मेनका का अजब बयान : मुस्लिमों को नौकरी का लालच देकर वोट मांगे?

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इस बात में सच्चाई जितनी भी ज्यादा या कम हो, लेकिन ये बात बड़ी अजब लगती है. मेनका गाँधी ने ऐसा कहा होगा, सोचना भी ज़रा मुश्किल है.

हमेशा विवादों से अलग रहने वाली केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ज्यादातर सुर्ख़ियों से भी दूर रहती हैं. उनके जैसी धीर-गंभीर नेता ने ऐसी बात कही, ये बात ज़रा हजम नहीं होती. ज़ाहिर है मेनका गलत-बयानी नहीं गलत-प्रस्तुतीकरण की शिकार हुई हैं.

जो जानकारी प्राप्त हुई है उसके अनुसार केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने सुल्तानपुर में चुनावी रैली को संबोधन करते समय यह बयान दिया था. हालांकि जब ये समाचार मेनका गाँधी के पास पहुंचा तो उन्होंने इसका खंडन किया. उन्होंने कहा कि उनके बयान को अधूरा प्रस्तुत किया गया है.

गुरूवार को मेनका गांधी उत्तरप्रदेश के तुरब खानी गांव में एक चुनावी रैली को संबोधित कर रही थीं. इस दौरान अपने भाषण में उन्होंने कहा कि यदि मुस्लिम मुझे वोट नहीं देते हैं तो मैं उन्हें नौकरी नहीं दे सकूंगी. मुझे यह बिल्कुल अच्छा नहीं लगेगा कि मैं मुस्लिमों के सहयोग के बिना यह चुनाव जीत लूं.

मेनका गांधी ने अपनी बात समझाने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि, ”ऐसा होने पर मेरी भावनाओं को ठेस पहुंचती है। फिर यदि मुस्लिम मेरे पास आकर काम मांगते हैं तो मैं इस बारे में सोचूंगी। इससे क्या फर्क पड़ता है? दिल खट्टा हो जाएगा। कुल मिलाकर यह नौकरी एक तरह की डील है।” मेनका गाँधी के अनुसार मुस्लिम्स के साथ उनका संबंध आपसी तालमेल पर आधारित है.

(इन्दिरा राय)

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