बड़ा काण्ड हो सकता था, रूस गिराने वाला था चीन पर एटम बम

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मॉस्को. अमेरिका के खिलाफ मोर्चाबन्दी की ज़रूरत ने इन दोनों देशों को एक दूसरे के करीब ला दिया है. ये सच भी है क्योंकि इन दोनों देशों का एक ही सबसे बड़ा शत्रु है -अमेरिका. अमेरिका से दुश्मनी ने रूस और चीन को एक दूसरे का जरूरतमन्द और कायल बना दिया है. किन्तु उसके बहुत पहले एक दौर ऐसा भी आया था जब रूस और चीन में नेवले और सांप वाली शत्रुता थी. इतना ही नहीं, रूस ने तो चीन को सबक सिखाने के लिए परमाणु मिसाइलें दागने की तैयारी हो गया था.

किया खुलासा सीआईए की रिपोर्ट ने

अमेरिकी ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए की हाल ही में सामने आई एक रिपोर्ट ने किया है ये खुलासा. इस रिपोर्ट के मुताबिक रूस और चीन के रिश्ते इतने बिगड़ गए थे कि ऐसा एक समय आ गया था जब दुनिया में हो सकता था एक बड़ा काण्ड. चीन पर रूस इतना कुपित हो चुका था कि उसने चीन को ठीक करने की ठान ली थी और अपनी परमाणु मिसाइलें भी तान ली थीं.

परमाणु युद्ध का खतरा मंडराने लगा था

ये एक ऐसा वक्त था जब सारी दुनिया पर परमाणु युद्ध का खतरा मंडराने लगा था. ऊपर से तो ये शीत युद्ध दिखाई देता था लेकिन इसके भीतर पैदा हो गई गर्मी ज्वालामुखी बनने जा रही थी. राष्ट्रपति निकिता ख्रुश्चेव रूस में और चीन में तानाशाह माओ त्से तुंग का राज कायम था. कम्युनिस्ट महाशक्ति रूस उस समय सोवियत संघ के रूप में जानी जाती थी जिसको समर्थन तब चीन ने भी दिया था. उस दौरान ख्रुश्चेव ने फिदेल कास्त्रो के अनुरोध पर अपनी परमाणु मिसाइलों को क्यूबा में तैनात कर दिया था.

गुस्साये चीन ने परमाणु परीक्षण कर डाला था

चीन ने रूस के परमाणु हमले के खतरे को भांप लिया था और तब चीन को तुरंत करना पड़ा था परमाणु परीक्षण जिसके बाद हालात ने करवट ले लिये थे. वर्ष 1964 के अक्टूबर माह में चीन ने अपने इस पहले परमाणु परीक्षण को प्रोजक्ट 596 के नाम से शुरू किया था. फिर चीन को दुनिया के पांचवे परमाणु क्षमता सम्पन्न राष्ट्र के रूप में जाना जाने लगा था. उस दौर में रूस और चीन बीच ये बड़ा झगड़ा सीमा-विवाद के कारण उपजा था.

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