बगदादी मारा गया (पार्ट -2)

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सीरिया के इब्लिद प्रान्त की सीमा के भीतर पहुँच कर कमांडोज़ ने पहले तो तस्दीक इस बात की की कि अँधेरे के साये में डूबे जिस इलाके में वे पहुंचे हैं, वहाँ ही आगे उनकी मंज़िल उनका इन्तजार कर रही है. अपने लक्ष्य के करीब पहुँच जाने की पुष्टि होते ही स्टेप-टू को अंजाम दिया गया और पहले ही दूर छोड़ दिए गए हेलीकॉप्टर को संकेत भेज दिया गया.

यह कमांडो हेलीकॉप्टर अपने साथियों के संकेत की प्रतीक्षा में लगातार था. संकेत प्राप्त होते ही इसने भी अपने स्टेप थ्र- को अंजाम दिया. हेलीकाप्टर में लगे अपने विशेष आसमानी मानचित्र का इस्तेमाल करके ये चॉपर पहुँच गया उस स्थान पर जहां पहले ही पहुँच चुकी थी उनकी कमांडो टीम और अब वो उनका इंतज़ार कर रही थी. यहां से शुरू होना था स्टेप-फोर.

देखते ही देखे चॉपर से रस्सियां लटका दी गईं. और अँधेरे में अँधेरे का हिस्सा बने काली पोशाक पहने ये कमांडोज़ लटकती रस्सियों पर चढ़ते हुए बिना वक्त बर्बाद किये चॉपर पर सवार हो गए. अब ये चॉपर अपने फाइनल डेस्टिनेशन की तरफ बढ़ चला था.

अब यह चॉपर इब्लीद इलाके के जिस ख़ास गाँव की तरफ बढ़ चला था उसका नाम था गांव बारिशा. यह चॉपर कुछ ही देर में गाँव बारिशा के छोटे से आसमान के अँधेरे में मंडरा रहा था. चॉपर के इंजन से होने वाली गड़गड़ाहट जितना डरावना माहौल पैदा कर रही थी उतनी ही उलझन भी पैदा कर रही थी. गाँव के लोग इसे शक की नज़र से देख कर डर रहे थे इलाके के आतंकी इसे अपनी मदद के लिए आने वाला चॉपर समझ रहे थे. मगर बारीशा गाँव के लोग सही थे.

और कुछ ही देर में आतंकियों की ग़लतफ़हमी भी साफ़ हो गई जब उन्होंने देखा कि चॉपर से हमेशा वाला उनको कोड संकेत नहीं दिया गया. आतंकी जितनी देर में सावधान हो पाते, उन्होंने देखा कि ये चॉपर एक ख़ास मकान के ऊपर पहुँच चुका था. बस फिर क्या था सीरिया के इन खुंखार आतंकियों को समझते देर न लगी कि क्या हो रहा है.

लेकिन वे ये नहीं जानते थे कि क्या होने वाला है. इस बार मुकाबला सीधा-सीधा नहीं था. ये गुरिल्ला वारफेयर था और अमेरिका की दूसरी बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक थी. इस बार भी आतंकियों के सामने सेना के आम जवान नहीं थे, विशेष प्रशिक्षण प्राप्त खुंखार कमांडोज़ थे..

(क्रमशः)

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