मोदी जी, अब वानप्रस्थ ले लो

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वैसे देखा जाय तो मोदी को झोला उठा निकल ही लेना चाहिए..

नरेन्द्र मोदी नाम के इस आदमी को लगता है कि बहुत बड़ी गलतफहमी है। कह रहा था कि 22 करोड़ परिवार को कुछ न कुछ लाभ दिया है। अब मान लो हर परिवार से कम से कम 2 वोट भी हों तो कुल 44 करोड़ वोट बनते हैं। पड़ेंगे? घण्टा।

ऊपर से इस देश में ऐसे फालतू काम…

स्वच्छ भारत- किसे पड़ी है इसकी? गुटखा खा कर के साफ सी जगह में थूकने वाला समाज है ये।

टॉयलेट- यहां लोग पटरी पर खुले में जाने के शौकीन हैं उनको टॉयलेट

बढ़िया रेल और यातायात- देखा नहीं कि लोग सीट फाड़ और स्क्रीन खरोंचकर चल देते हैं।

स्वास्थ्य सुविधा- देखा नहीं कि फ्री में 1 लाख से ऊपर का इलाज मिलने पर भी अल्पसंख्यक धार्मिक नेता साफ मुकर गया बीजेपी को वोट देने में।

उज्जवला योजना- जिन्हें ये मूर्ख बनाया जा सकता है कि पहले सिलेंडर 400 का और अब 900 का मिल रहा है, उन्हें सिलेंडर?

बैंक एकाउंट- यहां तो आधे मूर्खों ने इस लिए खाते खोल दिये होंगे कि 15 लाख आने वाले हैं।

नोटबन्दी- इस तरह की बौद्धिक नीति आरक्षण में पास होने वाले देश में नहीं होते।

GST- जिस देश को करचोरी की आदत हों वहां GST?

क्या क्या बताऊँ कि क्या क्या मूर्खता कर दी तुमने मोदी..

यहां चुनाव जीतने को जातियां ढूंढनी होती है। हर राज्य में हर समुदाय को खैरात देनी होती हैं। फ्री साड़ियां, फ्री अनाज, फ्री बिजली पानी, फ्री का कर्ज और पैसा देकर वोट खरीदना होता है वो भी “गरीबी हटाओ” का नारा देकर.. हटेगी कभी नहीं वो अलग बात है।

तुम्हारा तो नारा भी अजीब ” सबका साथ, सबका विकास”। इसमें गरीब शब्द ही नहीं है तो वर्क कैसे करेगा??

दुनिया भले ही भारत को अब एक अलग नजर से देखती है। विकास भी इस तरह हुआ कि 9वें नम्बर से 6ठे नम्बर की और बहुत जल्द 5वें नम्बर की अर्थव्यवस्था बनने वाले हैं।

कूटनीतिक कामयाबियां झंडे गाड़ रही है। सेना मजबूत हुई है। सुरक्षा मजबूत हुई है। लेकिन ये सब पर वोट किसी और दुनिया के भारत में पड़ते होंगे। यहां नहीं।

अभी भी चेत जाओ और राज करना है तो इस देश को वो दो जो लायक ये हैं। वरना झोला पकड़ लो और निकल लो।

“इंडिया शाइनिंग” तो चल नहीं पाया यहां “न्यू इंडिया” क्या चलेगा?

ये कोई फ्रस्ट्रेशन में लिखी पोस्ट नहीं है। ये हकीकत है एक्चुअल इंडिया की।

अभी भी मौका है। मत चूको मोदी। 70 साल से “गुलाम बनाये हुए लोगो को” की पार्टी को हराना है तो वैसे ही करना पड़ेगा जैसा वो करते हैं।

(साभार)

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