शिवसेना को न खुदा ही मिला न विसाले सनम

Share on facebook
Share on twitter
Share on google
Share on pinterest
Share on telegram
Share on whatsapp
Share on email

शिव सेना ने अपनी “पिच” खुद ही खोद ली, अब गाओ “अता माजा सटकली” और कांग्रेस राकांपा के साथ बैठ कर घुईयाँ छीलो !

महाराष्ट्र में शिव सेना ने अपनी किस्मत खुद ही बिगाड़ ली, शरद पवार और कांग्रेस के दिखाए सब्जबाग के चक्कर में राजग छोड़ा, मोदी सरकार को छोड़ा, हिंदुत्व को छोड़ा और राम का नाम भी छोड़ा और फिर न खुदा ही मिला न विसाले सनम..

खिसिया रही है शिव सेना और उद्धव ठाकरे, जो अब राज्यपाल को राष्ट्रपति शासन के लिए दोष दे रहे हैं –सबसे बड़ी गलती तो उद्धव ने संजय राउत को आगे करके की जिसने शिव सेना और भाजपा के रिश्तों में शरद पवार के भरोसे स्थाई दरार डाल दी –संजय राउत को कंट्रोल किया होता तो आज शायद ये नौबत ना आती!

शिव सेना, कांग्रेस और राकांपा किस बात के लिए आपत्ति कर रहे हैं जबकि राज्यपाल भगत सिंह कोशियारी ने बड़ी होशियारी से अपने कर्तव्य का निर्वहन किया है –उन्होंने सरकार बनाने के लिए सबको बराबर मौका दिया –कैसे, देखते हैं :–

1 –9 नवम्बर को शाम को भाजपा को सरकार बनाने का न्योता दिया लेकिन भाजपा ने अगले दिन 10 नवम्बर को सरकार बनाने से मना कर दिया –और कोई समय बढ़ाने के लिए मांग नहीं की –

2 –10 नवम्बर शाम को 7.30 बजे शिव सेना के नेता जब उनसे मिलने गए तो उन्हें भी 24 घंटे में सरकार बनाने के लिए कहा -लेकिन शिव सेना को 11 नवम्बर को पूरे दिन में न शरद पवार ने समर्थन पत्र दिया और न कांग्रेस ने, जिनके बूते उद्धव और संजय राउत अति-आत्मविश्वास से पीड़ित थे –और शिव सेना नियत समय में सरकार बनाने में फेल हो गई -उन्होंने और समय माँगा मगर गवर्नर ने नहीं दिया.

3 –11 नवम्बर को राकांपा के नेता गवर्नर को मिले और उन्हें भी उन्होंने 24 घंटे यानि आज रात 8.30 बजे तक सरकार बनाने के लिए न्योता दिया.

4 –लेकिन राकांपा कुछ ज्यादा ही समझदार थी, उसने रात का इंतज़ार ही नहीं किया और दिन में राज्यपाल को पत्र लिख कर 48 घंटे का समय और मांग लिया –ये समय भाजपा ने नहीं माँगा था लेकिन शिव सेना ने माँगा था जो मना कर दिया था गवर्नर ने.

5 –इसलिए राकांपा को भी समय नहीं दिया गया और उनके समय सीमा 8.30 बजे की 48 घंटे का समय मांगते ही स्वतः ही समाप्त हो गई.

लिहाजा राज्यपाल के स्थाई सरकार बनाने के सभी प्रयास विफल हो गए और वो राष्ट्रपति शासन की अनुशंसा करने के लिए स्वतंत्र थे और उनका ये कदम पूरी तरह न्यायोचित भी है.

राज्यपाल के निष्पक्ष व्यवहार को देखते हुए साबित हुआ कि ये सभी दल सरकार बनाने में नाकाम रहे –भाजपा को तो कोई मलाल नहीं है कि उन्हें समर्थन नहीं मिला मगर शिव सेना खुद अपने ही बिछाये जाल में फंस गई और उसने राजनीति की अपनी ही पिच खुद खोद ली.

संजय राउत को अहंकार का मतलब समझ आ गया होगा –संजय ने मोदी को अहंकारी कहा था लेकिन खुद इसी अहंकार में पगला कर शरद पवार और कांग्रेस के सहारे भाजपा छोड़ दी -अब दोनों ने समर्थन नहीं दिया.अब शिव सेना कांग्रेस और राकांपा के नेता करें माथे पर हाथ रख कर अंताक्षरी खेलें और बैठ कर घुइयाँ छीलेंं.

शिव सेना से सुप्रीम कोर्ट यही पूछेगा कि जब आपको सरकार बनाने का न्योता मिला तो क्यों नहीं बनाई –और आखिरी मौका तो राकांपा के पास था –आप यहाँ किस हैसियत से आये हो ?

उद्धव और संजय राउत ने कोशिश की साबित करने की –पानी खून से ज्यादा गाढ़ा होता है मगर फेल हो गए क्यूंकि ये हो ही नहीं सकता –उनका हरि और हिंदुत्व को छोड़ ‘हरी’-सेकुलर पार्टी पर भरोसा करना सबसे बड़ी भूल सिद्ध हुई है.

ट्रेंडिंग

काम की खबरें

देश

विदेश

मनोरंजन

राजनीति