माल्या तो है शुरुआत : वापस लाये जायेंगे 58 भगोड़े उसके बाद

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ये भी है अन्तर्राष्ट्रीय और आर्थिक क्षेत्र के अच्छे दिनों की एक झलक जो पहले वाली सरकारों में असंभव थी.. 

समाचार आया है कि आधिकारिक तौर पर भारत सरकार को भगोड़े कारोबारी विजय माल्या के प्रत्यर्पण की ब्रिटेन की अदालत से मंज़ूरी मिल गई है. निश्चित रूप से यह भारत की एक बहुत बड़ी जीत है जो कि दो बातें साफ़ तौर पर कहती है. एक तो ये कि अब भारत की बात दुनिया सुनती है और भारत को नज़रअंदाज़ करके चलना किसी के लिए भी आसान नहीं है. ये मोदी की जीत है और मोदी विरोधियों तथा भारत विरोधियों की हार है.

दूसरी महत्वपूर्ण बात जो इससे निकल कर सामने आती है वो ये है कि ये तो बस शुरुआत है, अब एक लम्बी श्रंखला देखने को मिलेगी. देश से करोड़ों-अरबों रुपयों का घोटाला करके विदेश भाग जाना आर्थिक अपराधियों का फैशन बन गया था. उनके पैसे की शक्ति से विदेशों में उनको शरण मिलती थी और आश्वस्ति भी कि वे वापस नहीं भेजे जाएंगे.

लेकिन अब उनके पैसे से भी अधिक महत्वपूर्ण हो गया है विश्वशक्ति भारत के साथ सम्बन्ध. अब पाकिस्तान या चीन को छोड़ कर शायद ही कोई देश हो जो भारत से संबंध खराब करने में समझदारी समझता हो. यहां तो मैं यह कहूंगा कि चीन भी अब भारत से सम्बन्ध अच्छे करके ही अपने आर्थिक हितों की सुरक्षा देख रहा है. बचा है दुनिया में तो बस एक पाकिस्तान.

अब मुद्दे की बात ये है कि विजय माल्या जिस ट्रैन का इंजन बन कर भारत प्रत्यार्पित होगा, उस ट्रेन में पीछे बहुत से डिब्बे लगे होंगे, जैसे कि नीरव मोदी, मेहुल चोकसी, चेतन संदेसरा, ललित मोदी और नितिन आदि. ये बात अलग है कि इन्जन पहले आयेगा डब्बे पीछे आयेंगे.  इस तरह के कुल 58 डिब्बों वाली ट्रैन का भारत आगमन होगा जो कि एक अविश्वसनीय सच का सामना होगा खासकर उन भगोड़े कारोबारियों के लिए जिनके दिल की धड़कने विजय माल्या के प्रत्यार्पण के समाचार के बाद से बढ़ गई हैं.

 भारत सरकार ने अपना इरादा साफ़ कर दिया है. और इस बारे में संसद में जानकारी भी दी गई है. भारत में में घोटाले करने के बाद विदेशों में रह रहे इन सभी भगोड़ों को देश वापस लाया जाएगा. इन सभी के लिए इंटरपोल में रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने और प्रत्यर्पण की मांग की गई है.

सरकार की तरफ से प्राप्त जानकारी में बताया गया है कि इन सभी भगोड़ों के अलावा सरकार और सीबीआई, ईडी, डीआरआई ने 16 अन्य के प्रत्यर्पण की मांग यूएई, यूके, बेल्जियम, इजिप्ट, अमेरिका, ऐंटीगुआ जैसे देशों से की गई है. इतना ही नहीं, विदेश मंत्रालय ने अक्टूबर में वीवीआईपी हेलीकॉप्टर खरीद घोटाले में दो अन्य बिचौलियों के प्रत्यर्पण की मांग इटली से की है. इससे पहले सीबीआई ने कार्लो जीरोसा और गुइडो हैश्क के भी प्रत्यर्पण की मांग इटली सरकारी से की है. इस मामले के प्रमुख आरोपी बिचौलिया क्रिश्चयन मिशेल का पहले ही यूएई से प्रत्यर्पण हो चुका है.

(पारिजात त्रिपाठी)

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