मिशन चंद्रयान -2 में 2 महिलाओं का ऐतिहासिक योगदान

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भारत ने चंद्रयान 2 के सफल प्रक्षेपण के साथ 23 जुलाई को अमेरिका, रूस, चीन जैस अंतरिक्ष शक्तियों को पीछे छोड़ दिया है. सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से चंद्रयान-2 के सफल प्रक्षेपण में इसरो की दो महिला वैज्ञानिकों ने अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. बेंगलुरू स्थित यूआर राव अंतरिक्ष केंद्र में नियुक्त इन महिला वैज्ञानिकों – मुथाया वनिता और ऋतु करिधाल का नाम मिशन चंद्रयान -2 के साथ यादगार हो गया है.

मुथाया वनिता की बात करें. वनिता यूआर राव सैटेलाइट सेंटर की वह एकमात्र महिला हैं जिन्होंने किसी प्रतिष्ठित ग्रहीय मिशन का नेतृत्व किया है. वनिता पहले कार्टोसैट-1,ओशनसैट-2 और मेघा-ट्रोपिक टीमों का हिस्सा भी रही हैं.

मिशन चंद्रयान-2 में वो पहली महिला प्रोजेक्ट डायरेक्टर चालीस वर्षीया मुथाया वनिता के हाथों में प्रक्षेपण यान के हार्डवेयर डेवलपमेन्ट और मेन्टीनेन्स की देखरेख की जिम्मेदारी थी. इसरो में अपनी लगन और मेहनत से अपनी पहचान बनाने वाली वनिता एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी आफ इंडिया द्वारा स्थापित सर्वश्रेष्ठ महिला वैज्ञानिक पुरस्कार प्राप्त करने वाली पहली महिला हैं.

डिजाइन इंजीनियर मुथाया वनिता को 2006 में बेस्ट वुमन सांइटिस्ट का सम्मान भी दिया जा चुका है.

मिशन चंद्रयान -2 की सफलता का श्रेय प्राप्त करने वाली इसरो की दूसरी महिला वैज्ञानक ऋतु करिधाल भारत द्वारा 2013में प्रक्षेपित मंगल ऑर्बिटर मिशन की उप अभियान निदेशक थीं. एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री होल्डर ऋतु करिधाल दो बच्चों की मां हैं. मिशन चंद्रयान -2 की डिप्टी ऑपरेशन डायरेक्टर रितु के लिये इसरो में सबसे बड़ा प्रोजेक्ट मिशन मंगलयान था.

भारत की ‘रॉकेट महिला’ के रूप में प्रसिद्ध ऋतु करिधाल ने मिशन चंद्रयान -2 में अंतरिक्ष यान की बाहरी स्वायत्तता प्रणाली की जिम्मेदारी सम्हाली थी. 

(अंजू गुप्ता)

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