बेलगाम जुबान वाले नेताओं पर लगाम लगाने का अच्छा तरीका

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बेलगाम जुबान चले जिन नेताओं की, उन नेताओं को -सरकारी खर्च पर कोई सुरक्षा ना दी जाये -आक्रोश में गाली बकते है -तो आक्रोश भुगतें जनता का

वैसे तो जब से नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री बने, तभी से उनके खिलाफ गालियां बकने में नेताओं ने (खासकर कांग्रेस के) कोई कंजूसी नहीं की –दिल खोल कर गालियां दी हैं.

इस चुनाव में तो अति ही हो गई — मायावती ने तो सभी सीमायें तोड़ कर मोदी पर पूर्णरूप से निजी हमला करते हुए कहा कि मोदी ने राजनितिक स्वार्थ के लिए अपनी पत्नी को छोड़ा है, उसका पिछड़ी जाति का होना ढोंग है –और भी न जाने क्या-क्या कहा.

मायावती भूल गईं कि उनके निजी जीवन पर भी लोग कुछ भी कह सकते हैं, मैं भी कह सकता हूँ मगर कहूंगा नहीं क्यूंकि एक मर्यादा में ही रह कर कुछ कहना चाहिए.

इसके अलावा इस चुनाव में कांग्रेस के और विपक्ष के अनेक नेता मोदी के लिए जो अपशब्द बोल रहे हैं, वह बोलने का उन्हें न नैतिक अधिकार है, न संविधान में ऐसा कोई अधिकार दिया गया है और न कोई अन्य कानून उन्हें ऐसे शब्द बोलने का अधिकार देता है.

अगर चुनाव आयोग, पुलिस प्रसाशन, राज्य सरकार और देश की अदालतें उन बातों पर संज्ञान ले कर उन्हें नहीं रोक सकती तो फिर उन्हें आम जनता के बीच बिना सरकारी सुरक्षा के जाना चाहिए . उन्हें अगर अपनी जुबान को बेकाबू रखने का शौक है तो फिर जनता को भी उन्हें अपने तरीके से जवाब देने का अधिकार होना चाहिए.

सिद्धू पर चप्पल मारने वाली महिला को क्यों गिरफ्तार किया पुलिस ने? जब सिद्धू को गली बकते पुलिस ने रोकने की कोशिश नहीं की -जब जोश में होश खो कर पी एम् को गाली देते हो तो महिला ने चप्पल मार कर क्या गलती की ?

कांग्रेस के मल्लिकार्जुन खड़गे कह रहे हैं कि “मोदी बोलता है कि कांग्रेस की 40 सीट आएँगी, अगर 40 से ज्यादा आ गई तो क्या मोदी इंडिया गेट पर अपने को फांसी लगा लेगा.’

अरे प्रलयनाथ गैxडासामी के आधुनिक अवतार, भाई-बहन भी रोज रोज कहते हैं –मोदी सरकार जा रही है ! अब उनसे पूछ कर बताओ कि अगर मोदी सरकार नहीं गई तो क्या वो दोनों इंडिया गेट पर लटक कर फांसी लगा लेंगे?

कोई जनप्रतिनिधि है या नहीं, लोकतंत्र के सबसे बड़े पद पर बैठे प्रधान मंत्री के लिए भद्दी से भद्दी गालियां दी जा रही हैं जबकि वो आम जनप्रतिनिधि नहीं पूरे देश के प्रतिनिधि हैं – यह कहाँ तक उचित है? ऐसे लोगों को जनता के पैसे से कोई सुरक्षा नहीं मिलनी चाहिए. कुछ वकील लोग अपनी मर्जी से जनहित याचिका लगाते रहते है, एक ये याचिका उनको ये भी लगानी जाहिये सुप्रीम कोर्ट में.

सुप्रीम कोर्ट को ममता बनर्जी के उस बयान का स्वतः संज्ञान ले कर तुरंत कार्यवाही करनी चाहिए कि वो मोदी को प्रधानमंत्री नहीं मानती. मोदी किसी की कृपा से प्रधानमंत्री बने, वो चुन कर आये इस देश की जनता द्वारा और तब संविधान की प्रक्रिया के अनुसार पीएम बने.

ममता बनर्जी का बयान, देश के संविधान के खिलाफ खुला विद्रोह है जिसके लिए सुप्रीम कोर्ट को उन्हें बर्खास्त कर देना चाहिए, लेकिन नहीं करेंगे क्यूंकि वहां भी वामपंथी बैठे हैं,लेकिन जिस दिन मोदी 356 लगा कर ममता सरकार की छुट्टी कर देंगे, उस दिन देश का कानून कब्र में से खड़ा हो कर मोदी का रास्ता रोक देगा.

(सुभाष चन्द्र)13/05/2019

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