BJP की मुस्लिम प्रत्याशी फातिमा

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भारतीय जनता पार्टी को भगवा दल कह कर बदनाम किया जाता है. इस पार्टी को कांग्रेस और विपक्षी दलों ने हिंदूवादी पार्टी का नाम दिया है और इस पर ये आरोप चस्पा कर दिया है कि यह आरएसएस के इशारों पर काम करती है.

इसमें कोई संदेह नहीं कि भाजपा आरएसएस का राजनीतिक सहयोगी है. किन्तु आरएसएस के इशारों पर चलने वाली बात गले नहीं उतरती. और गले तो ये बात भी नहीं उतरती कि आरएसएस मुस्लिम विरोधी है या अल्पसंख्यक-द्रोही है.

जबकि आरएसएस में जा कर देखिये उसने बाकायदा अपना एक मुस्लिम फ्रंट भी बनाया हुआ है और केरल, कश्मीर जैसी जगहों पर संघ के कार्यकर्ता आपको काम करते नज़र आएंगे जहां कि मुस्लिम बहुल आबादी है. क्योंकि उनके लिए धर्म से भी बड़ी मानवता है, सनातन धर्म की सर्वोत्तम शिक्षा यही है.

इसलिए कुछ लोगों के लिए ये समाचार थोड़ा चौंकाने वाला हो सकता है और कुछ लोगों के लिए ये मज़ाक उड़ाने या फिकरे कसने का विषय भी हो सकता है. समाचार यह है कि भोपाल से भाजपा ने एक मुस्लिम प्रत्याशी पर अपना भरोसा जताया है.

इतना ही अहम है तथ्य भी है कि यह मुस्लिम प्रत्याशी एक महिला है. प्रदेश विधानसभा चुनाव हेतु पार्टी ने अपने प्रत्याशियों की जो आखिरी सूची जारी की है उसमें शामिल सात नामों में एक नाम है इस मुस्लिम महिला का जिसका नाम है फातिमा रसूल सिद्दीकी. फातिमा भोपाल-उत्तर सीट से कांग्रेस के मौजूदा विधायक आरिफ अकील को चुनौती देंगी.

फातिमा का इलाके में अंदरूनी तौर पर विरोध भी बहुत होगा क्योंकि वे हाल में ही बीजेपी में शामिल हुई हैं और आते ही उनको टिकट भी मिल गया है. जैसा कि नाम से भी ज़ाहिर है, फातिमा भोपाल उत्तर के बड़े नेता रसूल अहमद सिद्दीकी की बेटी हैं और सिद्दीकी बड़े पुराने कांग्रेसी नेता हैं.

बीजेपी की इस समझदारी के बाद भोपाल उत्तर में अब मुकाबला दिलचस्प हो जाएगा. मुस्लिम बहुल इलाका मुस्लिम नेता के लिए जीत की सम्पूर्ण संभावना होता है. ऐसी स्थिति में आरिफ अकील को इस बार सही चुनौती मिलने वाली है. और यह चुनौती उन्हें तकलीफ भी दे सकती है क्योंकि सामने एक महिला है उसे सहानुभूति के वोट भी मिलेंगे. इसके अलावा एक महिला होने का फायदा ये है कि महिलाओं के वोट तो उनको जाएंगे ही पुरुष भी उनको वोट देना चाहेंगे.

पिछले छब्बीस साल से आरिफ अकील इस सीट पर काबिज़ हैं. रसूल अहमद सिद्दीकी जो कि दो बार भोपाल उत्तर से कांग्रेस विधायक रह चुके हैं, 1992 में आरिफ अकील से हार भी चुके हैं. उस समय आरिफ अकील जनता दल से चुनाव लड़े थे. इसलिए अब फातिमा आरिफ अकील को हराकर अपने पिता की हार का बदला अवश्य लेना चाहेंगी

(पारिजात त्रिपाठी)

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