राजनीतिक तलाक-हलाला 377 की वो यादें

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“अगर समर्थन वापस लिया तो बहुत जूते पड़ेंगे!”

1996 में मंत्रिपद की शपथ लेते ही उपरोक्त धमकी उस संयुक्त मोर्चा सरकार के गृहमंत्री इंद्रजीत गुप्त ने उस कांग्रेस को दी थी जिसके समर्थन से सरकार बनी और चल रही थी।

सत्ता के लिए कांग्रेस की टपकती लार और लपलपाती जीभ की तरफ इशारा करते हुए उसी संयुक्त मोर्चा सरकार का प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा लोकसभा के भीतर खड़े होकर कांग्रेस के मुखिया सीताराम केसरी पर यह कहते हुए व्यंग्य बाण छोड़ा करते थे कि “बुढ़वा जल्दी में हैं” (The Old Man is in Hurry).

परिणामस्वरूप राजनीतिक तलाक और हलाला के हादसे सहते हुए डेढ़ वर्ष में दो प्रधानमंत्री बनाने के बाद संयुक्त मोर्चा की वह सरकार 72 हूरों के पास चली गयी थी।

23 साल पहले की उस मोर्चा सरकार की याद आजकल इसलिए आ रही है क्योंकि राजनीतिक नज़ारा बिल्कुल वही है जो 23 साल पहले था।

एक-दूसरे का गिरेबान पकड़कर जो पार्टियाँ एक-दूसरे के कारनामों और कान्डों का पुण्य स्मरण किया करती थीं, वो अचानक एक-दूसरे से लिपट-चिपट कर एक-दूसरे के साथ राजनीतिक 377 का प्रैक्टिकल खुलेआम करने लगे थे।

उस समय भी उन पार्टियों के आकाओं का दावा यही था कि किसी भी कीमत पर अटल जी को प्रधानमंत्री बनने से रोकना है।

नतीजा यह निकला था कि राजनीतिक तलाक हलाला 377 की नौटंकी के जोकरों को जनता ने जब सत्ता के मंच से खदेड़ा था तो वो देश को भिखारी हालत में 3.1% GDP की विरासत का खाली कटोरा थमाकर गए थे।

(सतीश चन्द्र मिश्र)

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