वीएचपी के आलोक कुमार जी की समझदारी

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अब सफाई देते फिरें VHP कार्यकारी अध्यक्ष अलोक कुमार जी, जुबान तो फिसल गई जो कुछ भी नुकसान कर सकती है..

जब 2019 का चुनाव सर पर खड़ा है और सारा विपक्ष नरेंद्र मोदी को हटाने के लिए तरह तरह के “गठबंधन” बना रहा है –ऐसे में मोदी जी के लिए समस्या खड़ी करके VHP के कार्यकारी अध्यक्ष अलोक कुमार जी ने कोई समझदारी का परिचय नहीं दिया —

अब सफाई देते फिरें अलोक कुमार जी,जुबान तो फिसल गई उनकी जो नुकसान कर सकती है -कांग्रेस उनके बयान का दुरूपयोग किसी तरह भी कर सकती है –

मैं चुनाव के समय किसी तरह इस विवाद में उलझना नहीं चाहता था मगर आलोक जी के बयान से मैं स्तब्ध रह गया –वैसे VHP, बजरंग दल और स्वदेशी जागरण मंच ने अटल जी सरकार को हटाने में सबसे बड़ा योगदान दिया था जिसका परिणाम, देश को 10 साल मनमोहन सिंह की रिमोट से
चलने वाली सरकार झेलनी पड़ी —

इन तीनो संगठनों ने अटल जी को कितना परेशान किया इस पर मुझसे कोई बहस ना करे –सच तो ये है उस वक्त के संघ सरसंघचालक के एस सुदर्शन ने इन पर कोई लगाम लगाने की कोशिश नहीं की -और नतीजा देश ने भुगता –

अब VHP अगर फिर वो ही गलती दोहराती है तो समझ लीजिये कांग्रेस की सरकार स्थाई रूप से झेलते हुए देश को एक नहीं कई हिस्सों में खंडित होता देखना पड़ेगा-अलोक कुमार जी सफाई दे रहे हैं मगर उनकी जुबान तो फिसली थी –मैं बताता हूँ क्या कहा उन्होंने —

“उन्होंने कहा कि अगर सभी दल राम मंदिर के निमार्ण को अपने चुनाव घोषणापत्र में शामिल करते हैं तो हम उन्हें समर्थन दे सकते हैं –अलोक जी से पूछा गया कि अगर कांग्रेस ऐसा करे तो –इस पर अलोक जी ने कहा, उनके लिए भी फिर विचार हो सकता है ”

इसके अलावा अलोक जी ने ये भी कहा कि कांग्रेस स्वयंसेवकों को कांग्रेस पार्टी में शामिल होने पर से प्रतिबन्ध हटाए –राहुल गाँधी के लिए कहा कि केवल जनेऊ पहनने से कुछ नहीं होता उन्हें और भी कुछ करना चाहिए.

क्या संघ ने अलोक जी को अनुमति दी कि वो उसके स्वयंसेवकों के कांग्रेस में शामिल होने पर से प्रतिबन्ध हटाने के लिए कांग्रेस से कहें -या स्वयंसेवक कांग्रेस में जाने के लिए पगलाये जा रहे हैं ?

VHP को आखिर सभी दलों को मंदिर निर्माण को घोषणापत्र में शामिल करने की अपील करने की क्या जरूरत थी , क्या VHP अपील कर देगा और वो मान लेंगे -और क्या अलोक जी को VHP की मैनेजिंग समिति या संतो के मार्ग दर्शक मंडल ने ऐसे बयान देने के लिए अधिकृत किया –मुझे तो प्रयागराज से संत समाज की भाषा पर अफ़सोस हुआ कि अगर मंदिर बनाने की घोषणा नहीं हुई तो भाजपा को वोट नहीं देंगे.

अब ऐसे धमकी दे कर संत समाज और VHP, क्या कांग्रेस और विपक्षी दलों से मंदिर निर्माण करवा लेंगे –भाजपा के सिवाय कभी भी किसी और दल ने मंदिर निर्माण के पक्ष में बयान दिया है जो आज उम्मीद लगा बैठे हो –यहाँ तक भाजपा के साथी भी कभी मंदिर के लिए कुछ नहीं बोले –अकाली दल भी खामोश रहता है, नितीश तो है ही सेक्युलर –एक शिव सेना बोलती थी मगर उसका मकसद भी अब केवल मोदी विरोध रह गया है.

अलोक कुमार जी को एक बात स्पष्ट कह देना चाहता हूँ –राम मंदिर के दो ही अपराधी हैं –एक सुप्रीम कोर्ट और दूसरा कांग्रेस (समूचे विपक्ष समेत) – VHP, संत समाज और मीडिया सुप्रीम कोर्ट से कभी कुछ नहीं कहना चाहता और कांग्रेस से आप उम्मीद लगा रहे हो –आप बस सरकार के पीछे पड़े हो –

आलोक जी कानून समझते हैं –सरकार कानून लाएगी तो उसे पास भी कराना होगा और वो हो नहीं सकता जब तक कांग्रेस राज्यसभा में बहुमत में है –फिर नरेंद्र मोदी पर भरोसा करो जब वो कहते है कोर्ट को फैसला करने दो, फिर जो हमें करना होगा, वो हम सोचेंगे -मगर कांग्रेस के आगे हाथ फैलाना उचित नहीं है –

(सुभाष चन्द्र)
20/01/2019

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