सवाल है कि 1984 आखिर हुआ क्यों?

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दरअसल 1984 की भूमिका 70 के दशक में लिखी जा रही थी । 80 के दशक में जो पंजाब समस्या आयी उसकी भूमिका दरअसल इंदिरा गांधी ने 1975 की इमरजेंसी और 1977 के चुनावों की करारी हार के बाद लिखनी शुरू की..

इसे अगर सिर्फ 3 लाइन में समझना हो तो कारण ये था कि पंजाब में अकाली दल के सामने कांग्रेस की दाल गलती नही थी ।आज़ादी मिली तो 20 साल कांग्रेस का एकछत्र राज रहा पंजाब में । फिर जब हिमांचल हरियाणा अलग हुए तो पंजाब की राजनीति बदल गयी और सत्ता की चाभी सिखों — अकाली दल के हाथ आ गयी

1967 से लेकर 71 तक अकाली सरकार रही पंजाब में ।
फिर 1972 से 77 तक जब ज्ञानी जैल सिंह पंजाब के कांग्रेसी मुख्यमंत्री थे तो उन्होंने पंजाब में अकालियों को शांत करने के लिए जरनैल सिंह भिंडरवाला नामक एक व्यक्ति पैदा किया और उसे आगे कर राजनीति करने लगे। ये कुछ कुछ ऐसा ही है जैसे आज गुजरात में हार्दिक पटेल , जिग्नेश मेवाणी और अल्पेश ठाकोर को खड़ा किया जा रहा है।

दो तीन साल के अंदर ही भिंडरावाला एक भस्मासुर बन गया और उसने पंजाब में न सिर्फ कांग्रेस बल्कि समूचे पंजाब को खाना शुरू कर दिया। उधर हुआ ये था कि 1971 के युद्ध में पाकिस्तान की करारी हार , 90,000 सशस्त्र सैनिकों का आत्मसमर्पण और बांग्लादेश की आज़ादी के कारण पाकिस्तान चोट खाये नाग की तरह फुफकार रहा था । वहां की सरकार ये जान गई थी कि भारत को सीधे युद्ध मे तो हराया जा नही सकता तो उन्होंने ये प्रॉक्सी वार याने कि छद्म युद्ध शुरू किया और ISI ने भिंडरांवाले को गोद में बैठा लिया और खालिस्तान मूवमेन्ट को हवा देने लगे ।

अब वही भिंडरावाला जो कांग्रेस ने पैदा किया था वो इन्हें डसने लगा। 1977 में कांग्रेस चुनाव हार के सत्ता से बाहर हो गयी , पंजाब में बादल साहब की सरकार बनी और वो ISI , पाकिस्तान और भिंडरांवाले को सम्हाल न पाए । पर 1980 तक स्थितियां काबू में थीं , विषबेल अभी बस जन्मी ही थी। उसने अपना विकराल रूप दिखाया न था ।

1980 के आम चुनाव में कांग्रेस ने जनता पार्टी को हरा के सत्ता में वापसी की। दिल्ली में इंदिरा गांधी और पंजाब में कांग्रेसी दरबारा सिंह बैठा था । 1980 से 1983 इन तीन सालों में पंजाब में भिंडरांवाले ने इस क़दर उत्पात मचाया कि आप कल्पना नही कर सकते और इंदिरा गांधी तमाशा देखती रही।

1983 की सर्दियों में हथियारों से भरा एक ट्रक सीआरपीएफ ने स्वर्ण मंदिर के बाहर रोक लिया ल। सीआर पीएफ को पता था कि इसमे एलएमजी , राकेट लान्चर्स जैसे युद्ध के घातक हथियार हैं, वो भी एकाध नही , पूरा ट्रक भर के. पंजाब पुलिस और सीआरपीएफ उस ट्रक को 3 घंटे से भी ज़्यादा रोके रहे और फिर 3 घंटे बाद दिल्ली से आदेश आया , जाने दो!

जून 1984 तक आते आते वहां पूरी तरह एक सैन्य छावनी बन चुकी थी।

और फिर जब पानी सिर से ऊपर बहने लगा और जब लगा कि इसमे तो सिर्फ पंजाब नही बल्कि पूरा देश ही डूब जाएगा। जब लगा कि ये तो पूरा पंजाब प्रदेश  ही देश से अलग होने जा रहा है तो अंततः स्वर्ण मंदिर में सेना भेज के ऑपरेशन ब्लू स्टार जैसी कार्यवाही करनी पड़ी ।

ये कुछ कुछ ऐसा था कि एक छोटी सी फुंसी फुडिया को पाल पोस कर पहले नासूर बनाया और फिर जब उसने गैंग्रीन की बीमारी का रूप ले लिया और पूरे देश की ही जान खतरे में आ गयी तो ऑपरेशन ब्लू स्टार की कार्रवाई करनी पड़ी जिसमे देश का दायां बाजू ही काटना पड़ा।

सवाल ये है कि इंदिरा गांधी जैसे बड़ी , सयानी , समझदार नेता ने इतनी बड़ी मूर्खता कैसे की ।
1. सबसे पहले भिंडरावाले को पैदा क्यों किया
2. पैदा किया तो भस्मासुर बनने से पहले कुचल क्यों न दिया
3. पंजाब में हालात इस क़दर क्यों बिगड़ने दिए कि अंत में दरबार साहब में सेना भेजनी पड़ी ?
4. जिस दिन दरबार साहिब परिसर में पहली AK 47 गयी थी उसी दिन क्यों नही रोका ?
5. परिसर में इतना असलहा-हथियार , और इतने आतंकी थे कि भारतीय सेना को जान की बन आयी और टैंक चलाने पड़े ? जब इतना हथियार और गोला बारूद वहां लाया जा रहा था ट्रक भर-भर के तो पंजाब सरकार और इंदिरा गांधी कर क्या रही थी।

इंदिरा गांधी को अपनी इस मूर्खता की कीमत अपनी जान दे के चुकानी पड़ी और पूरे देश ने फिर इसकी कीमत पूरे 15 साल तक चुकाई। सिर्फ कांग्रेस की वोट बैंक राजनीति के कारण

(भारतभूषण जुनेजा)


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