मारा गया बगदादी – पार्ट 1

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नई और ताज़ातरीन खबर आई है अमेरिका से कि बगदादी मार दिया गया है. ओसामा बिन लादेन के बाद आतंक का सबसे बड़ा चेहरा था बगदादी. अगर ये खबर सच है तो अमेरिका ने वाकई बदला ले लिया है आतंक के पर्याय से अमेरिका में हुए आतंकी विध्वंस का. अमेरिका से आई रिपोर्ट्स ने अच्छी खबर ये भी दी है कि अब बगदादी की मौत के बाद इस्लामिक स्टेट की कहानी भी दुनिया में खत्म हो जायेगी.

जो खबर सारी दुनिया के लिए राहत बन कर ट्रम्प के देश से आई है उसके अनुसार बगदादी का ‘सरेंडर’ करा लिया गया है. जी हां, सांकेतिक भाषा में राष्ट्रपति भवन पहुंचे इस संदेश ने पुष्टि कर दी कि बगदादी का एनकाउन्टर कर दिया गया है. इस पूरे मिशन का नाम रखा गया था ऑपरेशन जैकपॉट जिसने कामयाबी के साथ आतंकी संगठन आईएसआईएस के सरगना अबु बकर अल-बगदादी को ढेर कर दिया है.

जब हिन्दुस्तान और दुनिया में दीपोत्सव की तैयारी हो रही थी, अमेरिकी कमांडो आतंक का अँधेरा मिटा रहे थे. आतंक का काला साया जो दुनिया का नंबर एक आतंकी था ढूंढ कर गोलियों से भून डाला गया. कल रविवार 27 अक्टूबर को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने एक प्रेस कांफ्रेंस करके इस खबर का ऐलान किया.

व्हाइट हाउस में आयोजित इस संवाददाता सम्मलेन को सम्बोधित करते हुए अमरीकी राष्ट्रपति ने बताया कि शनिवार रात अमेरिका ने दुनिया के नंबर एक आतंकी को मार गिराया। इस खूंखार मिशन में अमेरिका के स्पेशल कमांडोज़ ने अपनी उपयोगिता सिद्ध की और अमेरिका ने भी दुनिया को बता दिया कि ओसामा के बाद अब बगदादी. आतंक नहीं सहा जाएगा और आतंक के हर चेहरे का यही हश्र होगा.

प्रमुख अमेरिकी अखबार डेली मेल ने भी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इस्लामिक स्टेट के आतंकियों के लिए अमेरिका के स्‍पेशल कमांडोज का यह हमला अप्रत्‍याशित था.

सात समंदर पार से जिस तरह ये जानकारी चल कर हम तक पहुंची है और एक ख़ुशी की खबर बनी है उसी तरह से अमेरिका से भी बगदादी के मौत के परकाले चल कर सीरिया पहुंचे थे और वहां आतंकी सरदार के लिये बुरी खबर बने.

आतंक के अंधेरे की गर्दन तोड़ देने वाली ये रात थी शनिवार याने 26 अक्टूबर की. और फिर हुआ दूसरा धमाकेदार अभियान का क्रियान्वयन जो आतंक के विरुद्ध लड़ाई में एक नया सफल अध्याय रचने वाला था.

बहुत दिनों से चल रही थी ये छुपी हुई तैयारी. अमेरिकी सेना ने आतंक विरोधी इस दस्ते को काफी पहले से ऑपरेशन बगदादी के लिए तैयारी में लगा दिया था. किसी कारण से इस ऑपरेशन का नाम बाद में बदल कर ऑपरेशन जैकपॉट कर दिया गया. सबसे बड़ी समस्या थी मीडिया से इस बड़ी तैयारी को छुपाने की. लेकिन कमाल की बात ये थी कि मीडिया ने अपने सूत्रों से इस तैयारी की खबर हासिल कर ली थी. ये जानकारी पाने के बाद भी अमेरिकी मीडिया ने अपनी सेना का विश्वास को नहीं तोड़ा और यह जानकारी पूरी तरह से गुप्त रखी गई.

रात के अँधेरे में अमेरिकी सेना के ये विशेष कमांडोज विशेष हेलिकॉप्टर्स से सीरिया की सीमा के भीतर पहुंचे. वहां पैराशूट्स से ज़मीन पर उतर कर जंगल के रास्ते से ये कमांडोज़ अपने साथ लाये विशेष मानचित्रों की मदद से सीरियाई आतंक के केंद्र इदलिब राज्य की सीमा में घुस गए.

(क्रमशः)

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