वर्मा पर सुप्रीम कोर्ट की अवमानना का केस चलना चाहिये !!

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अलोक वर्मा CBI से बर्खास्त किया गया..वर्मा पर सुप्रीम कोर्ट की अवमानना का केस चलाया जाना चाहिये

मंगलवार 8 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने अलोक वर्मा को CBI डायरेक्टर की कुर्सी पर बिठा दिया था मगर एक तलवार भी उसकी गर्दन पर लटका दी थी कि उनके खिलाफ कार्रवाई  का फैसला चयन समिति करेगी जिसकी मीटिंग एक हफ्ते में होगी –अदालत ने ये भी आदेश दिया कि वर्मा कोई नीतिगत फैसले नहीं करेंगे.

मैंने उस दिन शंका जाहिर की थी कि चीफ जस्टिस चयन समितिके सदस्य हैं और जब उन्होंने वर्मा को पद पर बिठाने का फैसला दिया तो वो उसके खिलाफ समिति में कैसे फैसला देंगे? – गोगोई साहब उस समिति में नहीं गए और जस्टिस एके सीकरी को उसमे अपना प्रतिनिधि बना कर भेजा.

प्रधानमंत्री मोदी के निवास पर कल यानि बुधवार देर शाम को ही चयन समिति की बैठक हो गई जिसमे खड़गे भी शामिल हुए जस्टिस सीकरी के अलावा –और खड़गे ने वर्मा के खिलाफ कोई 
फैसला न हो, इसके लिए पूरा जोर लगा दिया — कुछ दस्तावेज मांग लिए और वर्मा को समिति के सामने अपना पक्ष रखने की अनुमति देने की मांग की.

मगर चयन समिति के सामने CVC की रिपोर्ट, जिसमे वर्मा को भ्रष्टाचार का दोषी पाया गया, वर्मा को बर्खास्त करने का कारण बनी – पीएम और जस्टिस सीकरी ने बर्खास्त करने के हक़ में फैसला किया और खड़गे ने उसे बचाने के लिए – कांग्रेस के कुकर्मों में साथ थे अलोक वर्मा – इसलिए उनको बचाने की जिम्मेदारी खड़गे जी निभा रहे थे.

महा-चतुर अलोक वर्मा ने कल ही CBI ऑफिस में ड्यूटी सम्हालते ही अंतरिम CBI डायरेक्टर नागेश्वर राव के द्वारा अपने चहेतों के किये हुए सभी ट्रांसफर रद्द कर दिए और उन सब को वापस अपनी जगह पर आने के आदेश पारित कर दिए – अलोक वर्मा का ये कार्य सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का सरासरस उल्लंघन था जिसके लिए वर्मा पर अदालत की अवमानना का केस चलना चाहिए.

अलोक वर्मा का रिटायरमेंट 31 जनवरी को होना है और तब के लिए उनको DG Fire Services तैनात किया गया है –लेकिन, चूँकि CVC की रिपोर्ट में वर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप सिद्ध पाए गए हैं, जल्दी ही, उनके लिए भी तिहाड़ जेल इंतज़ार करेगी – और तब शोर मचेगा –मोदी  बदले की भावना से काम कर रहे हैं –यानि भ्रष्टाचार और चोरबाज़ारी करें वर्मा जी और सरकार कोई कार्रवाई भी न करे.

सबसे बड़ा झटका तो राहुल गाँधी को लगा है -परसों जब वर्मा को कुर्सी पर बिठाया गया तो उन्होंने कहा –“कुछ तो न्याय हुआ” और उम्मीद जगी कि अब वर्मा राफेल की जांच बैठा देंगे.

लेकिन आज राहुल को लग रहा होगा –न्याय नहीं अन्याय हो गया –और इस बार अन्याय किया खुद सुप्रीम कोर्ट ने क्यूंकि उसके ही आदेशों पर चयन समिति की बैठक हुई और चीफ जस्टिस के प्रतिनिधि जस्टिस सीकरी भी वर्मा की बर्खास्त करने के फैसले में शामिल हैं – जिसका मतलब है ये फैसला जस्टिस गोगोई का है.

आज यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी और प्रशांत भूषण भी कहीं ग़म गलत कर रहे होंगे और सर पीट रहे होंगे !!


(सुभाष चन्द्र)


—————————————————————————————————————–(न्यूज़ इंडिया ग्लोबल पर प्रस्तुत प्रत्येक विचार उसके प्रस्तुतकर्ता का है और इस मंच पर लिखे गए प्रत्येक लेख का उत्तरदायित्व मात्र उसके लेखक का है. मंच हमारा है किन्तु विचार सबकेहैं.)                                                                                                                               ——————————————————————————————————————