मध्यप्रदेश 2018 : टिकटों पर वंशवाद का ग्रहण, बीजेपी और कांग्रेस ‘धर्मसंकट’ में

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मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में इस बार भी वंशवाद की बेल लहराएगी क्योंकि बीजेपी-कांग्रेस के दिग्गज नेता अपने परिवार के लिए टिकट मांगने में जुट गए हैं. दरअसल उम्मीदवारों की लिस्ट अभी जारी नहीं हुई है. यही वजह है कि फाइनल लिस्ट से पहले ही कांग्रेस-बीजेपी जैसी पार्टियों के बड़े नेता अपनी सियासी विरासत को आगे बढ़ाने की जुगत में जुट गए हैं. तमाम नेता अपने बेटे-बेटियों को टिकट दिलवाने की कोशिश में है ताकि राजनीति के रण में उतार कर उनका करियर संवारा जा सके.

कांग्रेस को इस बार मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में खुद के लिए उम्मीदें दिखाई दे रही हैं. वो पूरा जोर लगा रही है और ये चाहती है कि किसी भी तरह का असंतोष पार्टी के प्रदर्शन पर असर नहीं डाले. सबको मनाने और साथ लेकर चलने की कवायद में कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी परीक्षा उन नेताओं को लेकर है जो अपने नाते-रिश्तेदारों के लिए टिकट मांग रहे हैं. जहां कांग्रेस एक तरफ कोई गलती या चूक नहीं करना चाहती है तो वहीं वो किसी को नाराज भी नहीं करना चाहती है. इस बात का फायदा कांग्रेस के पुराने दिग्गज जरूर उठाना चाहेंगे क्योंकि इस बार उन्हें अपने बच्चों को राजनीति में लांच करने का मौका मिला है.

इंदौर में कांग्रेस नेता महेश जोशी अपने बेटे दीपक जोशी के लिए टिकट मांग रहे हैं. वो इस बार के विधानसभा चुनाव के जरिए बेटे दीपक को राजनीति में लांच करना चाहते हैं और इंदौर 3 से टिकट दिलाना चाहते हैं. इस सीट से महेश जोशी के भतीजे अश्वि जोशी तीन बार विधायक रह चुके हैं लेकिन पिछले विधानसभा चुनाव में अश्विन जोशी चुनाव हार गए थे. महेश जोशी चाहते हैं कि इंदौर 3 की पारंपरिक सीट पर जोशी परिवार का कब्जा बरकरार रहे और इसी सुरक्षित सीट से वो बेटे दीपक की राजनीतिक लौ बढ़ाना चाहते हैं.

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सत्यव्रत चतुर्वेदी भी अपने बेटे नितिन चतुर्वेदी के लिए टिकट मांग रहे हैं. हालांकि नितिन चतुर्वेदी एक बार टिकट मिलने के बावजूद चुनाव हार चुके हैं. वहीं रतलाम-झबुआ से सांसद और कांग्रेस नेता कांतिलाल भूरिया अपने बेटे विक्रांत को झाबुआ से प्रत्याशी बनाकर लांच करना चाहते हैं. विक्रांत आदिवासी संगठन जयस से जुड़े हुए थे.

इसी तरह बीजेपी की तरफ से लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन, कैलाश विजयवर्गीय, कांतिलाल भूरिया और विक्रम वर्मा जैसे नेता अपने परिवार के लिए टिकट मांग रहे हैं. ये खासतौर से उन सीटों से टिकट मांग रहे हैं जहां से खुद वर्षों से प्रतिनिधित्व करते आए हैं.
लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन इंदौर की 3 नंबर विधानसभा सीट से अपने बेटे मंदार महाजन को उतारना चाहती हैं. वो इस पारिवारिक सीट से मंदार के लिए टिकट चाह रही हैं. हालांकि ये बीजेपी ही तय करेगी कि मंदार को कहां से मौका मिलेगा.

वहीं इंदौर की एक और सीट भी प्रतिष्ठा और विरासत से जुड़ी हुई है. इंदौर की महापौर मालिनी गौड़ इंदौर की 4 नंबर सीट से अपने बेटे एकलव्य को प्रत्याशी बनाना चाहती हैं. बीजेपी के दिग्गज नेता कैलाश विजयवर्गीय भी अपनी सियासी जमीन पर वारिस को उतारना चाहते हैं. कैलाश विजयवर्गीय अपने बेटे आकाश के लिए इंदौर की 2 नंबर और महू की सीट चाहते हैं. हालांकि इंदौर 2 से बीजेपी के रमेश मेंदोला विधायक हैं.
वहीं मालवा इलाके की धार विधानसभा सीट से पूर्व केंद्रीय मंत्री विक्रम वर्मा लगातार जीतते आए हैं. इस समय उनकी पत्नी नीना वर्मा विधायक हैं और माना जा रहा है कि उन्हें दूसरी बार भी टिकट दिया जा सकता है.

इंदौर जिले की सांवेर विधानसभा सीट सोनकर परिवार की विरासत मानी जाती है. प्रकाश सोनकर यहां से कई बार विधायक रहे. लेकिन उनके निधन के बाद जब पत्नी को टिकट मिला तो वो चुनाव नहीं जीत सकीं. बाद में प्रकाश सोनकर के ही करीबी माने जाने वाले राजेश सोनकर यहां से बीजेपी के विधायक बने. अब इस सीट से प्रकाश के बेटे विजय और उनके भतीजे सावन सोनकर बीजेपी से टिकट मांग रहे हैं.
बहरहाल, विधानसभा चुनाव में अक्सर वंशवाद और परिवारवाद के चलते कुछ सीटें पहले से ही दिग्गजों के परिवार के नाम पर ‘सुरक्षित’ रहती हैं. इस बार भी नेताओं को सियासी जमीन पर अपनी विरासत जमाने का मौका मिलेगा. देखना होगा कि किसको टिकट मिलता है और कौन टिकट मिलने पर पार्टी के साथ-साथ पिता की उम्मीदों पर खरा उतरता है.

(सुस्मिता कजरी)

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