सांस्कृतिक कुंभ – कला उत्सव : दिवस- 50 : 4 मार्च 2019

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आज प्रयागराज कुम्भ -2019 का अंतिम दिन है. पचास दिवसीय कुम्भ अपने साथ बहुत सी यादें छोड़ कर आज विदा ले रहा है. भव्य कुम्भ – दिव्य कुम्भ जहां अभूतपूर्व कुम्भ के रूप में गौरवान्वित हुआ है, वहीं सांस्कृतिक कुम्भ के रूप में भी प्रथम बार इसका एक नया आयाम सामने आया है.

प्रयागराज और कुम्भ आज एक दूसरे के पूरक हो गये हैं. कुम्भ की इस अभूतपूर्व सफलता के लिये उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ साधुवाद के पात्र हैं. सीएम योगी के नेेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार को इस सफल आयोजन का समस्त श्रेय जाता है. पचास दिवसीय इस जन-उत्सव में कोई दुर्घटना तो दूर की बात है, किसी भी तरह की कोई समस्या भी उतपन्न नहीं हुई. उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग ने सांस्कृतिक मंचों का सृजन कर जिस तरह विश्व मीडिया के समक्ष भारतीय कला-संस्कृति का उत्कृष्ट स्वरुप प्रस्तुत किया है उसने देश की लोक कला के आत्मविश्वास के संवर्धन में महती भूमिका निभाई है.

आज कुम्भ परिसर स्थित सभी सांस्कृतिक मंच सदा की भांति सांस्कृतिक प्रकाश से जाज्वल्यमान रहे. सेक्टर 4 स्थित अक्षयवट मंच पर आज सोमवार को दिव्य कुम्भ – भव्य कुम्भ की विदाई बेला में लखनऊ एवं वाराणसी के कलाकारों ने अक्षयवट मंच पर जमकर हुड़दंग मचाया. सबसे पहले वाराणसी से आये उपशास्त्रीय गायक गणेश प्रसाद मिश्रा का गायन हुआ. उन्होंने ‘काशी में होली रचाई भोला ‘ के होली गीत से सीमा बांध दिया. इसके पहले बसुरिया अब न बजाओ ‘ की ठुमरी सुनाई. साथ में भोले नाथ का भजन ‘डिमक-२ डमरू कर बाजे सुनाया’ . इसके बाद लखनऊ से आई अंतर्राष्ट्रीय कत्थक नृत्यांगना डॉक्टर मीरा दीक्षित का कत्थक नृत्य हुआ . उन्होंने “जय-३ जग जननी देवी…की दुर्गा स्तुति पर कत्थक नृत्य पेश किया .

इसी तरह से “श्याम रंग दार मोरी चुनार रंग डारी….” राधा कृष्णा गीत पर शानदार प्रस्तुति की . लखनऊ से आई स्वाति साहू ने कत्थक नृत्य पेश किया . उन्होंने देश भक्ति गीत “वंदे मातरम” पर कत्थक प्रस्तुति दी . इसके बाद “गन-२ गणपति …” पर गणेश वंदना नृत्य किया. “नमो-२” के गीत पर शिव तांडव नृत्य किया. प्रयागराज के नीरज पांडेय एंड ग्रुप ने लोक गायन किया. देवी गीत “निमिया के दर मैय्या….” से श्रोताओं का दिल जीत लिया. उनका भोले विवाह गीत भी लोगों को भा गया . ‘देश के शहीदन से – भारत के मुरीदन से’ का देशभक्ति गीत सुनाया . अंतिम प्रस्तुति के रूप में आरुषि निशंक लखनऊ ने कार्यक्रम दिया. उन्होंने कत्थक नृत्य के माध्यम से विभिन्न भाव भंगिमाओं की प्रस्तुति दी.

कुम्भ परिसर के सेक्टर ६ स्थित भारद्वाज मंच पर प्रयागराज के गायक विशाल जैन ने भजनों की प्रस्तुति से मंच के कार्यक्रमों का श्रीगणेश किया. प्रतापगढ़ की लोकगायिका नीलम सिंह ने लोकगीत सुनाये तो लखनऊ की कलाकार मनीषा मिश्रा ने कत्थक नृत्य की मनोहारी प्रस्तुति दी. प्रयागराज की जूली सिंह ने गायन का कार्यक्रम प्रस्तुत किया जिनसे पश्चात लखनऊ की गायिका श्वेता सिंह ने लोक गीतों की सुन्दर प्रस्तुति से दर्शकों की सराहना अर्जित की.

सेक्टर 17 के यमुना मंच पर अलवर के कलाकार युसूफ खान ने भपंग वादन से शुरुआत की. रांची के कलाकार सुबोध प्रामाणिक ने छाऊ और पैका लोक नृत्य प्रस्तुत किये. जौनपुर से आये जगदीश जौनपुरी ने भोजपुरी गायन से अपना सांगीतिक कार्यक्रम प्रारम्भ किया. जगदीश जौनपुरी ने बहुत ही सुंदर लोकगीतों से दर्शकों का मनोरंजन किया तथा गंगा गीत, देवी गीत सहित कई मनोरंजक प्रस्तुतियां देकर उन्होंने अपने नाम को चरितार्थ किया. अगली प्रस्तुति मपंग वादन की रही. शिवजी के डमरू से निकला हुआ ये वाद्य अलवर से आये यूसुफ खान ने अपने साथियों के साथ बजाकर सभी को आनंदित किया. सबसे आश्चर्यजनक बात ये रही कि यूसुफ खान ने बताया कि हम लोग मुस्लिम होते हुए भी शिवजी के उपासक है. लखनऊ के गायक विजय वर्मा ने लोक गायन किया तो मुंबई से आई समरजीत रंधावा ने सूफी गायन की प्रस्तुति दे कर दर्शकों की जमकर वाह-वाही लूटी.

सेक्टर १३ स्थित सरस्वती मंच पर प्रयागराज की संस्था बैक स्टेज ने नाटक का मंचन किया तो लखनऊ के कलाकार भारतेन्दु कश्यप ने दास्ताने कुम्भ प्रस्तुत किया. इसके बाद हुए काव्यपाठ ने दर्शकों का न केवल मनोरंजन किया बल्कि कवियों की कविताओं से जीवन समाज और राष्ट्र के प्रति उन्हें सन्देश भी प्राप्त हुआ. काव्यपाठ में मेरठ के हरिओम पवार, लखनऊ के प्रख्यात मिश्र, झांसी के अर्जुन सिंह, झांसी के ही मदन गोपाल वीरथरे, हरदोई की राजकुमारी मिश्रा, फर्रुखाबाद के निराला राही, लखीमपुर के वाहिद अली वाहिद, लखनऊ की डॉक्टर मानसी द्विवेदी, कायमगंज के पवन वाथम, बदायूं के उमाशंकर राही, लखनऊ के प्रलयंकर, बरेली के कमल सक्सेना, लखनऊ के सुधीर आदिब, आगरा के बांकेलाल गौंड, अलीगढ़ के पदम अलबेला, दिल्ली के मनोज कुमार सिंह भावुक, पीलीभीत के अविनाशचंद्र मिश्र, नीलेश कात्यायन, नोएडा के संतोष कुमार शर्मा ‘बाबा कानपुरी’, गौंडा के शिवपूजन शुक्ला, संत कबीर नगर अरविन्द कुमार पांडेय ने भाग लिया.

सेक्टर 1 स्थित गंगा मंच पर “डेप्थ ऑफ़ सिनेमा” के तहत मुम्बईया कलाकारों ने भारतीय संस्कृति की विविधताओं की झलक दिखाई. मुंबई से आये कलाकारों ने विष्णुसहस्त्रनाम, शिव स्तुति, शिव तांडव व राम धुन समेत विभिन्न भाषाओं की गायन एवं नृत्य शैली की प्रस्तुति दी. इसमें अवधी, भोजपुरी व गुजराती भाषाओं में प्रस्तुति हुई. सबसे पहले मुख्य निर्देशक सुधाकर स्नेह ने “वर दे वीणा वादिनी” की वंदना प्रस्तुत की. इसके बाद मुंबई की रेखा राज ने सूफियाना कलाम पेश किया. सुधाकर स्नेह ने “मन लागो यार फकीरी में” का कबीर भजन पेश किया. मुंबई की ही रिंकी मिश्रा ने ‘भैरवाष्टकम” व ‘शिव तांडव’ नृत्य किया. सुधाकर स्नेह ने गंगा गीत “माई अमृत बा गंगा जी के पनिया” और उसके बाद विभिन्न प्रांतों के कलाकारों ने जुड़ कर पंजाबी और राजस्थानी प्रस्तुतियां दीं, इसी टीम ने इंस्ट्रुमेंटल प्रस्तुतियां दीं. अंतिम प्रस्तुति के रूप में पुलवामा के जवानों के लिए सुधाकर स्नेह ने “जय जवान जय जय जवान” की प्रस्तुति दी. वन्दे मातरम गीत के साथ डेढ़ घंटे चले इस कार्यक्रम का समापन कर दिया गया. प्रयागराज से न्यूज़ इन्डिया ग्लोबल के लिये पारिजात त्रिपाठी.

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