“सर, यू आर द इंडियन डैनी शापिरा!”

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आज यदि भारत के लापता पायलट मेरे सम्मुख होते तो उन्हें गले लगाकर कहता – “सर, यू आर द इंडियन डैनी शापिरा!”

कल से पहले, मुझे लगता था कि इजराइली पायलट “डैनी” ही इस दुनिया के बेहतरीन पायलट हैं. इनके जितना क़द किसी का नहीं.

लेकिन मैं गलत था, और इसका अफ़सोस है मुझे!

आज पाकिस्तानी अखबार “द डॉन” की स्टोरी पढ़ी तो जाना कि लापता भारतीय पायलट इनसे कहीं भी कम नहीं.

“डैनी शापिरा”, यानी कि सबसे पहला वेस्टर्न पायलट जिसके हाथ में “मिग-ट्वेंटीवन” आया!
लापता भारतीय पायलट ने “मिग-ट्वेंटीवन” से “फॉल्कन-सिक्सटीन” गिराया है. ये “मिग-ट्वेंटीवन” द्वारा किया गया, सबसे हालिया चमत्कार है.

वहीं बीती सदी में “डैनी शापिरा” ने “मिग-ट्वेंटीवन” से पहला चमत्कार किया था.
ये उनदिनों की बात है जब समूचे वेस्टर्न वर्ल्ड में “मिग-ट्वेंटीवन” की दीवानगी चरम पर थी. बस एक “मिग-ट्वेंटीवन”, सिर्फ एक, कैसे प्राप्त हो — ये योजनाएं समूचा वेस्टर्न वर्ल्ड बना रहा था. क्या अमेरिका, क्या यूरोप और क्या इजराइल. सबकी एक ही चाहत थी, किसी भी कीमत पर एक “मिग-ट्वेंटीवन” हाथ लगे तो जानें कि ऐसा क्या है उस जेट में!

“मिग-ट्वेंटीवन” से सर्वाधिक खतरा “इजराइल” को था. समूचे मध्य एशिया के मुस्लिम राष्ट्रों ने सोवियत से “मिग-ट्वेंटीवन” आयत कर “इजराइल” को घेर-सा लिया था.

इजराइली छटपटाहट इतनी बढ़ी कि उन्होंने खुलेआम घोषणा कर दी :
“समूची दुनिया से जो पायलट मिग-ट्वेंटीवन को लेकर इजराइल में उतारेगा, उसे दस लाख अमेरिकी डॉलर दिए जाएंगे. उसे और उसके परिवार को हमेशा के लिए इजराइल में सुरक्षित किया जाएगा.”

इस बयान ने “मिग-ट्वेंटीवन” के तमाम उपभोक्ता देशों और स्वयं सोवियत के दिलों में हलचल मचा दी थी. हर देश अपने पायलट्स को संदेह की नज़रों से देखने लगा था.

सोवियत किसी भी स्थिति में वेस्टर्न वर्ल्ड या उसके सहयोगियों से “मिग-ट्वेंटीवन” की टेक्नोलॉजी शेयर नहीं करना चाहता था.

लेकिन “मोसाद” के डायरेक्टर बदले और उन्होंने मात्र तीन बरस में ये कर दिखाया.
सन् छियासठ की एक रोज़, सोलह अगस्त को “मिग-ट्वेंटीवन” इजराइल के हत्ज़ोर एयरबेस पर खड़ा था.

इतिहास में पहली बार किसी एक राष्ट्र ने बिना किसी युद्ध के दूसरे राष्ट्र का लड़ाकू विमान चुराया था. इस ऑपरेशन को किस तरह अंजाम दिया गया, ये कहानी कभी और. फ़िलहाल, इस “मिग-ट्वेंटीवन” और “डैनी शापिरा” की बात करते हैं

इजराइल में “मिग-ट्वेंटीवन” उतारने के पश्चात् पायलट “मुनीर” ने पूछा : “क्या इसे भविष्य में मुझे ही उड़ाना है?”

वे “इज़र वाइजमैन” से मुखातिब थे. वे उनदिनों इजराइली वायुसेना के प्रमुख हुआ करते थे. कालान्तर में वे इजराइल के राष्ट्रपति भी बने.

“वाइजमैन” बोले : “नहीं मुनीर, ये जेट हमारे बेस्ट पायलट मिस्टर डैनी शापिरा उड़ाएंगे, आप उन्हें सिखा दीजिये.”

इसी के साथ, “डैनी” की आवाज़ आई : “मे आई कमइन सर?”

ये पहले से ही निश्चित था कि जेट इजराइल में कब उतरेगा. अतः ये भी निश्चित किया जा चुका था कि इसे इजराइल के लिए कौन उड़ाएगा.

मिलिट्री कमांडर “अलुफ होड” ने “डैनी” को बुला कर कहा था : “डैनी, तुम वेस्टर्न वर्ल्ड के पहले पायलट हो जो मिग-ट्वेंटीवन उड़ाने जा रहे हो. जितना जल्दी हो सके, सीख लो.”

“वाइजमैन” ने “डैनी” और “मुनीर” की मुलाकात करवाई. और एक बेहतरीन दिन ख़त्म हो गया.
अगले रोज़, “डैनी” और “मुनीर” के बीच “मिग-ट्वेंटीवन” खड़ा था. जेट के सभी स्विच और लेबल्स रशियन और अरेबिक भाषा में लिखे थे.

लेकिन “डैनी” तो “डैनी” थे. “मिग-ट्वेंटीवन” से मात्र एक घंटे की मुलाकात के बाद “मुनीर” से बोले : “मुनीर, अब तुम हट जाओ, मुझे ये जेट उड़ाना आ गया है.”

“मुनीर” हँसने लगे और बोले, सर, इसका महीनों का कोर्स होता है. अभी आपको बस एक घंटा हुआ है. इसे उड़ाना आपके लिए मृत्यु का पैगाम होगा.

लेकिन “डैनी” नहीं माने!

“मिग-ट्वेंटीवन” टीनशेड से बाहर निकाला गया. ज्यों ही ग्लास खुला और “डैनी” ने अपना पाँव डाला, पीछे से “वाइजमैन” का स्वर सुनाई दिया :

“डैनी, किसी भी तरह की ट्रिक्स नहीं, ये जेट मुझे सुरक्षित जमीं पर चाहिए!”

“यस-सर” की आवाज़ के साथ ग्लास बंद हुआ और “डैनी” उड़ गए!

जब “डैनी” वापस आये तो “मुनीर” ने उनको रनवे में ही पकड़ लिया. गले लगकर, भावुक हो गए और बोले, यू आर द बेस्ट पायलट, नो वन इन अरब वर्ल्ड टू फाइट विद यू.”

और इसी “डैनी” ने मात्र कुछ माहों की कुछ टेस्ट फ्लाइट्स के बाद इजराइल के सिक्स डे वॉर में केवल कुछ मिनटों में मिस्र के छः “मिग-ट्वेंटीवन” गिराए.

उन दिनों केवल एक दिन में सवा सौ करोड़ अमेरिकी डॉलर्स का सामरिक निवेश बहोत ज्यादाह था. मिस्र घुटनों पर आ गया.

और जब ख़लीफ़ा गिरा तो शेष मुस्लिम राष्ट्र भी हट गए. सिक्स डे वॉर की विजय का श्रेय “डैनी” को जाता है. कमसकम मिस्र को घुटनों पर लाने का श्रेय उन्हीं का है.

आज लापता भारतीय पायलट, जिसने बूढ़े जहाज से नई रशियन मिसाइल “आर-सेवेंटीथ्री” चला कर “फॉल्कन सिक्सटीन” को टुकड़े टुकड़े कर डाला, उन्हें मेरा सलाम. ईश्वर से कामना कि वे जल्द सरजमीं पर लौटें.

जय हिन्द. जय हिन्द की सेना.

(योगी अनुराग की डायरी से)

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