बैटल ऑफ़ बुधनी : बैटल ऑफ बक्सर से कम नहीं

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आपने बैटल ऑफ प्लासी और बैटल ऑफ बक्सर सुना है पर अब देखिये बैटल ऑफ बुधनी जो इन दोनो से किसी तरह कम नहीं..

एक सवाल जिसका जवाब मध्यप्रदेश में सबको पता है – मध्य प्रदेश का सबसे सनसनीखेज चुनाव क्षेत्र कौन सा है? आप बाहर के हैं इसलिए आपको बताना हमारा फ़र्ज़ बनता है – बुधनी विधानसभा क्षेत्र इस प्रदेश का सर्वाधिक महत्वपूर्ण विधानसभा चुनाव क्षेत्र है.

कारण भी पता न हो तो सुन लीजिये. ये प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का चुनाव क्षेत्र है. यह सबसे अहम इसलिए है कि यदि यहां हार गए तो प्रदेश में भाजपा की साख चौपट हो जाएगी. सनसनीखेज इसलिए कि अगर मुख्यमंत्री जी यहां से चुनाव लड़ रहे हैं तो यहां उनके सामने वाला भी कोई छोटा मोटा प्रत्याशी नहीं है.

बैटल ऑफ़ बुधनी शायद आज की तारीख में इस प्रदेश में हल्दीघाटी के युद्ध से भी अधिक महत्वपूर्ण है. कारण ये कि यहां एक तरफ सीएम हैं तो दूसरी तरफ अरुण यादव हैं जो प्रदेश कांग्रेस के पूर्व-अध्यक्ष हैं. और इस राज्य में एन्टीइन्कम्बेंसी का सबसे ज्यादा फायदा इनको ही मिल सकता है.

अरुण यादव वास्तव में कांग्रेस के सूरमा हैं जो शिवराज सिंह चौहान को टक्कर दे सकते हैं. वे न केवल वर्तमान में कांग्रेस के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष हैं बल्कि पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री भी हैं.

इस विधानसभा चुनाव क्षेत्र पर सबने टकटकी लगा रखी है. यह देखने वालों के लिए जहां एक दिलचस्प मुकाबला है वहीं लड़ने वालों के लिए अस्तित्व का संघर्ष है. अर्थात यहां चुनाव लड़ रहे दोनों योद्धा अपने यश और प्रतिष्ठा के लिए जूझ रहे हैं. जो हारा उसका राजनीतिक अस्तित्व तिरोहित हो जायेगा, इसमें कोई संदेह नहीं!

जब कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने भाषण में अरुण यादव को राज्य का भविष्य कह कर सम्बोधित किया तो इससे साफ़ ज़ाहिर है कि यदि कांग्रेस इस राज्य में जीत हासिल करने में कामयाब रहती है तो कांग्रेस की तरफ अरुण यादव ही मुख्यमंत्री होंगे.

पिछले तीन चुनावों का इतिहास देखें तो मुख्यमंत्री के खिलाफ कांग्रेस ने कमज़ोर उम्मीदवारों को लड़ाया था और हार का मुँह देखा था. हम पीछे जाएँ तो दो ऐसे बड़े उदाहरण मिलते हैं जब वर्तमान मुख्यमंत्री को विपक्षी उम्मीदवार से मुँह की खानी पड़ी थी. 1962 के चुनाव में उस समय के मुख्यमंत्री कैलाशनाथ काटजू को जनसंघ के लक्ष्मीनारायण जमनालाल ने पराजित किया था. उसके बाद 1977 के चुनावों में देखें तो तत्कालीन मुख्यमंत्री श्यामाचरण शुक्ल को हरा दिया था पवन दीवान ने जो जनता दल के उम्मीदवार थे.

वैसे बुधनी शिवराज का गढ़ है और यहां जनता में मुख्यमंत्री के तौर पर तथा नेता के तौर पर भी जनता में लोकप्रियता कम नहीं है लेकिन अरुण यादव के सामने आने पर यह तो तय हो गया है कि शिवराज सिंह को कांग्रेस की तरफ से पहले की तरह वॉकओवर नहीं मिलेगा.

इस तरह से देखें तो बैटल ऑफ बुधनी दो मुख्यमन्त्रियों के बीच की जंग है एक वर्तमान मुख्यमन्त्री है तो दूसरा भावी. 

(पारिजात त्रिपाठी)

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