सांस्कृतिक कुंभ – कला उत्सव : दिवस-41 : 23 फरवरी 2019

स्वच्छता और सुरक्षा किसी भी जन-आयोजन के लिए महत्वपूर्ण हैं. और यदि बात विश्व के सबसे बड़े धार्मिक आयोजन अर्थात कुम्भ की हो, तो ये दोनो व्यवस्थायें और भी महत्वपूर्ण हो जाती हैं. गर्व के साथ कहना होगा कि कुम्भ में अन्य तमाम अहम व्यवस्थाओं के साथ इन दोनों सर्वाधिक महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं का पूर्ण ध्यान रखा गया है और देश-विदेश से पधारे आगंतुकों ने इसकी प्रशंसा की है. स्वच्छता और सुरक्षा के साथ तीसरा अत्यंत महत्वपूर्ण विषय जो कुम्भ को अभूतपूर्व बनाता है, वह है संस्कृति. कुम्भ में देश की संस्कृति के वे झरोखे देखने को मिल रहे हैं जिनमे हमारी आंचलिक संस्कृति का गौरव भी सन्निहित है. उत्तरप्रदेश सरकार को धन्यवाद देते हुए प्रदेश के संस्कृति विभाग को श्रेय देना होगा इस सांस्कृतिक गौरव को विश्व स्तर का मंच प्रदान करने के लिए, जो प्रयागराज शहर और कुम्भ परिसर में सांस्कृतिक मंचों के रूप में दर्शनीय है.

आज भी नित्य की भांति ही कुम्भ के सांस्कृतिक मंच कलाकारों की कलाओं के प्रतिनिधि बने रहे. कुम्भ परिसर के सेक्टर 4 स्थित अक्षयवट मंच पर लखनऊ की कलाकार जोड़ी वालिनी द्विवेदी और रेनू श्रीवास्तव के द्वारा कत्थक नृत्य की एक शानदार प्रस्तुति देखी गयी. कत्थक नृत्य के बाद लखनऊ की ही गायिका मीना मिश्रा का सुरीला गायन हुआ जिसके बाद प्रयागराज की लोक-गायिका अंकिता चतुर्वेदी ने सुन्दर लोक-गीत प्रस्तुत किये. अंकिता चतुर्वेदी ने कार्यक्रम की शुरुआत गणेश वंदना वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ गायन के माध्यम से की. इसके बाद उन्होंने हनुमान जी के लिए समर्पित – प्रतिपाला भजन, श्री कृष्ण भक्ति गीत – रसराज ब्रिज बिहारी भजन की खूबसूरत प्रस्तुति दी और अपने सांगीतिक कार्यक्रम का समापन- छाप तिलक सब छीनी के गायन के साथ किया. लोक-गीतों के इस कार्यक्रम के बाद सुल्तानपुर की निष्ठा शर्मा ने लोकप्रिय गीतों का आकर्षक कार्यक्रम प्रस्तुत किया जिसका दर्शकों ने तालियों के साथ अभिवादन किया.

सेक्टर 6 स्थित भारद्वाज मंच पर अयोध्या के विजयराम दास के शास्त्रीय पखावज वादन की प्रस्तुति हुई जिसके बाद लखनऊ की गायिका स्वाती रिजवी ने पेश कीं दिल को छू लेने वाली ग़ज़लें और भजन. संगीत के इस कार्यक्रम के बाद अयोध्या की गायिका सुरभि पाल के अवधी लोक गीतों और नृत्य के कार्यक्रम ने दर्शकों को आनंदित किया.

सेक्टर 17 के यमुना मंच पर ‘देखो मात सरस्वती करी कृपा’ गीत से सरस्वती जी की वन्दना करते हुए उन्नाव से आये हुए गोपी किशन ने कार्यक्रम का शुभारम्भ किया. करिंगा राय और ऊदल की लड़ाई के अतिरिक्त गोपी किशन ने और कई लड़ाईयों का वर्णन अपने आल्हा के माध्यम से करके कार्यक्रम को आगे बढ़ाया. आल्हा गायन के बाद अयोध्या से आयी हुई डाक्टर सुरभि पाल ने अपने अवधी लोकगीतों से मंच को सजाते हुए कई मनमोहक प्रस्तुतियाँ दी. डाक्टर पाल ने गंगा स्तुति ‘संगम के तीर’ की प्रस्तुति के साथ अपने गायन की शुरुआत की जिसके बाद उन्होंने देवी गीत – ‘गंगा तोरी लहर बरदानी’ और अवधी होली गीत – ‘खेले कनक भवन में होली’ सहित कई लोकप्रिय लोकगीत प्रस्तुत किये. डाक्टर पाल के बाद लखनऊ के गायक संतोष कुमार के गायन का एक आकर्षक कार्यक्रम प्रस्तुत हुआ जिसका दर्शकों ने तालियों के साथ स्वागत किया.

सेक्टर 13 स्थित सरस्वती मंच पर कानपुर की कलाकार ऋचा मिश्रा ने संस्कार गीतों की सुन्दर प्रस्तुति दी. संस्कार गीतों के बाद लखनऊ के कलाकार देवेंद्र चतुर्वेदी ने संगीत का कार्यक्रम पेश किया जिसमें उन्होंने सुगम संगीत पर आधारित गीत प्रस्तुत किये. फिर मंच पर दिखाया गया एक विशेष कार्यक्रम – अटल वाक्य, जिसे प्रस्तुत किया लखनऊ के कलाकार प्रिवेंद्र सिंह ने जिसे दर्शकों की लगातार बजती तालियों से भरपूर समर्थन प्राप्त हुआ.

प्रयागराज शहर में स्थित सांस्कृतिक मंचों पर भी कला के दीपक आज दिन भर जगमगाते रहे. किला चौराहे, अक्षयवट मंच और भारद्वाज मंच के निकट स्थित सांस्कृतिक मंचों पर आज मध्यप्रदेश के कलाकार अशोक पांडेय ने नोरता लोक नृत्य प्रस्तुत किया जो कि माँ दुर्गा की आराधना पर आधारित है और नवरात्रि के अवसर पर किया जाता है. नोरता नृत्य के उपरान्त लखनऊ के हरिओम पपेट एंड मिरेकल ग्रुप ने कठपुतली शो की सुंदर प्रस्तुति से दर्शकों की वाहवाही लूटी.

केपी इंटर कॉलेज कला-मंच, लेप्रोसी मिशन चौराहे और सरस्वती घाट -नैनी ब्रिज के निकट स्थित सांस्कृतिक मंचों पर आज मिर्जापुर के कलाकार रामदेव ने लोक गीत व नृत्य प्रस्तुत किये. उन्होंने माँ गंगा पर आधारित गीत ‘निर्मल गंगा जी के पानी लहर सुहानी’ से शुरुआत कर कई लोकप्रिय जनगीत प्रस्तुत किये तो वहीं मन्च पर साथी कलाकार अनामिका और रूबी ने सुन्दर नृत्य कर समा बाँध दिया. लोक गीत व नृत्य के उपरान्त उन्नाव के लोक गायक अमरनाथ ने आल्हा की ज़ोरदार प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया.

संस्कृति ग्राम चौराहे, अरैल सेक्टर 19 और वल्लभाचार्य मोड़ के निकट स्थित सांस्कृतिक मंचों पर आज सेवा संगीत समिति रायबरेली की कलाकार उषा उपाध्याय का अवधी लोक गायन हुआ. लोक गायन के बाद लखनऊ की दृश्य भारती संस्था ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ विषय पर एक सन्देश पूर्ण नाटक का मंच कर दर्शकों की सराहना अर्जित की. बालसन चौराहे, इंद्रमूर्ति चौराहे और बैंक चौराहे (प्रयाग स्टेशन) के निकट स्थित सांस्कृतिक मंचों पर आजमगढ़ के सूरज चंद्रा ने लोक नृत्य प्रस्तुत किये जिसके जवाब में लखनऊ के फोक आर्ट ग्रुप ने भी उतना ही प्रभावशाली लोक नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों का मन मोह लिया.

सुभाष चौराहे, सिविल लाइंस बस स्टॉप और पत्थर वाले चर्च के निकट स्थित सांस्कृतिक मंचों पर उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी की संस्था प्रयास द्वारा नाटक का मंचन किया गया. संस्था ने अपने नाटक के माध्यम से स्वच्छता अभियान की दिशा में अपना सराहनीय कलात्मक योगदान दिया और स्वच्छता के प्रति दर्शकों को सकारात्मक प्रेरणा भी दी. नाटक की इस प्रस्तुति के बाद दर्शकों ने जादू का कार्यक्रम देखा जिसे बिहार के जादूगर प्रमोद कुमार मिश्र ने प्रस्तुत किया. विश्वविद्यालय तिराहे और राजापुर ट्रैफिक चौराहे के निकट स्थित सांस्कृतिक मंचों पर लखनऊ के कलाकार सोमेंद्र प्रताप सिंह ने नाटक का मंचन किया. नाटक के बाद गोरखपुर की फूलादेवी गुप्ता ने लोक गीतों की सुन्दर प्रस्तुति से दर्शकों का दिल जीत लिया.

हीरालाल हलवाई चौराहे, हाथी पार्क और प्रयागराज जंक्शन के निकट स्थित सांस्कृतिक मंचों पर लखनऊ की सरस्वती सेवा संस्थान ने लोक नृत्य का कार्यक्रम प्रस्तुत किया तो उनके जवाब में भदोही के शेषमणि सरोज एंड पार्टी ने बिरहा लोक गीत गा कर समा बाँध दिया. प्रयागराज से न्यूज़ इन्डिया ग्लोबल के लिये पारिजात त्रिपाठी.