मृत्यु के बाद भी धड़कने दो दिल को!

Share on facebook
Share on twitter
Share on google
Share on pinterest
Share on telegram
Share on whatsapp
Share on email

कुछ ख़्याल ज़हन में न जाने कब पैबस्त हो जाते हैं और क्यों हो जाते हैं इस बात का उत्तर हमारे पास नहीं होता उनमें से अंगदान के प्रति मेरा लगातार बढ़ता आकर्षण भी मेरे एहसासों के सफर का एक खूबसूरत ख़्याल है जिसने मुझे हर दिन प्रेरित किया है अंगदान के लिए..

रक्तदान की महत्ता भारतीय परिपेक्ष्य में बहुत लोग समझने लगे हैं या यूं कह लें कि आज हमारी जीवनशैली बहुत बदल गई है तो रक्त की आवश्यकता ने हमें रक्तदान की वैल्यू समझा दी है । आज ऑपरेशन के समय , डिलीवरी के समय ,दुर्घटना के बाद कब किसको रक्त की आवश्यकता पड़ जाय ये कहना मुश्किल है क्योंकि इस संभावना की गिरफ्त में शायद हम सभी के परिवार में कोई न कोई है ही ,इसलिए भी रक्तदान के लिए अब लोग बिना किसी भ्रम ,मिथक,और डर के सामने आने लगे हैं और लोगों का जीवन बचाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने लगे हैं । जैसा कि हम जानते है कि रक्त चढ़ाने के लिए उसी ग्रुप का प्रयोग किया जाता है जो ग्रुप मरीज का हो लेकिन ओ ग्रुप सभी ग्रुप को चढ़ सकता है और ए बी ग्रुप सभी से ले सकता है ।

गौर करने लायक है कि ओ ग्रुप के लोग दुनिया मे बहुत कम होते हैं और ओ ग्रुप को केवल ओ ग्रुप ही चढ़ सकता है इसलिए ये स्पेशल डोनर कहलाता है। और ओ ग्रुप स्पेशल डोनर सिर्फ रक्त के मामले में ही नहीं शरीर के सभी अंग के मामले में भी स्पेशल डोनर है । रक्तदान के प्रति तो हम जागरूक हो गए है किंतु अंगदान के प्रति आज भी हम सचेत नहीं हैं या यूं कहें कि इसका महत्व हम समझ नहीं पाए हैं। इसका महत्व तब समझ आता है जब हम खुद जीने की लालसा में इंतज़ार की उस लम्बी कतार में खड़े होते हैं जिसमें हमारे शरीर के किसी अंग जैसे आंख , किडनी , लिवर, हृदय,घुटने का रिप्लेसमेंट होंने के लिए किसी अंगदाता का इंतजार होता है। जब बचपन से ही अपनी संतान की आंख नहीं होती तो हम सोचते हैं कि किसी तरह एक आंख हो जाये तो ये अपनी ज़िंदगी बेहतर ढंग से जी ले …मुश्किलें ही हमें सीख देती हैं ।

दान और पुण्य हम भारतीयों की जीवनशैली का हिस्सा रहा है सदियों से । ऐसे में अंगदान से बड़ा दान और पुण्य क्या होगा ? ज़रा सोचकर देखिए आपका शरीर जो एक अकेले का है वो आपकी मृत्य के बाद कम से कम आठ लोगों को जीवन दे सकता हो तो इससे बेहतर लाइफ इंश्योरेंस कोई और है क्या ? मृत्यु के बाद हम जला दिए जाएंगे या दफना दिए जाएंगे ऐसे में अगर हमारे शरीर के भीतरी अंग किसी को जिंदगी देकर हमारे होने के एहसास को जिंदा रख सकें तो प्रेम का एक और अध्याय जुड़ जाएगा इस संसार में। जिस परिवार को जीवन मिलेगा हमारी वजह से वो हमारे परिवार से जुड़ाव महसूस करेगा और शायद यही हमारे परिवार के साथ भी होगा ।

एक नहीं आठ परिवार की खुशी और दुआएं हमारे परिवार के साथ होंगीं । जीवित रहते हम लाइफ इंश्योरेंस करवाते हैं जिसका लाभ हमारे परिवार को तब मिलता है जब एक्सीडेंट के कारण मृत्य हो यानी जीवित रहते ही मृत्यु की कल्पना करके उस पर कमाई का जरिया बनाते हैं हम अपने परिवार के लिए ,लेकिन चंद रुपयों के सिवा कुछ नहीं मिलता जो जीवन जीने के लिए पर्याप्त नहीं हैं । लेकिन मृत्यु के पश्चात अंगदान देकर हम खुद की नज़र में तो उठते हैं लेकिन सही मायने में आठ लोगों के जीवन का इंश्योरेंस करते हैं ।एक नज़र डालिये तो आप जानेंगे कि अंगदान की कितनी ज़रूरत है और कितना पीछे हैं हम इस मुहिम में। कितने लोगों को इंतज़ार है कि कोई ईश्वर बनकर आएगा और उनकी ज़िंदगी को रौशन कर देगा।

ये सब हो सकता कि आपको लगे कि बातें हैं लेकिन ये एक ऐसा सच है जिसे स्वीकारने की ज़रूरत है और सही मायने में जिंदादिल होने का सबसे बड़ा सबूत यही है कि हम अंगदान के प्रति अपनी धारणा को बदलें और एक क़दम आगे बढ़कर सही फैसला लें । और अपनी संतानों को अपनी अंतिम इच्छा के रूप में एक बड़ी जिम्मेदारी सौंप दें कि मृत्यु के पश्चात अंगदान की प्रक्रिया को समय से पूर्ण कर दे ताकि आपके द्वारा ली गई अंगदान की प्रतिज्ञा पूर्ण हो सके।चलते चलते एक बात और बताती चलूं कि मैंने प्रतिज्ञा कर ली है और मैं स्पेशल डोनर हूँ ।इस बात से बेहद खुश भी हूँ कि ईश्वर ने मुझे इस तरह बनाया है कि किसी के भी काम आ सकूं ।

(शालिनी सिंह)

रेडियो प्रस्तोता, आकाशवाणी, लखनऊ

ट्रेंडिंग

काम की खबरें

देश

विदेश

मनोरंजन

राजनीति