश्रा)

—————————————————————————————————————–(न्यूज़ इंडिया ग्लोबल पर प्रस्तुत प्रत्येक विचार उसके प्रस्तुतकर्ता का है और इस मंच पर लिखे गए प्रत्येक लेख का उत्तरदायित्व मात्र उसके लेखक का है. मंच हमारा है किन्तु विचार सबकेहैं.)                                                                                                                               ——————————————————————————————————————