कांग्रेस के चुनावी धमाके ने चौंकाया भाजपा को.. मगर राहुल का ‘NYAY’ बूमरैंग हो सकता है कांग्रेस पर

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NYAY गरीबों के साथ न्याय करे या नहीं, देश का मध्यम वर्ग इसे अपने प्रति ‘अन्याय’ मान कर सीधे तौर पर नकारेगा..

इसे जुमलेबाजी तो नहीं कहेंगे लेकिन जो ट्रेन्ड आजकल चुनावों में देखा जा रहा है उसके मद्देनजर ये एक बड़ा चुग्गा फेंका गया है वोटरों को फंसाने के लिये. वजह साफ है. जो लोग इतिहास जानते होंगे वो जानते हैं कि गरीबी इन योजनाओं से खत्म नहीं होती, ये योजनायें खुद ही चलते चलते खत्म हो जाती हैं.

ऐसा नहीं है कि भारतीय चुनावों के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है. वर्ष 2016-17 में हुए आर्थिक सर्वेक्षण के समय पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन ने पहली बार इस तरह की एक योजना पेश की थी जिसे यूबीआई या कहें यूनिवर्सल बेसिक इनकम के नाम से जाना गया था. तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव भी ऐसी थोड़ी बदली हुई योजना लाये और पिछले चुनावों में उसके दम पर जीते भी. उन्होंने प्रदेश के किसानों को प्रति एकड़ आठ हज़ार रुपये प्रति वर्ष की दर पर खेती की लागत का पैसा बांटा था जिससे लगभग 5.8 मिलियन भूमिहीन किसानों को फायदा पहुंचा था. बीजेपी ने भी किसानों का दिल जीतने के लिए एक नई किसम की यूबीआई तैयार की और उसे पीएम-किसान योजना के नाम से अंतरिम बजट में भी सम्मिलित किया. इस योजना से दो हेक्टेयर तक खेती योग्य भूमि वाले किसान परिवारों को छह हज़ार रुपये मिलते हैं. लक्षित किसानों के बैंक खातों में इसके माध्यम से सीधे दो हज़ार रुपये की तीन किश्तें सरकार डालती है. पीएम किसान योजना से लगभग बारह करोड़ छोटे और सीमांत किसान परिवारों को फायदा पहुँचने की उम्मीद है.

कांग्रेस ने अपनी ताजातरीन योजना जो इस चुनाव के मौके पर पेश की है, उसको न्यूनतम आय गारंटी योजना, (NYAY) का नाम दिया है. पर क्या कोई भी वित्त विशेषज्ञ इस बात की गारंटी दे सकता है कि जिन लोगों तक इस योजना को पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है, क्या इसका फायदा वास्तव में उन तक पहुंचेगा? कांग्रेस ने कहा है कि इस योजना से गरीबों में भी सबसे ज्यादा गरीबों को फायदा मिलेगा. क्या वास्तव में ऐसा हो पायेगा?

कांग्रेस के युवा अध्यक्ष राहुल गांधी ने तीन दिन पहले इस घोषणा के माध्यम से सनसनी पैदा कर दी थी. 25 मार्च को उन्होंने राजधानी में कांग्रेस कार्यसमिति में विचार-विमर्श के उपरान्त बाहर आ कर प्रेस से बात की और कहा कि वे देश के गरीबों के साथ ‘न्याय’ करना चाहते हैं. इस तरह हुई NYAY की ये घोषणा जिसने भाजपा को चौंका दिया.

ऐसा लगा कि कांग्रेस हवा में तीर नहीं चला रही है. राहुल आंकड़े अपने साथ ले कर आये थे. उन्होंने बताया कि 20 फीसदी गरीब परिवार इस योजना के माध्यम से लाभान्वित होंगे. यह योजना देश के लगभग पांच करोड़ परिवारों को फायदा देगी. और इस तरह देखें तो लगभग 25 करोड़ लोग इस योजना का लाभ उठायेंगे.

जनता के मुह में फ्री का खून लगाने की ये नई धमाकेदार जुगत है. कांग्रेस ने ऐलान कर दिया है कि अगर जनता ने उनकी सरकार चुनी तो सरकार गरीबी का कामतमाम कर देगी.

कांग्रेस ने अपने सबसे बड़े चुनावी बम को फेंक कर ये वादा किया कि कांग्रेस सरकार देश के सबसे ज्यादा गरीब परिवारों के लिये प्रतिमाह बारह हजार रुपये की आय सुनिश्चित करेगी. राहुल ने कहा कि यदि किसी परिवार की आय इससे कम है तो आय के इस अन्तर को सरकार कम करेगी अर्थात बारह हजार पूरा करने के लिये जितनी रकम जरूरी होगी, वह सरकार के द्वारा उनके खाते में डाली जायेगी.

क्या यह एक व्यावहारिक योजना है? क्या वास्तव में इससे निर्धनता दूर हो जायेगी? क्या इससे लोगों में बेरोजगार बैठने की आदत नहीं डल जायेगी? क्या बारह हजार किसी भी परिवार के उचित जीवन-यापन हेतु पर्याप्त हैं? सबसे बड़ी बात ये है कि ऐसे परिवारों की पहचान आप कैसे करेंगे?– ये कुछ ऐसे सवाल हैं जो न राहुल जी से पूछे गये और न ही इनके पूछे जाने पर राहुल इनका जवाब दे सकेंगे.

साफतौर पर यह नये किस्म का सामाजिक विभाजन है. धर्म, जाति के बाद अब सीधे ही समाज के बीच आर्थिक लड़ाई पैदा की जा रही है. मध्यम वर्ग इस तरह की किसी भी योजना को समर्थन नहीं दैने वाला है. राहुल की यह घोषणा कांग्रेस को वैसे ही बूमरैंग हो सकती है जैसे दलितों को खुश करने के लिये भाजपा ने लगभग साल भर पहले सवर्ण-विरोधी कानून पर मुहर लगा कर चार राज्यों के विधानसभा चुनावों में अपने ऊपर बूमरैंग झेला था.

ये पब्लिक है, सब जानती है. मिडिल क्लास की पब्लिक इस देश में चुनावी तौर पर निर्णायक शक्ति है और उसको पता है ये लॉलीपॉप आप उनकी जेब मार कर गरीबों में बाँटने वाले हैं..

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