मुख्यमंत्री को मिलेगी चुनौती : वाजपेयी जी की भतीजी है सामने

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ये खबर बड़ी खबर है. वाजपेयी जी वो शख्सियत रहे हैं जो कि आज भी पार्टी से भी बाहर उतने ही पसंद किये जाते हैं. भारत के इस महान लोकप्रिय नेता की भतीजी उतर रही हैं चुनावी मैदान में. लेकिन पार्टी भाजपा नहीं है, भाजपा की प्रबल प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस ने अटल जी की भतीजी करुणा शुक्ला को अपना प्रत्याशी बनाया है.

खबर यहां तक तो बड़ी है पर बहुत बड़ी तब हो जाती है जब हमें ये पता चलता है कि वे छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री को चुनौती देने जा रही हैं. प्रदेश चुनाव में कांग्रेस कामयाब हो या न हो लेकिन चुनाव के पहले तो इसे एक कामयाबी माना ही जायेगा. क्योंकि वाजपेयी जी की भतीजी के कांग्रेस की तरफ से चुनाव संग्राम में होने से ये सन्देश तो जाता ही है कि कांग्रेस में सभी बुरे नहीं हैं.

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री की भतीजी प्रदश के मुख्यमंत्री से दो-दो हाथ करेंगी, तो इस तरह भी यह चुनाव दिलचस्प हो जाता है. डॉक्टर रमन सिंह को करुणा शुक्ला कहाँ तक अपने व्यक्तित्व के माध्यम से चुनौती देंगी और कहाँ तक वे वाजपेयी जी की लोकप्रियता को लेकर आगे बढ़ेंगी, यह देखना भी काफी दिलचस्प होगा.

कांग्रेस ने करुणा शुक्ला को राजनांदगांव से रमन सिंह के खिलाफ उतारा है. लोग चाहे जो कहीं पर अब ये तो तय है कि राजनादगाँव का चुनाव एकतरफा नहीं रहेगा. करुणा शुक्ला के विजय का पूर्वानुमान तो नहीं किया जा सकता किन्तु इतना अवश्य कहा जा सकता है कि वे रमन सिंह को टक्कर पूरी देंगी.

टक्कर देने की दूसरी वजह ये भी है कि करुणा शुक्ला राजनीति में नवागंतुक नहीं हैं. राजनीति में उनका करियर डेढ़ दशक पुराना है. 1993 में उन्होंने अपनी पारी अपने घर की पार्टी बीजेपी से ही प्रारम्भ की थी. इसी साल वे चुनाव जीत कर विधायक भी बनीं. बाद में वे जांजगीर क्षेत्र से सांसद भी रहीं. किन्तु 2014 के चुनावों के दौरान अपनी उपेक्षा वे सहन न कर सकीं और उनका भाजपा से मोह भंग हो गया.

इसके बाद अपनी पार्टी छोड़ कर वे भाजपा के कट्टर प्रतिद्वंद्वी खेमे कांग्रेस में चली आईं. बिलासपुर से चुनाव भी लड़ा लेकिन विजयश्री का वरण न कर सकीं. इस बार वे राजनादगाँव से प्रत्याशी हैं और वो भी मुख्यमंत्री के खिलाफ. परन्तु यह भी सच है के अब हालात पहले जैसे नहीं हैं, हालात अब छत्तीसगढ़ में भी बदल चुके हैं.

(पारिजात त्रिपाठी)

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