राजब्बर बोले मोदी की माँ पर : संस्कार नाम की चीज़ है कि नहीं?

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शर्म का भी धर्म है पर शर्म है कि उन्हें नहीं आती..

कांग्रेस के लिए संस्कार थोड़ा मुश्किल काम है. चरित्र नाम की चीज़ की परिभाषा भी समझना मुश्किल है कोंग्रेसियों के लिए. न किसी ने समझाया न किसी ने समझा.

अब पीएम मोदी की माता जी ने किसी का क्या बिगड़ा है? राजबब्बर बच्चे नहीं हैं न ही मानसिक रोगी हैं न ही मूर्ख हैं. अब बचे धूर्त, तो वो माने जा सकते हैं. राजबब्बर ने पीएम मोदी पर गुस्सा निकालने के लिए उनकी माता जी को निशाना बनाया.

सभ्यता या सस्कृति दोनों नहीं है तो समझ या कॉमन सेन्स नाम की एक चिड़िया होती है. क्या वो भी नहीं है? मज़े की बात इस कांग्रेस में बकवास करने वालों की कोई कमीं नहीं है और बकवास संस्कृति का बाकायदा विकास किया गया है कांग्रेस में. चाहे आप बात करें बच्चों की या बड़ों की, इस संस्कृति की शिक्षा खूब मिल रही है कांग्रेसियों को घर पर ही.

बच्चों की बात करें तो बच्चे जो अभी अभी पार्टी में बड़े हुए हैं – राहुल गाँधी जी, कोई जवाब नहीं आपका और आपकी जुबान का. उनके पहले उनके मां जी दिग्विजय सिंह, चाचा जी शशि थरूर, नाना जी मणिशंकर अय्यर, चचेरे भैया राजबब्बर, कितने ही लोग हैं जो राहुल के लिए प्रेरणा बने हुए हैं. इसलिए आने वाले दिनों में राहुल गाँधी भारत के सबसे बड़े बकता बनने जा रहे हैं जो अपने वरिष्ठ नेताओं की छत्रछाया में पल कर आने वाले दिनों में ऐसा बोलने वाले हैं कि साड़ी दुनिया सुनेगी उनको और जानेगी उनके बारे में.

पाँच राज्यों के विधानसभा चुनावों के मौसम में एक चुनावी सभा में राजबब्बर ने मारा है ये तीर. आज भी अपने आप को हीरो समझने वाले राजबब्बर को शायद नहीं पता है कि वे हीरो तो छोड़िये, राजनीति के मंच पर कॉमेडियन भी ढंग के नहीं हैं. एक और श्रेणी होती है भांड नाम की, शायद उस दिशा में ही प्रयास है उनका.

कहने को वरिष्ठ हो गए कांग्रेस के ये नेता जो कि बलात्कार वाली पहली फिल्म से चर्चित हुए थे, अब इस तरह से चर्चा बटोरना चाहते हैं. राज बब्बर अपनी एक चुनावी भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मां तक पहुँच गए और अपनी जबान को मनमाने तरीके से चलाया..और इस तरह अपने संस्कार और अपनी पार्टी कांग्रेस के चरित्र का परिचय दिया.

राज बब्बर ने कहा कि जब वो (पीएम मोदी) कहते थे कि डॉलर के सामने रुपया इतना गिर गया कि उस वक्त के पीएम की उमर बता कर के कहते थे कि उनकी उम्र के करीब जा रहा रहा है. आज रुपया आपकी पूजनीया माताजी की उमर के करीब नीचे गिरना शुरू हो गया है.

गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपाणी ने इस पर कठोर प्रतिकिया दी है, उन्होंने कहा कि इस तरह की टिप्पणियां कर कांग्रेस अपने स्तर से नीचे गिर रही है, राजनीति में गरिमा बनाए रखनी चाहिए, मैं इसकी निंदा करता हूं। रुपये और डॉलर के अंतर को मोदी जी की मां की उम्र के साथ तुलना करना राज बब्बर की मानसिकता का परिचायक है. राजबब्बर को इस बदतमीजी के लिए क्षमा मांगनी चाहिए.

यही वो राजबब्बर हैं जिन्होंने नक्सलियों को क्रांतिकारी कहा था. अगर ऐसा है तो सुरक्षा बलों के सैकड़ों जवान जो इन नक्सलियों के हाथों मारे गए हैं, वे तो देशद्रोही हैं !!!

(पारिजात त्रिपाठी)