भारत के जेम्स बान्ड अजित डोभाल

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बड़ी ख़ूबसूरती से पर्दे के पीछे रहते हुए आलोक वर्मा को पैदल कर दिया गया और उनके आकाओं को CBI की सूचनाएं और रॉ का मूवमेंट मिलना बंद हो गया।

 यह एक सोची समझी चाल थी, जिसे कुकुर सयाने समझे ही नहीं, वे तो  उलझे रहे कोर्ट कचहरी में और इधर चुपचाप खेल हो गया और किसी को कानों-कान खबर तक नहीं हुई। एक बात आप जान लीजिए सऊदी अरब ने खुशी से नहीं, मजबूरी वश, बड़े रोते गाते सौंपा है मिशेल को भारत की सरकार को क्योंकि उसकी शहजादी की जिंदगी रॉ के हाथ मे थी और दूसरी ये कि आलोक वर्मा के रहते मिशेल को भारत लाना असम्भव था।

हालांकि इस पूरे खेल में मोदी को भी अपना एक मोहरा पिटवाना पड़ा लेकिन राजनीति में ये सब चलता रहता है। वो प्यादे पर खुश होते रहे इधर मोदी ने उनका वजीर काट दिया। आगे की भी सुन लीजिये कि कांग्रेस अब किसी भी हालत में राव को CBI निदेशक के पद से हटवाना चाहेगी, सीधे तो हटा नहीं पायेगी इसलिये सहारा कोर्ट का लिया जायेगा। देख लीजियेगा बाकी है बहुत कुछ लेकिन उसे सार्वजनिक करना ठीक नहीं

अब कौन है मिशेल ये समझना भी जरूरी है. क्रिश्चियन मिशेल, ये नाम आपके लिये नया नहीं होगा. नाम तो आप सबने सुना ही होगा ! मशहूर और अरबपति आर्म्स डीलर , ग्रेट ब्रिटेन का नागरिक उस ग्रेट ब्रिटेन का जो अपने नागरिकों की तो छोड़ो अपने यहाँ छुपे दूसरे देशों के भगोड़े आर्थिक अपराधियो को भी किसी देश को , विशेषकर अगर वो भारत जैसा तीसरी दुनिया का मुल्क है, प्रत्यापित नही करता. इस सिलसिले में बहुत से उदहारण गिनाये जा सकते हैं जिनमें कैसेट किंग गुलशन कुमार के कातिल संगीतकार नदीम से लेकर विन चड्डा और हिन्दुजा बंधुओं से लेकर हाल के विजय माल्या ललित मोदी, नीरव मोदी ,माहुल चौकसी शामिल हैं.

जरा सोचो फिर उसने UAE से अपने नागरिक मिशेल क्रिश्चियन को क्या आराम से प्रत्यापित हो जाने दिया होगा ? बिल्कुल भी नही उसने अपने सारे घोड़े खोल दिये थे और दुबई या UAE की सरकार भी बाकी अरबी मुल्कों की तरह पश्चिम की बात टालने का मादा नही रखती पर फिर ऐसा क्या हुआ कि उसे मिशेल क्रिश्चियन को अनमने मन से भारत को सौपना पड़ा !

दरअसल ये भारत की मौजूदा सरकार की जबरदस्त कूटनीतिक जीत है बिल्कुल नाटकीय अंदाज में क्रियान्वित की गई योजना के तहत संयुक्त अरब अमीरात के अमीर जो वहाँ के प्रधानमंत्री भी है, शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मकदूम की बहुत सारी बेगमो में से जो अलग अलग देशों की है में से एक बेगम अल्जीरिया से है.

तो भाई लोगो अमीरात के राजा या पिरधान (प्रधान) मंत्री की जो कई बेगमो में से एक अल्जीरियाई बेगम साहिबा थी उनसे एक 33 /34 वर्षीय शहजादी है जिसका नाम शेख लतीफा बिन अल मकदूत है शादी हुई नहीं या करी नहीं, अल्लाह जाने , शौक सारे नवाबी थे जो अरबी राजघराने के बच्चों के होते ही हैं.

माने उड़ने उड़ाने डूबने उतरने सब मे माहिर इन्ही सब शौकों के चलते ये राजकुमारी साहिबा फ़्रेंच खुफिया एजेंसी के हनी ट्रैप में फंसी और फ्रेंच खुफिया एजेंसी के एक जासूस हेर्व ज्युबेर्ट ने शहजादी साहिबा को अच्छे से हैंडल किया गहरे समुन्दर में गोताखोरी सिखाने के नाम पर साथ साथ शहजादी साहिबा को नवाबी शौक भी था तो उनकी एक गर्ल फ्रेंड भी थी और वो थी फिनलैंड की सीक्रेट एजेंट टीना जहलेलियन जो उसकी मार्शल आर्ट ट्रेनर बन कर आयी थी.

उड़ते उड़ाते शहजादी साहिबा को अब राज महल में घुटन महसूस होने लगी अब उसे इस्लामी कानून वाहियात और जाहिल लगने लगा अब वो उड़ जाना चाहती थी इस जाहिल धर्म (ये उसकी सोच थी, मैं तो सब धर्मों का आदर करता हूँ ) की बेड़ियां तोड़ कर बॉय फ्रेंड और गर्ल फ्रेंड दोनो की नेमत अब उसके पास थी उसकी इन हरकतों का पता जब शाही परिवार को चला तो शहजादी पर कुछ पाबंदियां लगा दी गयीं पर जिसको एक बार उड़ान भरने का चस्का लग गया हो वो कहा काबू आने वाला है

तो जो हाथ लगा वो मालमत्ता समेट शहजादी साहिबा एक दिन अमीरात सल्तनत से रफूचक्कर हो गयी पहले सड़क के रास्ते ओमान और फिर वहाँ से एक आलीशान याच में सवार हो मौज मस्ती करती कराती हिन्दमहासागर में बढ़ चली अपनी मंजिलें मकसूद की और. पर यहाँ भारत यानी इंडिया में इस बार पूरे आंख कान वाली सरकार और बहुत सालों बाद अपनी पुरानी रंगत जिसके लिए वो पूरी दुनिया मे जानी जाती थी , में लौट आयी गुप्तचर एजेंसियाँ थीं.

हमारी एजेंसियाँ भी इस शाहजादी पर नजर रखे हुईं थीं और टीना मैडम को अपने पाले में कर चुकी थीं. िटीना ने ही उन्हें भारत के स्वर्ग गोवा चलने और वही राजनीतिक शरण लेने की सलाह दी 
गोवा आते ही टीना फुर्र और शाहजादी अपने फ्रेंच जासूस बॉय फ्रेंड के साथ भारतीय एजेंसी के हत्थे चढ़ गई

फिर शुरू हुआ इस सारे खेल के रचयिता माननीय अजित डोभाल जी का खेल

ब्रिटेन के लाख विरोध के बाद भी अमीरात ने क्रिश्चयन मिशेल को भारत को सौप दिया बिना किसी हील हुज्जत के क्योकि उसे अपने घर की इज्जत यानी शाहजादी चाहिए थी किसी भी कीमत पर
भारत को क्रिश्चन मिशेल मिला मेरे कुछ दोस्त कल हंस रहे थे कि इसे कुछ नही होना हां ये सच्च है इसे कुछ नही होगा ये बाइज्जत ब्रिटेन भेजा जाएगा पर इस हाथ दे और उस हाथ ले वाले फॉर्मूले के तहत , अब समझे कुछ क्यो विजय माल्या थर थर कांप रहा है ?

इसे कहते हैं एक तीर से कई शिकार कॉन्ग्रेस के कई हैवीवेट नॉक आउट होने तय हैं और मिशेल के बदले माल्या या नीरव मोदी या माहुल चौकसी या ललित मोदी या फिर सारे ??
दूसरे शब्दों में “अभी तो पार्टी शुरू हुई है!”

(विक्रम वर्मा)

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